सोमवार, 9 दिसंबर 2024

MOHIB MUJAHID SHAIKH


                                                      

                                                          खुसबू जैसे लोग मिले     

                                                            मोहिब मुजाहिद शेख  

                                                     मेहनत से वो तक़दीर बना लेते हैअपनी 

                                                   विरसे में जिनेह कोई खज़ाना नहीं मिलता 

अब तक में इस टॉपिक पर बुज़र्गों के खाके लिखता रहा हूँ। आज एक नौजवान जो अपनी मेहनत ,ईमानदारी ,जाँफ़िफिषानी से कम उम्र (Age ) में तरक़्की की कई पॉयदाने तै करके ,अपना एक मक़ाम बना लिया।  

   मोहिब शेख़ अनवर साहब डिप्टी कलेक्टर का पोता ,मुजाहिद सर का बेटा। मुजाहिद सर बहुत कम उम्र में इंतेक़ाल कर गए वो भी B.A ग्रेजुएट थे। सब से पहले जलगाओं रिलेटिव ग्रुप फॉर्म किया। ५०० रिश्तेदारों को एक मंच पर  इखट्टा किया। इस दुनिया से रुखसत होगये। 

                                                    राहों की ज़हमतों का तूमेह क्या सुबूत दूँ 

                                                    मंज़िल मिली तो पाव  के छाले नहीं रहे 

  मोहिब की ज़िन्दगी कोशिशों से भर पुर रही। जलगांव यूनिवर्सिटी से B.COM करके डिप्लोमा इन टेक्सेशन लॉ किया। जलगांव शहर में जदोजहद जारी रखी। CA की ऑफिस में काम करता ,  लोगों के आधार कार्ड डॉक्यूमेंट बनाता रहा। फ़ूड डेलिवेरी का काम भी किया। इंग्लिश क्लास्सेस ज्वाइन की इंग्लिश पर कमांड हासिल किया। शहादा में एकाउंट्स का काम भी किया। जलगाव के पहले इक़रा खानदेश के प्रोग्राम को मोहिब ही ने यू  टयब पर रिले किया था। 

                                                        जिन के मज़बूत इरादे बने पहचान उनकी 

                                                        मंज़िलें आप ही होजाती है आसान उनकी 

 फिर उसकी किस्मत ने ज़ोर मारा माशाल्लाह बहरीन में उसे अकाउंटेंट की ऑफर मिली। दो साल से कम अरसे में उसके वालिद मुजाहिद का इंतेक़ाल होगया। उसने हिम्मत नहीं हारी ,बहरीन में अपनी काविशें जारी रखी दूसरी कंपनी में सीनियर अकाउंटेंट की पोजीशन मिली। अब अपने आप को नए सेट उप में एस्टब्लिश करने में मिया मोहिब मसरूफ है। अल्लाह उनेह कामयाबी अता करे मुस्तक़बिल की राहें मुन्नवर करे आमीन। मोहिब की तरक़्की में उसकी वालिदा मोफिज़ा की दुवाओं का बहुत असर रहा है। 


  

  



एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया

                                            एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया 

आज सुबह (९ दिसंबर -२०२४ )जलगांव की मुबाउनिस्सा की मौत की खबर सभी रिश्तेदारों के ग्रुप्स में नज़र से गुज़री तो समझ में नहीं आया कौन मोहतरमा इंतेक़ाल कर गयी। मखदूम अली ने फ़ोन पर इत्तला दी मुबा मुमानी  ७९ की उम्र गुज़ार कर इस जहाने फानी  से कूच कर गयी। सकते में चला गया ,मखदूम अली भीअपने जज़्बात पर काबू न रख सका सिसकियाँ लेता रहा । 

     जलगांव का तार्रुफ़ तीन चीज़ों से किया जा सकता है। मेहरून का तालाब ,मेहरुन के बेर जाम और दिल से क़रीब मुबा मुमानी। शायद कोई जलगांव विजिट करे और ऊन से मुलाक़ात न करे। शहर के बीचों  बीच मुमानी का मकान ,आठवडा बाजार से क़रीब ,हम वहां से गुज़रे , औरउसे नज़र अंदाज़ कर ही नहीं  सकते थे। शायद ही कोई हमारी १९७१ मट्रिक बैच का साथी रहा हो जो उनेह न जानता हो। मखदूम अली की मुमानी हम सब की मुमानी। मरहूम इंस्पेक्टर शेर अली सय्यद , मरहूम इंस्पेक्टर रफ़ीक शैख़ ,निसार ,सादिक़ ,हसन गाहे गाहे उन से मुलाक़ात कर ही लेते थे। जब  भी उन से मिलने गया एक जुमला सुनने को मिलता " अरे रागिब बहुत दिनों बाद आया रे "

तुम्हारे लहजे म जो गर्मी व हलावत है 

उसे भला सा कोई नाम दो वफ़ा की जगह 

ग़नीमे नूर का हमला कहो अंधेरों में 

दयारे दर्द में आमद कहो बहारों की 

भला किसी ने कभी रंग व बू को पकड़ा है 

शफ़क़ को क़ैद में रखा हवा को बंद किया 

   मुमानी हमेशा मद्धम ,शहद से दुबे लहजे में गुफ़्तगू  करती थी। कभी भी किसी से तल्ख़ गफ्तगु ,ग़ुस्सा करते नहीं देखा। दराज़ क़द ,दूध की तरह शफाफ रंग। चेहरे पर अजीब वक़ार था आदमी देखते ही मरऊब होजाता था। मुझे हमेशा बचपन में लगता था  जैसे वो किसी ऊँचे खानदान से ताल्लुक़ रखती हो। लेकिन हम सब के लिए मोम की तरह नरम हुवा करती।  मुबा मुमानी ने अपने दो बच्चों नाज़िरोद्दीन,कफील  और  अपने भांजे ,मखदूम अली को अपने लखत जिगर से ज़ियादा चाहा ,इलावा मेरी भी  तरबियत में, उनक हाथ रहा है। हमेशा नसीहत आमेज़  गुफ्तगू करती थी। मेरी अम्मा जब मैं ९ साल का था इंतेक़ाल कर गयी थी। उनके चेहरे में  मुझे मामता की  झलक नज़र आती थी। 

 उनकी एक खासियत ,रिश्तेदारों की  Encyclopedia थी। रिश्तेदारों की किसी भी क़िस्म की  मालूमात उनके फिंगर टिप्स पर रहा करती थी। रिश्तेदारों के ताल्लुक़ से शायद ही कोई अब इतनी जानकारी रखता हो।  फॅमिली ट्री तरतीब देने में मरहूम मिस्बाह अंजुम ने उन से बहुत मदद ली थी। 

                                                       हमारे दिल से लेकिन कब गया वो 

 मुबा मुमानी के इंतेक़ाल पर हम सब तो सब्र करलेंगे। मामू  की कुछ और ही बात है ,शायद ही कभी मुमानी से जुदा रहे हो ५० सालों की रफ़ाक़त पल भर में टूट गयी ,उन की जिंदिगी में  हमेशा एक खला सी रहेंगी ,जो शायद ही पुर हो सके। 

  अल्लाह हम सब को सबरे जमील अता करे। कहा जाता है अच्छे लोग लौंग इलायची की तरह अनका (कम ) होते जा रहे हैं। मुबा मुमानी भी नहीं रही लेकिन उन  की यादें हमेशा हमारे दिलों में ताज़ा रहेंगी अल्लाह मुमानी मुबा को जन्नत के आला दरजात आता करे अमीन सुम्मा अमीन। 

    



बुधवार, 20 नवंबर 2024

Sayli weds Tushar

                                                  हम ने क्या खोया हम ने क्या पाया 

सायली और तुषार की शादी। कहा जाता है लड़कियां ताड़ की तरह बढ़ती है। सायली की वो पहली किलकारी ,पहले पहले तुतले तुतले लहजे (Accent )में बात करना ,रेंगना ,फिर गिरते पड़ते ,चलना सीखना भाबी लता और प्रकाश सोनवणे कभी भूल नहीं पाएंगे। फिर कीड़े मकोड़े की तरह लिखने  पर आप लोगों  ने ज़रूर जश्न  मनाया होंगा।  स्कूल की सायली की शरारतें ,स्कूल कॉलेज में टॉप करने पर ख़ुशी का एहसास ,हर साल सायली  की सालगिरह की पार्टी। उसके दोस्तों से मिलने पर दिल के किसी गोशे में ख़ुशी की लहरें उठना। 

                                                  तुम चले जाओंगे तो सोचेंगे 

                                                   हम ने क्या खोया हम ने क्या पाया 

        बच्चों के जाने के बाद ज़िन्दगी में खोने के एहसास ही बाक़ी रह जाता है। फिर उसके पुराने एल्बम ,वीडियोस हमारी ज़िन्दगी का सरमाया होजाते हैं। उसकी अलमारी रखे उसके कपडे  ,उसके पुराने खिलोने हमारे लिए ख़ज़ाने से बढ़ कर होजाते हैं।  वह जब भी मिलने आएँगी घर बहार की तरह खिल उठेंगा ,उस की जुदाई पर महसूस होंगा 

                                           तेरी क़ुरबत के लम्हे फूल जैसे 

                                           मगर फूलों की उम्र मुख़्तसर हैं 

    ज़न्दगी की यही रीत है। बेटी दामाद के साथ ही शोभती है। माँ बाप शादी का फ़र्ज़ अदा करके हमेश यही दुआ देते हैं 

                                             जहाँ रहे वो खैरियत के साथ रहे 

                                              उठाये हाथ तो ये  दुआ याद आयी 



   

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2024

salgirah mubarak

गुड इवनिंग नमस्ते 
ये तो एक रस्मे जहाँ है जो अदा होती है 
वरना सूरज की कहाँ सालगिरह होती है 
आज में आप सब  के सामने हमारी दो ब्यूटीफुल लेडीज के बर्थ डे की मुबारकबाद देती हूँ। और थोड़ा सा कुछ में ने अपने दिल के जज़्बात पेश करने की कोशिश की हूँ। उसे में आप के सामने पढ़ कर सुनाती हूँ। जब में ने पहली बार चंद्र कला ऑन्टी को देखा उसी वक़्त मेरे दिल में एक अच्छी सी फीलिंग आयी। बाद में हम बार बार मिलने लगे और में उनके बारे में और उनके नेचर के बारे में जानने लगी। तू मुझे बहुत ख़ुशी हुयी। सब से खुश दिली से मिलना ,सब की बात सुनना और हमेशा मुस्कुराते रहना ये उनका सवभाव है। अब जब भी में गार्डन आती हूँ तो में तम्मना करती हूँ के आज ऑन्टी गार्डन में ज़रूर हो। अगर वो किसी दिन नहीं होती मुझे थोड़ी मायूसी होती। 
       अब दूसरी गुप्ता ऑन्टी ,के बारे में जितना जानती हूँ ,वह भी बहुत अच्छे सवभाव की है ,और अपनी फिटनेस पर बहुत ध्यान देती है। और दोनों लेडीज अभी भी कितनी ब्यूटीफुल लगती है। दोनों में दोस्ती भी बहुत है।
        ऊपर वाला उनकी जोड़ी सलामत रखे ,और दोनों को हमेशा हँसता मुस्कुराता रखे। दोनों बहुत पॉजिटिव नेचर की हैं। हमें उनसे बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है। उनका हाथ हमारे सर पर हमेशा बना रहे।  अब में इस शेर के साथ यहीं पर ख़त्म करती हूँ 
            तुम जियो हज़ारो साल 
             साल के दिन हो पचास हाज़र 
शगुफ्ता शेख़ 
















रविवार, 22 सितंबर 2024

Inquilab ke liye

                                                              جو بات کہے وہ کرے     

سورہ صف میں الله فرماتا ہے "تم وہ کہتے کیوں ہو جو کرتے نہیں بچے ننھے پودوں کیطرح  ہوتے ہیں  ان میں احساس زممیداری جگانے کے  لئے نصیحتیں کارگرثابت  ہوتی ہیں لیکن اگر آپ خود سوشل میڈیا پر گھنٹوں برباد کر رہے  ہیں اور بچوں کو سوشل میڈیا پر وقت برباد کرنے سے روک رہے ہیں ،تو آج کی جنریشن اتنی زہین ہیں جو ہر چیز پر غور کرتی ہیں   خود کتابیں پڑھے خود نماز کی پابندی کرے  گھر کے کام میں حصّہ لیں خود فاسٹ فوڈ سے دور رہے اور پھر بچوں کو بتایں کے کس طرح یہ چیزیں صحت کو برباد کرتی ہے اور ان چیزوں سےدوری  بنا کر کتنے پیسوں کی بچت ہو سکتی ہیں -   وقت کی پابندی کا احساس کریں اآپ خود روزانہ پابندگی سے مورننگ واک کر  رہے ہیں  تو انہں بھی اس بات کا احساس ہوگا کے صحت کے لئے یہ کتنا ضروری ہے 

شگفتہ راغب شیخ       

نیرول (نوی ممبئی )                             

शुक्रवार, 13 सितंबर 2024

INQILAB ODHNI KE LIYE

                                                                                       

                                                                               اوڑھنی کےلئے 

                                            معمر والدیں کے ساتھ وقت گزارنا کیوں ضروری 

                                                                        قرآنی حکم پر عمل 

قرآن میں شرک  سے بچنے کے  بعد سب سے زیادہ جس بات کی نصیحت کی گی ہے وہ ہے ماں باپ کے ساتھ حسن سلوک 

بوڑھے والدین کے ساتھ وقت گزار کر ہم انکے تجربات سے بہت کچھ سیکھ سکتے ہیں 

انکے غم پریشانیاں شیر کرنے پر انھیں خوشی ملتی ہیں سکوں حاصل ہوتا ہے 

اپنے ساتھ تفریح پر لیجانے سے انکی تنہایی دور ہوتی ہے انکا دل بڑا ہوجاتا ہے 

انکی دعا ہماری زندگی میں سکوں ،خوشیاں اور طمانیت بھر دیتی ہیں 

نواسے نواسیاں ،پوتے پوتیوں سے مل کر انکی خوشیوں میں اضافہ ہوجاتا ہے 

ہم بھی ان سے مل کر صحت کے تعلّق سے اچھے مشورے دے سکتے ہیں 

الله ہر کسی کو اپنے بوڑھے والدین کی خدمات کی توفیق عطا کرے --آمین 

شگفتہ راغب شیخ 


मंगलवार, 3 सितंबर 2024

mubarakbad

                                                                                         مبارکباد 

مکرمی 

خطیب کوکن جناب علی ایم شمسی صا حب  کے سماجی ،فلاحی کاموں اور قوم کی خدمات کے کاموں کا  اعتراف کرتے ہوے آپکو کوکوکن مرکنٹائل بینک کی جانب سے "لائف ٹائم اچیومنٹ ایوارڈ " سے نوازا گیا -موصوف کو یشونت راؤ پرتیستان نوی ممبئی کی طرف سے "سپرچول لیڈر " کے خطاب سے بھی کچھ عرصہ پہلے نوازا گیا تھا.آپ نے اپنی عمر کے طویل ٧٠ سال سماجی کاموں کے نظر کے ہیں مرکزفلاح کے تمام ترستیاں اور اہل نوی ممبئی آپکے فلاحی کاموں کو سلام کرتے ہے دل سے مبارکباد پیش کرتے ہیں اور موصوف کے لئےعمر میں برکت کے لئے دعا کرتے ہیں آمین 

راغب احمد /حمید خانزادہ /اوصاف عثمانی /منصور جٹہام /ڈاکٹر شریف