सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

                                                                               مکافات عمل 

وہ عبدل عزیز کے نیک   ا عمال تھے یا ماں کی دعا یں جو وہ مسلسل زندگی کے بے رحمانا طوفانوں سے بچتا رہا -ہر بار حالات کی سختیوں کا  مقابلہ کرتا رہا -کچھ لوگوں کی  زندگی چھوٹی موٹی پریشانیوں کے بعد آسانی سے گزر جاتی اور کچھ لوگ ہمیشہ حالات کے چکّر میں رہتے ہیں 

                              آدمی جو لیتا ہے آدمی جو دیتا ہیں 

                                                                      زندگی بھر وہ دعا یں پیچھا کرتی ہیں 

      بچپن کا ایک واقع اس کے بڑے بھایئ اسد شیخ نے بیان کیا ،  ایک طوطے کی موت پر عبدل عزیز بہت ملول ہوگیا تھا -اس نے قبر کھودی طوطے کوکفن پہنایا اور  دفن کیا اور  خلوص سے فاتحہ بھی  پڑھی تھی - -پھر مرچنٹ نیوی میں جاب کر  -

ملک  ملک گھومتا رہا - آخر میں نیویورک میں جیکسن ہا یٹ میں اپنا ذاتی  مکان خرید کر مستقل رہایش اختیار کر لی-اس وقت بہت کم گھروں میں نجی ٹیلی فون ہوا کرتے تھے عبدل عزیز اپنے پڑوس میں مورتھی صاھب جو شپنگ کارپوریشن میں جنرل مینیجر تھے  کے گھر فون کیا کرتا تھا -١٩٨٨ میں یکایک اس کے فون اور خطوط آنا بند ہوگے 

  ماں اور خاندان والے پریشان تھے عبدل عزیز تک پہچنے کی تمام کوششیں ناکام ہوگیی -اسے زمین کھا گی یا آسمان -گھر والے تمام کوششیں کر خاموش بیٹھ گئے -سن ٢٠٢٠ میں مکمل ٣٢ سال بعد پوسٹ من  ایک خط ڈیلیور کرتا ہے جس میں پتے کے نیچے پوسٹ من کو ایک ریکویسٹ لکھی ہوتی ہے کے وہ یہ خط اسکے گھر تک پہنچا دے -پتے کی جگہ صرف فلیٹ نمبر سوسایٹی کا نام لکھا ہوتا ہے -پوسٹ میں پرانا تھا جو خط پہنچا دیتا ہے -خط میں  عبدل عزیز نے لکھا تھا کے ٣٢ سال پہلے اپنے فلیٹ جو دوسرے فلور پر تھا وہ کسی کی کار پر گرا تھا پھر اسکے بعد اسے کچھ یاد نہیں رہا - کس  نے اسے اسپتال پنہچایا اس طویل عرصے میں وہ کیا کرتا رہا اسے پتہ نہ تھا - کس نے اسے اس شیلٹر پنہچایا جہاں وہ فلحال مقیم تھا -اس دوران اس کی ماں اپنی یادداشت تک کھو چکی تھی -کیا المیہ تھا بیٹے کے لیے وہ اس قدر دعا کرتی تھی اسے ویڈیو کالنگ پر پہچان نہیں سکی

  -ماں کے انتقال کے ٦ ماه بعد  عبدل عزیز کی بھی ایک حادثے میں موت ہوگیی موت کی خبر بھی عجب طرح سے خاندان تک پہنچی جو ایک معجزہ ہی لگتا ہے -ان کے پڑوسی مورتی کو میسج دیا جاتا ہے کے عبدل عزیز جس دکان سے اپنا فون ریچارج کرتا تھا اس کے مالک نے بتایا کے عبدل عزیز کی موت ایک حادثے ہوگیی ہے اور ہسپتال کا نام بھی بتایا جہاں اسکی لاش لے جایی گی تھی -ہسپتال سے کنٹیکٹ کرنے پر اسکے خاندان کو بتایا گیا کے اسکی آخری رسومات الیکٹرک کریمٹوریم میں حکومت کی جانب سے ادا کی جاینگی -امریکا میں قبر کی جگہ بہت مہنگی ملتی ہے گھر والوں نے  وہاں کسی  این جی او کو کنٹیکٹ کیا اور ایک مخیّر شخص جو  بمبئ سے تعلق رکھتا تھا اور کسی زمانے میں اسلام جمخانہ کی  جانب سے کرکٹ کھیلتا تھا اور اب امریکا کی شہریت اختیار کر لی تھی  ، اسنے دفن کے لئے قبرستان میں  جگہ بھی خریدی اور تدفین بھی  خوش اسلوبی سے ادا کردی -گھر والوں نے اس شخص کو کنٹیکٹ کر شکریہ ادا کیا ،اور اس سے یہ سب کرنے کی  وجہ پوچھی اس نے کہا "مجھے ایک نیکی ادا کرنے کا موقع ملا میں نے کر دیا "-انسان کے نیک کاموں کی جزا آخرت میں تو ضرور ملنی ہے کبھی کبھی دنیا میں مل جاتی ہے -عبدل عزیز کے حادثے کی ،موت کی خبر گھر والوں تک پہچنا ،قبر اور تدفین کا موجزانہ انتظام سب قدرت کا انتظام لگتا ہے 


बुधवार, 30 सितंबर 2026

Khiraje aqeedat

                                   

                                                                  Late Bismilla Shaikh Sir

Date of Birth : 10 /05 /1937  (नंदुरबार )
Deatth           :  22  /09 /2026  (नेरुल नवी मुंबई )
Qualification : BA, MA,BEd From Rizvi College Bandra )
JOB                : 31 वर्ष अंजुमन इस्लाम हाई स्कूल ( teaching English Subject )
फैला के पाँव सोयेंगे तुर्बत में आज हम 
लो अब सफर तमाम हुवा घर क़रीब है 
    ज़िन्दगी के  इत्मेनिनं बख्श ८९ साल गुज़ार कर  २२ सितम्बर २०२६ को बबिस्मिल्ला शैख़ सर, इस फानी  दुनिया से रुखसत हुए। फजर के बाद नेरुल जामे  मसजिद में उनके ३५/४०  साल पुराने शागिर्द (STUDENT ) फ़याज़ प्रकार  सेक्रेटरी नुरुल इस्लाम ट्रस्ट ने, सर की वफ़ात का ऐलान किया। अपने साथ जुड़े रिश्ते का भी ज़िक्र किया के वो अंजुमन इस्लाम में मेरे उस्ताद रह चुके हैं। मेरे पड़ोस में बैठे रफ़ी शैख़  (रिटायर्ड एक्साइज इंस्पेक्टर )ने भी मुझ से कहा के बिस्मिल्ला शैख़ सर ने उनेह भी पढ़ाया है। जाने ऐसे कितने स्टूडेंट्स को मरहूम ने राह दिखाई होंगी। अक्सर ये होता है के रिटायरमेंट के बाद टीचर्स को सिर्फ उनके स्टूडेंट्स ही याद रखते है। लेकिन दुनिया भर के लिए वह बीस्मील्ला शैख़ सर ही थे। ये ऐज़ाज़ बहुत काम लोगों को नसीब होता है। 
       अंजुमन इस्लाम हाई स्कूल में बिस्मिल्ला शैख़ सर का रेप्युटिशन रहा है। स्टूडेंट्स में  वह बड़े मक़बूल थे । ३१ साल अपनी ज़िन्दगी के ,स्कूल के लिए वक़्फ़ कर दिए। उस ज़माने में उनका ज़ियावोद्दीन बुखारी ,दलीप कुमार से मुलाक़ातों का सिलसिला रहता था।सबानी हॉस्टल के लिए सुपरिंटेंडेंट की सर्विसेज भी   मरहूम सर ने दी। 
         1995 रिटायर्ड होने के बाद बिस्मिल्ला सर ने सन्मान होटल के टॉप फ्लोर पर घर खरीदा था। चूँकि मरहूम मेरे हम वतन थे। उनकी पूरी फॅमिली से हमारे क़रीबी रिलेशन हो गए। खालिद एडवोकेट ,साजिद ,असलम और ग़ज़ाला और मरहूम की अहलिया से अक्सर मिलना जुलना होता। मरहूम बिस्मिल्ला सर हमारे बड़े भाई मरहूम सादिक़ अहमद से बहुत उन्सियत रखते थे। मरहूम अब्बास सय्यद साहेब भी उन दोनों के क़रीबी दोस्तों में हुवा करते थे। इतिफाकन तीनो यार नेरुल सेक्टर ४ के कब्रिस्तान में पास पास क़ब्रों में दफ़न हैं । 
         १९९८ में मरकज़े फलाह की बुनियाद राखी गई मरकज़ का ऑफिस कई बरसों मरहूम बिस्मिल्ला सर के घर के नीचे 2nd फ्लोर पर रहा। मरहूम ज़िंदा दिल थे मरकज़ के प्रेजिडेंट  अली एम शम्सी ,भी किसी ज़माने में टीचर रह चुके थे ,मरहूम बिस्मिल्लाह सर से नोक झोंक होती रहती। शम्सी साहेब खानदेश की मशहूर डिश ,हलीम ,गोश्त मांडे की फरमाईश करते और सर बड़े एहतेमाम से हम सब की दावत भी करते। 
         मरकज़े फलाह में मरहूम बिस्मिल्ला सर बुनियाद से जुड़े रहे , vice president ,जॉइंट सेक्रेटरी ,जॉइंट ट्रेझर भी रहे। १० से १२ साल 10th ,12th std के  स्टूडेंट की ट्यूशन क्लासेज भी कामयाबी से कंडक्ट की।अक्सर पुराने स्टूडेंट्स के फ़ोन आते हैं और सर की खैरियत पूछते है। 
         आखरी उम्र में मरहूम बिस्मिल्ला शैख़ सर , उलवा शिफ्ट होगये थे। कमज़ोर होगये थे ,सुनने के लिए कान की मशीन का इस्तेमाल भी  करने लगे थे , फिर भी जुमे की नमाज़ के लिए जुमा मस्जिद नेरुल आते थे। नेरुल से उनेह दिली लगाव था। तद्फीन भी नेरुल क़ब्रस्तान में हुयी। 
          अल्लाह मरहूम बिस्मिल्ला शैख़ की मग़फ़िरत करे। 



शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

Rakhi ke awsar par

 आज का शेर 

किसी के जख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा 

अगर बहने नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा

गुरुवार, 27 अगस्त 2026

ameen patel ,aslam shaikh jyoti gaikawad ko mubarkbad

                                                   امین پٹیل ،اسلم شیخ ،جیوتی گایکواد کو مبارکباد 

مکرمی 

جمہوریت میں عوامی نمایندوں کی کارگردگی اسمبلی میں حاضری، پوچھے گئے سوالات ،سوالات کا  میعار کیسا تھا پچھلے ایک سال کے دوران پوچھے گئے سوالات ،سوالات کا میعار ،اسسمبلی میں حاضری اور ممبر کیا کسی غیر قانونی کاموں میں ملوث تھے پرجا فاؤنڈیشن کے سروے کے چونکا دینے والے نتایج سامنے آے ہیں اپنی ایماندارانہ کار گردگی کی بنا پر امین پٹیل ٨٢.٨٩  فیصد ،اسلم شیخ ٨٠.٥٨ فی صد جیوتی گائکوواد ٨٠.٣ فی صد سکور کے ساتھ بہترین کار گردگی کا مظاہرہ کیا ہے اور اتفاقاً تتینوں ممبران کانگریس ٹکٹ پر جیتے ہیں 

        افسوس کا مقام ہے پچھلے ١٥ سالوں میں اسسمبلی میں  سوال پوچھنے کی تعداد میں ٧٢ فی صد کی کمی آی ہے پتا چلتا ہے کس طرح عوامی نمایندوں کے میعار میں گراوٹ آی ہے اسی لئے اپنے اپنے حلقوں میں اسسمبلی ممبرز کو نہ روڈ  بنانے ،روڈ درستی ،ڈرینیج، صاف صفائی، گورنمنٹ  اسپتال کا کام کاج  کے کاموں میں کویی دلچسپی دکھایی نہیں دیتی الیکشن کے وقت پیسوں سے ووٹ خرید کر ٥ سالوں تک لوٹ مار کر اپنی جبیں بھرنے والے  ممبران کی تعداد میں دن بدن اضافہ ہوتا جا رہا ہے جو جمہوریت کی بنیادیں کھوکھلا کرنے کی وجہ بنتا جا رہا ہے 

       اگر عوام میں بیداری نہیں آتی ہے تو دن بدن حالت دگرگوں ہوتی جا ینگے 

راغب احمد 

نیرول نیی مممبئی 

WARNA SURAJ KI KAHAN SALGIRAH HOTI HAI

 

L to R ragib Tariq Munshi,Zakira TRiq Munshi,Shagufa Ragib 
                                                    वरना सूरज की कहाँ सालगिरह होती है 
आज हम सब होटल कॉर्पोरेट बेलापुर में अहम् शख्सियत जनाब सज्जाद तारिक़ मुंशी की 75 th सालगिरह मानाने जमा हुए है। उन की खिदमत में दो शेर पेश करता हूँ। 
                          रौनक़े महफ़िल नहीं था कोई तुझ से पहले 
                           रौनक़े बज़्म नहीं है कोई तेरे बाद 
                           आप आये तो बहारों ने लुटाई खुशबु 
                            फूल तो फूल हैं ,काँटों से भी आयी खुशबु 
     आज के रौनक़े बज़्म जनाब हाजी तारिक़ मुंशी  अपनी ज़िन्दगी की  डायमंड जुबली मुक़्क़मिल कर रहे हैं। तारिक़ का मतलब होता है रात में दिखने वाला सितारा और सज्जाद यानि बहुत सजदा करने वाला। माशाल्लाह पिछले साल हमने इनकी शादी की 50 th  (गोल्डन जुबली ) सालगिरह मनाई थी। ख़ूबरू (handsome )शख्सियत के मालिक ,निकलता क़द ,नरम गुफ़्तार (soft spoken ),बहुत ज़माने से हमें मुत्तासिर करते रहे है। जनाब शत्रुघन सिन्हा से मुशबीहाट (similarity ) रखते हैं। एक ज़माना था उनेह देख कर शत्रुघन सिन्हा के मशहूर डॉयलग्स ज़हन में गूंजने लगते थे।  " खामोश " लगी को आग कहते हैं बुझी को राख कहते कहते है और इस बुझी राख से बनी बारूद को विश्वनाथ कहते हैं " ५० साल पहले जब हम ने उनेह पहली बार देखा था  वह शत्रुघन सिन्हा से ज़ियादा ख़ूबरू थे और आज भी उम्र के इस दौर में हमारी नज़रों में शत्रुघ्न सिन्हा से कई ज़ियादा स्मार्ट हैं।looks से ज़ियादा   इंसान का अख़लाक़ ,किरदादर अहमियत रखता है। भाई जान के लिए जिस तरह लोगों ने  इस महफ़िल  में अपने ख्यालात का इज़हार किया मेरी नज़रों में उनकी अहमियत /इज़्ज़त और बढ़ गयी। अपनी औलाद बहने शरीके हयात पोते पोतियां ,नवासे नवासियां ,दामाद सब के दिलों  में उनके लिए  बे हद एहतेराम हैं। 
     कुछ यादें अँधेरी रातों में चमकते जुगनुओं की तरह होती है। १९७१ साल में पहली बार जलगाव से मुंबई आया था।  सादिक़ भाई मुझे सोमैया कॉलेज में दाखला दिला कर  नौकरी के लिए कुवैत रवाना हो गए थे। कभी कभी अकेले पन तन्हाई  का एहसास होता। दो खानदान मुंशी और अख़लाक़ भाई के घर चला जाता फिर लगता किसी ने दलदल में डूबने से बचा लिया हो। तारिक़ भाई जान ज़ाकिरा भाभी ने भी हमेशा मुशफेक़ना रवैया रखा। मैं ने भी उनेह  हमेशा बड़े भाई की तरह इज़्ज़त दी। शादी के बाद हमारी रज़िया खाला और शगफ्ता (अहलिया ) की फूफी ने हम दोनों को अपनी मोहबतों ,इनायतों ,मेहरबानी और करम से  शराबोर  कर दिया। तारिक़ भाई जान से कुछ अरसा मुलक़ातें कम कम हो गयी थी। जब १९ साल में ,लगातार मुल्क से बाहेर रहा। फिर इत्तेफ़ाक़न से ये हुवा के वह हमारे पड़ोस नेरुल में वाइट हाउस में शिफ्ट हो गए। फिर से मुलाक़ातों का सिलसिला जारी होगया। अल्लाह से दुआ हैं 
जहाँ रहे वह खैरियत के साथ रहे 
उठाये हाथ तो ये दुआ याद आयी 

      L to R ragib ahmed 
Tariq , Qadri

गुरुवार, 23 जुलाई 2026

SHER EPLAINED

                                           शेर का मतलब  

दुःख बाँटने की चीज़ नहीं फिर भी दोस्तों 

एक दूसरे के हाल से वाक़िफ़ रहा करों 

हसन सोज़ 

हाल :  तबियत  ,हालत 

वाक़िफ़ : जानकारी 

ज़िन्दगी गुजरने के दो शायरों के दो फलसफे 

कोशिश भी कर उम्मीद भी रख रास्ता भी चुन 

फिर उसके बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर 

निदा फ़ाज़ली 

रखने की बस ये तीन ही चीज़ें हैं इन दिनों 

हिम्मत रखो ,यक़ीन रखो ,फासला रखो 

जव्वाद शैख़ 

मंगलवार, 14 जुलाई 2026

Khushbu jaise log mile 4

                                                                   खुशबु जैसे लोग मिले 

Myself with Dr Affan
     हम ने दुबई को दो बार विजिट की । अफ्फान छोटा था हम दोनों उनके बिल्डिंग की छत पर स्विमिंग पूल में घंटों नहाया करते। जितने दिन रहा शौक़ पूरा करता रहा। मुझे शतरंज खेलने के लिए भी  कहता लेकिन ज़िन्दगी में  ने शतरंज कभी खेला ही नहीं था इसलिए उस का साथ न दे सका । 

     अक्सर डॉ वासिफ से  जो दुबई में रहते है ,अफ्फान के APJ बारे  में जानकारी मिलते रहती। ५ क़ुरान के पारे हिफ़्ज़ कर रखे हैं। .उसकी किरात भी बहुत उम्दा है। चैस में अपने दादा अयाजोद्दीन की विरासत को आगे बढा रहा है। 
        आठवे स्टैण्डर्ड तक दुबई के स्कूल में तालीम मुक़म्मिल की हर साल क्लास में टॉप करता रह । अपने ख्वाबों की तामीर के लिए अपने वालिद के हुक्म पर पूना का रुख किया। 
      DR   APJ Abdulkalam का क़ौल है "You have to Dream before your  Dreams come true " बचपन से इस बच्चे (अफ्फान ) ने डॉक्टर बनने का ख्वाब सजा रखा था। शायद DR APJ Abddulkalam के इस क़ौल से भी वो वाकिफ था " A dream is not that you see while sleeping , it is something that does not let you sleep "
         किसी  उर्दु शायर ने भी कहा है 
                             कोशिश भी कर उम्मीद भी रख रास्ता भी चुन 
                              फिर उसके बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर 
         उसे अपनी दो बड़ी बहनों डॉ सिदृरा  नाज़िमुद्दीन और डॉ सारा  नाज़िमुद्दीन से भी प्रेरणा (inspitaion ) मिली हो जो मेडिकल प्रोफेशन को अपना चुकी थी। अपने वालिदैन  (नज़ीमुद्दीन और निकहत )से भी उसे पूरी पूरी सहायता मिली। क्यूंकि ख्वाबों की तकमील के लिए हालात भी सही मयस्सर आने चाहिए। 
         10th मैं 95 % मार्क्स स्कोर करना जुए शीर ( दूध की नहर खोदना ) लाने से कम नहीं। 12th स्टैण्डर्ड में 90 %
 और नीट एग्जाम में महराष्ट्र में ३०० रैंक। किसी ख्वाब की मानिंद लगता है। 
                                 खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है 
           उसे JJ  medical college mumbai से एडमिशन ऑफर था जो उसने ठुकराय और B J Medical college puna  में अपनी ज़ाती चॉइस  मर्ज़ी से दाखला करवाया। 
           GEN Z  अफ्फान भी इसी GEN से ताल्लुक़ रखता है ,की ये खूबी है के उनमे  बला की खुद ऐतेमादि देखने को मिलती है।  
१. अफ्फान में भी खुद ऐतेमादि मौजुद है लेकिन अना (Ego ) से पाक। ज़मीं से जुड़ा है। वालेदैन बुज़र्गों की इज़्ज़त 
अहतराम का जज़्बा शायद घर खानदान से मिला है। 
२. ५ क़ुरान के पारों का हिफ़्ज़ करना मानी रखता है। खूबसरत आवाज़ में किरात भी कर लेता है। नमाज़ की पाबंदगी 
३. डिबेट में स्कूल कॉलेज में कई ट्रॉफीज हासिल कर चूका है 
४. शतरंज (chess ) खेलना उसे विरसे में मिला है। 
५. उर्दू शायरी से दिलचस्पी है ,उर्दू पढ़ लेता है ,लिख भी सकता है। उर्दू के उर्दू शेर उसे ज़बानी याद है। 
    अच्छे अख़लाक़ से ज़िन्दगी में बहुत कामयाबियां मिलती है। ऐसे लोग क़ौम मुल्क के लिए सरमाया होते हैं। इंशाल्लाह बहुत जल्द  अफ्फान अच्छा MBBS डॉक्टर बन कर अपने खानदान क़ौम का नाम रौशन करेंगा। डॉ अफ्फान को नेक ख्वाहेशात रोशन मुस्तक़बिल के लिए ढेर साड़ी दुवायें।  आमीन 
     ख़ानदान और क़ौम के बच्चों को डॉ अफ्फान की मिसालि ज़िंदगी से सबक़ लेने की ज़रूरत है। 
affan ke Ghar ki 2 drs  sisters Dr Sara &Dr Sidra


       
     
         

मंगलवार, 30 जून 2026

Gardishe Ayyam

                                                                 گردش ایام بائیو پر میرے تاثرات 

جناب مع الدین عثمانی کی سوا نح حیات مجھے گفت کی تھی پڑھی بہت لطف آیا کتاب کا ٹائٹل بہت عمدہ ہے چھپایی بھی خوبصورت ہے لگا قیمت بھی معقول ہی ہے 

              جاوید سددیقی نے ایک انٹرویو میں کہا ہے کسی بھی کتاب کو تین بار پڑھنے پر ہی کتاب کو سمجھا جا سکتا ہے میں نے بھی اس بات پر عمل کیا ہوں اور اب گردش ایام میری اس الماری کی زینت بن گی ہے جس میں میری پسندیدہ کتابیں رکھی ہیں 

      جلگاؤں سے وابستہ یادوں میں جناب عثمانی نے ١٢ نمبر اور ١٣ نمبرسکول سے پرائمری کی تعلیم حاصل کی جب کے میں نے سکول نمبر ١١ سے پرائمری تعلیم حاصل کی جا معے جلگاؤں کی عمارت میں تھی لا ڈجی جناب ہیڈ ماسٹر تھے اینگلو اردو اسکول کے حالات موصوف نے جس خوبصورتی سے بیان کے ہیں لگا ما ضی میں لوٹ گیا ہوں اسکول کی عمارت پیچھے مسجد چار پاخانے جن پر چار سیڑھی چاڈ کر پہچنا ہوتا تھا ہم جب بھی استمعال کرتے پلین پر چڑھنے کے انداز میں نیچے کھڈے دوستوں کو بانے بانے کرتے چاند مار یا گولی بار پر لنچ کے وقت مین وزٹ کرتے 



 

मंगलवार, 23 जून 2026

lagta hai ye daulat nayi nayi hai2

                                                     यह भारतीय आईएसआईएस है 

                                                                                                                   

आजकल भारतीय पर्यटकों का घिनौना और बदसूरत चेहरा दुनिया भर में मीडिया और अखबारों के माध्यम से तेजी से वायरल हो रहा है और दुनिया भर में बदनामी बटोर रहा है। मॉल में जोर-जोर से बातें करना, छोटी-मोटी चोरियां करना, कूड़ा फेंकना, हवाई जहाज में जान-पहचान वालों के साथ खाना बांटना, यात्रियों को धक्का-मुक्की करना, उड़ान के दौरान अपने मोबाइल फोन पर तेज आवाज में संगीत सुनना, लाइन तोड़ना, पान के पैकेटों से पर्यावरण को प्रदूषित करना, विदेशी कानूनों का उल्लंघन करना - ये सब भारतीयों की पहचान बन गया है और अब भारतीय पर्यटकों के बीच एक अजीब सा जुनून पनप रहा है। 

वियतनाम हवाई अड्डे पर विमान में चढ़ने से पहले भारतीय पर्यटक विमान के चारों ओर घूम रहे थे, जो कि एक खतरनाक हरकत है। 

भारतीय पर्यटकों ने हनोई की मशहूर ट्रेन स्ट्रीट पर रेलवे ट्रैक पर अपनी भद्दी कला का प्रदर्शन करते हुए और मशहूर गाना 'चिया चिया' गाते हुए भारत को शर्मिंदा कर दिया। 

 हाल ही में, नेपाल में भारतीय पर्यटकों ने बेशर्मी से नेपाल की सड़कों पर अपनी कारों की खिड़कियों से अपने गीले अंडरवियर का प्रदर्शन किया। 

अब कौन से देश भारतीय पर्यटकों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं? 

किसी ने यह सच कहा कि हमारे पर्यटकों ने 5,000 साल पुरानी भारतीय सभ्यता को असभ्य के रूप में कलंकित कर दिया है। 

शबीना अदीब की यह कविता, कुछ संपादन के बाद, भारतीय पर्यटकों के लिए भी सत्य है। 

परिवार के मुखियाओं का स्वभाव सौम्य होता है। 

आपका रवैया ही बताता है कि आप कितने अमीर हैं। 




LAGTA HAI YE DAULAT NAYI NAYI HAI

                                                    اف یہ ہندوستانی صیا ح 

                                                                                                                   

آجکل میڈیا اور اخبارات میں ہندوستانی سیلانیوں کا مکروہ بھددہ چہرہ دنیا کے سامنے تیزی سے وایرل  ہو رہا ہے اور دنیا میں بدنامی کی وجیہ بھی ہورہا ہے بلند آواز میں گفتگو کرنا ، مال میں معمولی نوعیت کی چوریاں ،کوڑا پھینکنا ،ہوائی جہاز میں جان پہچان والے ساتھیوں کے ساتھ کھانا شیر کرنا ،مسافروں کے ساتھ دھکّا مکی ،اپنے ذاتی موبائل پر فلائٹ میں  زور زور سے میوزک سننا ، لائن توڑنا ،پان کی پیکوں سے ماحول خراب کرنا ،غیر ملکوں کے قوانین توڑنا یہ سب   ہندوستانیوں کی پہچان بن گیا ہے اور اب ایک عجیب خبط ہندوستانی سیاحوں میں پرورش پا رہا ہے ناچ 

ویتنام ائیرپورٹ پر فلائٹ پر سوار ہونے سے پہلے ہندوستانی سیاحوں نے فلائٹ کے ارد گرد  گربے کا پردرشن کیا جو ایک خطرناک  بات ہے 

ہنوئی کی مشهور ٹرین سٹریٹ پر ہندوستانی سیلانیوں نے چھیا چھیا نغمہ  بجا کر پٹریوں پر اپنے   بد صورت فن کا مظاہرہ کر ہندوستان کا سر شرم سے جھکا دیا 

 حال ہی میں نیپال میں ہندوستانی صیاحوں   نے نیپال کی سڑکوں پر اپنی کار کی کھڑکیوں میں اپنے انڈر گارمنٹ گیلے کپڑوں کو سکھانے کا بےشرم مظاہرہ کیا 

اب کیی ملکوں میں ہندوستانی سیلانیوں پر پا بندگی عاید کی جا رہی ہے 

کسی نے سچ کہا کے ٥٠٠٠ سالوں پرانی ہندوستانی تہذیب کو ہمارے سیاحوں نے غیر مہذب ہونے کا کلنک لگا دیا 

شبینہ ادیب کا یہ شیر کچھ ترمیم کے بعد ہندوستانی سیلانیوں پر صادق اتا ہے 

جو خاندانی رئیس ہیں وہ مزاج رکھتے ہیں نرم اپنا 

تمہارا رویہ بتا رہا ہے تمہاری دولت نیی نیی ہے 




सोमवार, 22 जून 2026

MUBARAKBAD

                                                                मुबारकबाद 

निहायत मुस्सरत ख़ुशी के साथ खबर दी जाती है के मोइज़ काज़िम अली सय्यद ने CA का एग्जाम पहली ATTEMPT में पास कर लिया है। माशाल्लाह मोइज़ काज़िम अली ने साथ साथ MASTER OF COMMERCE का एग्जाम भी फर्स्ट क्लास फर्स्ट में क्लियर कर लिया। हम सब मोइज़ ,काज़िम अली ,नुसरत और सईदा आप को दिली मुबारकबाद पेश करते हैं। मोइज़ के रोशन मुस्तकबिल के दिल से दुआ करते हैं । मोइज़ ने  सिर्फ रिश्तेदारों में नहीं अपनी क़ौम और मुल्क में अपना  नाम रोशन किया है। 

      कल जनाब उज़ैर सय्यद ने मोइज़  के घर जाकर हम दोनों (रागिब अहमद (नेरुल ) और बजाते खुद अपनी जानिब से मोइज़ को मुबारकबाद  पेश की। गुलदस्ता और मिठाई पेश कर उनको मेरी जानिब से दुआ अपनी जानिब से नेक ख्वाहिशात पेश की। 

Uzer Moiz ko mubarkbad pesh karte huye
 

शुक्रवार, 19 जून 2026

khushbu jaise log mile-5

                   

Saeeda aapa

                                                 

                                                                        सईदा आपाl


                                                               खुशबू जैसे लोग मिले 


कहानी वो होती है जो हमें इस ज़माने में वापस ले जाए, उस ज़माने के किरदारों को ज़िंदा कर दे और हमें ऐसा महसूस कराए कि हम उसी ज़माने में सांस ले रहे हैं जब यह घटना घाटी थी। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बीते हुए कल को ऐसे बताते हैं जैसे यह घटना हमारे ठीक सामने हो रही हो। अगर आप 78 साल की सईदा आपा से मिलें, तो आपको लगेगा कि वह एक थर्मस लेकर बैठी हैं जिसमें यादें जमा दी गई हैं और आपा धीरे-धीरे थर्मस खोलकर यादों की खुशबू फैला रही हैं। आपा की आवाज़ भी दमदार और गूंजती है और उनके बताने का अंदाज़ भी जादुई है।


        सईदा मेरी भतीजी, चाचाज़द भाई  अलीमुद्दीन की बेटी है, लेकिन मैंने हमेशा उन्हें सईदा आपा ही कहा है - उनकी ज़िंदगी भी ने सांप-सीढ़ी के खेल की तरह है । 1969 में जलगांव में उनका घर दंगाइयों ने जलाकर राख कर दिया था। आपा मुस्कुराती रहीं। वह "दंगा  पीड़ित कॉलोनी" में अपने नए घर को सजाने में मसरूफ रही। अपने पति आबिद अली की मौत से वह टूट गई थीं। उन्होंने खुद को संभाला। शायस्ता परवीन शाफिता परवीन की शादी करवाई। लेकिन अल्लाह ने उनके लिए दूसरे और भी  इम्तिहान रखे थे। उन्हें अपने प्यारे जवान बेटे , परवेज़ अली सैयद की मौत का सदमा सहना पड़ा। वह साँप सीढ़ी  खेल में हारने वाली नहीं थीं। छायादार, घना दरख्त कभी अपनी जगह से नहीं हिलता। फिर वह उठीं और काज़िम अली को जॉब के लिए कुवैत भेज दिया। उन्होंने उसकी शादी करवाई और नुसरत जैसी सुलझी बहू घर  में लाईं। काज़िम की गैरमौजूदगी में अब्दुल मोएज़ ,मिसरा और नुसरत का ख्याल रखा।


   आज, अपने पोते अब्दुल मोएज़ के पहले ही अटेम्प्ट में  CA एग्जाम में सफल होने पर मुझे लगा कि आपा सईदा ने एक बहुत बड़े गेम में जीत की बाउंड्री पार कर ली है। लेकिन मुझे यकीन है कि आगे भी, इस साँप सीढ़ी के खेल में, वह ऐसे ही हमेशा कामयाब होती रहेंगी इंशाल्लाह । आपा तुम अपनी जीत दर्ज कराती रहोगी। सईदा मैं तुम्हारी लंबी उम्र की दुआ करता हूँ। क्योंकि तुम ही वो अकेली जो हमारे ख़ानदान को जानती हो ,जो हमारे रिश्ते,जो उलझे हुए धागों की गठरी जैसे हैं ,सुलझा सकती हो। आपा सईदा रिश्तों को पहचानने में माहिर हैं। 

   अगर आप  साहबान भी किसी रिश्ते में कोई कड़ी  (MISSING LINK )जोड़ना चाहते हैं या जलगांव का इतिहास जानना चाहते हैं, तो आपको जलगांव में सईदा आपा से ज़रूर मिलना चाहिए।

KHUSHBU JAISE LOG MILE-4

                           

SAEEDA AAPA

                                                    

                                                                                  خوشبو جیسے لوگ ملے 

                                                                                              سعیدہ آپا 

         کہانی وہ ہوتی ہے جو اس دور میں لا کر کھڈا کردے اس دور کے کرداروں کو زندہ کردے اور ہمیں لگے کے ہم اسی دور میں سانس لے رہے ہیں جس وقت   یہ واقیہ گزرا تھا کچھ لوگ بھی ایسے ہوتے ہیں جو ماضی کے گزرے زمانے کو اس طرح بیان کرتے ہیں جیسے یہ سانحہ  ہمارے سامنے ابھی  ہورہا ہو ٧٨ سالہ سعیدہ آپا سے ملو تو لگاتا وہ تھرموس لئے بیٹھی ہے جس میں یادوں کو منجمد  کر دیا  گیا ہو اور آپا دھیرے سے تھرموس کھول کر یادوں کی  خوشبو کو بکھر دیتی ہے آپا نے آواز بھی کھنکدار پایی ہے اور بیان کرنے کا انداز بھی جادوگرانہ ہے 

        میری بھتیجی سگے چاچا زاد بھایئ کی اولاد لیکن میں نے اسے ہمیشہ سعیدہ آپا ہی کہا ہے -اس کی زندگی بھی کسی سانپ  سیڑھی کے کھیل کی طرح الله کی آزماش سے گزرتی رہی جونے جلگاؤں میں 1970میں اسکا مکان دنگایئوں نے  جلا کر راکھ کر دیا  تھا آپا مسکرا مسکرا کر تنکے جوڈ جوڈ کر "دنگا پیڈٹ کالونی " میں اپنا نیا گھر سجانے میں مصروف ہوگیی اپنے شریک حیات عابد علی  کی موت نے اسے نڈھال کر دیا اس نے اپنے آپ کو سمیٹا شایستہ پروین شبستا پروین کی شادیاں کروایی  لیکن للہ کو اور امتحان آپا کے لینے تھے اپنے نور نظر لخت جگر پرویز علی سید کی موت کا صدمہ جھیلنا پڑا سانپ  سیڑھی کے کھل میں اسے مات نہیں کھانی تھی سایے دار گنجان پیڈ کو  کبھی بھی ،آندھی طوفان اپنی جگہ سے نہیں ہلا پاتا آپا پھر اٹھ کھڈی ہویی  کاظم علی کو ہنستے ہنستے جاب کے لئے کویت روانہ کیا اسکی شادی کرواکے نصرت جیسی سگھڈ بہو کو گھر لایا کاظم کی غیر موجودگی میں عبدل معز میسرہ اور نصرت کی نگہداشت کی 

   آج اپنے پوتے عبدل معز کی سی ایے امتحان  میں پہلے اتتیمپ میں کامیابی پر مجھے لگا آپا سعیدہ نے بہت بڑے  کھیل میں جیت کی بونڈری پا ر کر لی ہو لیکن مجھے یقین ہے  آپا مسقبل میں بھی سانپ سیڑھی کے اس کھل میں اسی طرح اپنی جیت درج کرتی رہینگی آپا سعیدہ آپ  کی درازی عمر کے لئے دعآ ہے کیوں کی ایک آپ ہی ایک  بچی ہے جو ہماری  رشتیداری جو  کے الجھے ہویے تاگے کے بنڈل کی طرح ہے اس کی گانٹھ کو آپ ہی سلجھا سکتی ہے رشتوں کی پہچان کرانے میں ماہر ہو اگر آپ کو بھی رشتیداری میں کسی کڑی کو جوڑنا ہو یا جلگاؤں کی تاریخ جاننی ہو آپا سعیدہ سے جلگاؤں میں ضرور ملے 



बुधवार, 6 मई 2026

कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन

         

With Joslin Almeida


With dear Ashok Juriani


                                        

Carbon ke Doston ke sang

              कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन 

 गर खुदा मुझ से कहे कुछ मांग ऐ बन्दे मेरे, में खुदा से दुआ करूँगा के मुझे यूनाइटेड कार्बन कंपनी के (१९८०-१९८७ ) (PERIOD ) में लौटा दे। चाहे कुछ क्षणों के लिए। वो मस्ती वो तरंग वो बे फ़िक्री ज़िन्दगी में कही देखने को नहीं मिली। उन जैसे प्यारे प्यारे दोस्त फिर ज़िन्दगी में कभी नहीं मिले। कंपनी से घर लौटने बाद भी कंपनी में दिल अटका रहता था। ठाणे बेलापुर रोड पर स्टैण्डर्ड कंपनी के पड़ोस में कंपनी थी। अब कंपनी के नज़दीक से गुज़रता हु तो चटयल मैदान दिखयी पड़ता है, दिल पर एक ठेस लगती है । खलंडरा अशोक जुरिआनी , बातूनी प्रदीप खूबचंदानी , दिल रुबा प्रकाश खंबायते , सीरियस  जोसलिन अलमेडा , दिल फेक हशमत , खुश मिज़ाज रागिब शैख़ ,रंगीला पागड़ ,सुधाकर ,टंडेल ,लक्षमण साबले मेरे खानदान के फर्द (PART ) हिस्सा महसूस होते थे। हम सब एक ही DECADE १९५०/१९६० की पैदायश थे। सब की सोच एक, मिज़ाज एक और हम सब की शादियां भी इसी दौर (PERIOD ) में हुयी। 

      ड्यूटी ख़त्म होने पर हम सब की ऑंखें काजल  (CARBON BLACK )से काली होजाती थी। लोगों को लगता अजीब शौक हम लोगों ने पाल रखा है। BALCK POWDER से हम पूरी तरह अट जाते थे। नाक ,कान ,थूक में काला मादा (MATERIAL ) निकलता था। ड्यूटी ख़त्म होने के पश्चात् सब एक हमाम में नंगे हो कर LIFEBOUY साबुन से नहाते थे। 

    नाईट शिफ्ट में आधे से ज़ियाद समय प्रदीप के साथ LAB में गुज़रता। MIXER मशीन जहा कार्बन ब्लैक को पानी के साथ मिला कर PALLET बनायीं जाती थी। की ड्यूटी HORRIBLE होती थी। MIXER TRIP  होजाता उसे CLEAN करना नाक में दम कर देता था। लेकिन हम सब मिल कर उसे चालू करते क्लीन करते। खाना भी साथ मिलकर कैन्टीन में खाते । केसकर ,रोहरा हमारे BOSS थे बड़े TYPICAL थे भूलते नहीं भूलते। अब दोनों दुनिया से रुखसत हो चुके हैं। 

    LONG ऑफ में अक्सर साथ मिल कर PARTY करते,सिनेमा देखते ,कही घूमने निकल जाते । एक के बाद एक  हम सब की शादियां हुयी। सब साथ मिल कर शरीक (ATTEND ) करते। किसी के घर मौत होती सब मिल कर जाते दुःख में शरीक होते दिलासा देते। उन दिनों में बहुत हँसता ,बे वजे क़हक़हे लगाया करता था। हम सब एक दिन किसी दोस्त के DADDY की मौत पर MOURNING /CONDOLENCE  के लिए निकले। प्रदीप हाथ जोड़ कर कहने लगा "शैख़ भाई ग़म के घर में प्लीज हंसना मत हम सब का कचरा हो जाएंगा  "

  फिर एक साल हम सब पर ग़म के बादल छाए रहे। कंपनी STRIKE पर थी। लेकिन कभी भी हमारे रिश्तो में दराड (CRACK ) नहीं आयी। वो दिन भी दस्तूर की ऑफिस में ठहाके लगा कर गुज़ारे । किसी ने भी अपने ग़म परेशानी की दास्तान नहीं सुनाई। 

    कल प्रदीप के जन्म दीन पर उसे मुबारकबाद पेश की तो पुराने दिनो की यादें फिल्म के फ़्लैश बैक की तरह ज़हन पर,ताज़ा हो गयी। अशोक जुरिआनी को याद करके आँख से आंसू जारी होगये। 

       आयी किसी की याद तो आंसू निकल पड़े 

         आंसू किसी की याद के कितने क़रीब (नज़दीक ) थे 

किसी ने क्या खूब कहा है 

दिन जो पखेड़ु होते पिंजरे में मैं रख लेता पालता उनको जतन से 

मोती के दाने देता ,सींने से रहता लगाए 

याद न जाये बीते दिनों की जाके न आये जो दिन दिल क्यों बुलाये उन्हें 

दिल क्यों बुलाये 

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

DOSTON KI MEHRBANI CHAHIYE

                 

Anjuman Murud school

                                                       दोस्तों की मेहरबानी चाहिए 

 हामिद ख़ानज़ादा की दावत थी के उनके भतीजे जुऐब ख़ानज़ादा की शादी में  मुरुड जंजीरा में २२ अप्रैल को   शिरकत करू। शादी में हम कार से ०६३० बजे रवाना हुवे ११०० बजे उनके आबाई माकन पहुंचे। अपने खानदान में हामिद ख़ानज़ादा बड़े हर दिल अज़ीज़ (फेमस ) हैं। क्या खानदान के बच्चे ,बुज़र्ग ,औरतें सब ने उहे जिस अंदाज़ में खुश आमदीद कहा देख कर दिली ख़ुशी हुयी।  मुझे भी अपने खानदान वालों से तार्रुफ़ कराया। मुझे भी इस खानदान से एक अपनायत,उन्सियत  का एहसास हुवा। नाश्ते के बाद शहर की सैर कराई। 

                                                       अंजुमने इस्लाम मुरुड जंजीरा 

    हर शहर की अपनी पहचान होती है। हामिद ख़ानज़ादा खुद भी नवाब खानदान से ताल्लुक़ (blong ) रखते हैं , आप ने बचपन समंदर के बीच किल्ले में गुज़ारा। तालीम अंजुमन मुरुड जंजीरा से हासिल की। स्कूल क्या है मिनी अलीगढ है। बेहतरीन मस्जिद ,बच्चों को रहने के लिए केप टाउन हॉस्टल ,लाइब्रेरी ,ऑफिस की ईमारत और बिल्डिंग जहाँ क्लासेज होती थी अब भी उसी हालत में हैं रंग रोग़न और दूरिस्ति करके और भी स्कूल की शान में इज़ाफ़ा हो गया है। खेलने के मैदान भी है। लैब्स भी है। नवाब साहेब की दूर अंदेशी पर दाद दने को दिल चाहता है। क़ौम में पढ़े लिखे लोगों की बड़ी तादाद कोकण से बिलोंग करती है। जलगाओं शहर से भी लोगों ने इस स्कूल में पुराने वक़्तों तालीम हासिल की है। 

Anjuman murud entry gate

Anjuman murud office building
    पुरे मुरुड जंजीरा को हामिद ख़ानज़ादा ,हाथ की लकीरों की तरह जानते हैं। ख़ानज़ादा ,दामाद ,शेख़ानी ,काज़ी ,खतीब,पेश इमाम खानदान और उनके मोहल्ले कहाँ हैं सब जानते हैं। मुरुड में नाना पाटेकर का बंगलो भी मुझे दिखया। नवाब खानदान के पूर्वजों के मज़ार जो खुखरी में हैं वहां से गुज़रते मुझे बताया। सीद्धि याक़ूत का मज़ार जो उनके बुज़र्ग है ,भी देखा। आज़ादी से पहले नवाब साहब की रियासत मुरुड जंजीरा में पावर प्लांट चला कर रात भर बिजली सप्लाई की जाती थी। शायद किसी और स्टेट में ये इंतज़ाम हो ?
  खूबसूरत साफ़ शफ़्फ़ाफ़ बीच भी देखा
Murud Jajeera beach with Hamid khanzadaa 



 वलीमे के लिए १२ बजे लौटना था इस लिए चलते चलते नवाब मुरुड जंजीरा के महल की झलक भी देख ली 
Nawab murud janjeera palace gate
वलीमे का सादा खाना पुलाव और हलवा था। सब रिश्तेदारों ने मिल का मेज़बानी की मज़ा आगया 

Murud Janjira Eid gah

Naushe miya zoeb ke sath L Hamid R Ragib

Janjira palace gate par state ka emblem

Khukhri ka mazar

   मुरुड जंजीरा देखने के लिए बहुत कम वक़्त मिला लेकिन जो देख ज़हन में  नक़्श हो गया। 

 









रविवार, 15 मार्च 2026

for programe

 अकबर इलाहबादी ने क़ौम को झंझोड़ेने नींद से उठाने के लिए जो शायरी लिखी थी आज भी वह इतनी ही relevent है। 

हुए इस क़दर मोह्ज़ीब (civilised ) कभी घर का मुँह न देखा 

कटी उम्र होटलों में मरे इस्पेताल जा कर 

अकबर ने कहा सुन लो यारों अल्लाह नहीं तो कुछ भी नहीं 

यारों ने कहा ये क़ौल ग़लत तन्खाव (salary ) नहीं तो कुछ भी नहीं 

पहुंचे होटल में तो तो फिर ईद की परवाह न रही 

केक को चख के सीववयों का मज़ा भूल गए 

हम ऐसी सब किताबों को कबीले ज़ब्ती समझते हैं 

के जिन को पढ़ के बेटे बाप को खब्ती समझते हैं 

पैदा हुवा वकील तो शैतान ने कहा 

लो आज हम भी साहेबे औलाद हो गए 

फलसफी (philosper ) को बहस में खुदा मिलता नहीं 

डोर उलझा रहा है और सिरा मिलता नहीं 

उन्हें शौक़ -ऐ -इबादत भी है और गाने की आदत भी 

निकलती हैं दुवाएं उनके मुँह से ठुमरियाँ हो कर 



बुधवार, 11 मार्च 2026

ek shakhs sare shaher ko weeran kar gaya

                                     

Late Murakoboddin

         

                                                        एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया 

          जलगांव शहर की आबादी /सरहदें चारो और बढ़ती जा रही है। लेकिन मेरे लिए जलगांव  सिमटा जा रहा है अजनबी मक़ाम लगने लगा है। शहर ईंट ,पत्थरों और इमारतों से नहीं बनता। शहर बनता हैं वहां रहने वाले लोगों से ।  पिछले साल मुबा मुमानी हम से जुदा हुयी लगा आधा शहर सुना होगया हो। पिछले महीने मामू मुरकोबोद्दीन दुनिया से रुखसत हुए लगा जलगांव शहर सन्नाटे में डूब गयाहो । लेकिन अपनी औलादों कफील और नाज़िरुद्दीन अपनी विरासत में छोड़ गए, मखदूम अली भी जो उनकी सरपरस्ती में परवान चढ़ा मामू की याद दिलाते रहेंगे। मेहरून तालाब ,बेर ,जाम और पोलन पेठ जलगाव  का  मामू मुमानी का मकान शायद कभी भूल पाए । 

    1930 से 1945 के दरमियान पैदा होने वालो  को silent generation कहा जाता है। मुरकोबद्दीन मामू भी १९३३ में पैदा हुए। आप की शख्सियत में भी एक ठहराव था। फिर baby boomer ,generation x ,Mellenials ,Generation Z ,Generation Alpha ,Beta को  मामू ने अपनी आँखों से देखा। सेकंड वर्ल्ड वॉर ,जंगे आज़ादी ,पाकिस्तान और बांग्ला देश का बनना ,पाकिस्तान के साथ दो wars, china से war ,जलगांव के दंगे कितने हादसों को रु ब रु देखा। कुछ लोग छोटी छोटी बातों से डिस्टर्ब होजाते हैं। लेकिन ये बंदा slow & steady अपनी मंज़िल की जानिब बढ़ता ही रहे। 

        आप बड़े well known ख़ानदान से बिलोंग करते थे । हाकिम रियासोद्दीन इनके वालिद इस ज़माने में मशहूर हाकिम तो थे ही। medical officer पोस्ट से रिटायर हुए और आखिर उम्र तक हिकमत करते रहे। 

                                            जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है 

      मामू मुराकोबोद्दीन ने  जलगांव ,उर्दू से मीट्रिक किया। co -operative dept maharashtra में peon की पोस्ट जॉइन की ,sub -auditor और फिर ऑडिटर हो कर पेंशन पायी। १९४८ से १९८७ तक govt service की।  फिर १५ साल govt co -op panel  पर भीअपनी सर्विसेज देते रहे । 

                                           दिल को दर्द पुराने अच्छे लगते हैं 

            २६ अक्टूबर २०२५ को जलगाओं visit के दौरान उनसे मुलाक़ात की। मुझे देख कर चेहरे पर शनासाई की मुस्कराहट दिखाई पड़ी शायद ज़हन के किसी कोने में मेरा नाम तलाश करने की कोशिश करते रहे। कफील ने पूछा अब्बा पहचाना  "मखदूम "कहा शायद कहना चाहते थे मखदूम का दोस्त। कफील ने कहा  राग़िब दादा। उन का चेहरा खिल उठा। 

            90+ age में कपिल की लुब्रीकेंट की दुकान dedication से सँभालते रहे। कभी कुर्सी पर बैठ  कर नमाज़ अदा नहीं की । हाफ़िज़ा भी आखिर  उमर तक तकदुरस्त रहा ,माशाल्लाह। एक साल पहले मुमानी के इंतेक़ाल के बाद कुछ बुझ गए थे। दोनों में बहुत मोहब्बत थी। 

                                             जी चाहता है नक़्शे क़दम चूमते चले 

              कुछ शख्सियतें उनमिटी नक़ूश छोड़ जाती है। मामू खामोश तबियत थे लेकिन strong pesonality के मालिक थे।  उनकी कमी हमेश महसूस होती रहेंगी। 

             अल्लाह से दुआ है उनकी मग़फ़िरत करे आमीन। 

          खुदा बख्शे बहुत सी खूबियां थी मरने वाले में 

मंगलवार, 10 मार्च 2026

j &k team record win

                                                          جموں  کشمیر ٹیم نے رانجی ٹرافی میں تاریخ رقم کر دی 

                                                                                                                                              مکرمی 

 ہندوستان میں فلم انڈ سٹری اور کرکٹ نے وطن کو جوڑا ہے کل جب جموں کشمیر ٹیم نے کرناٹک کے خلاف رانجی ٹرافی فائنلس میں ٩٢٦ رنوں کا انبار لگا کر ہبلی میں تاریخ رقم کردی اور کرناٹک ٹیم کو بے دست و پا کر دیا باوجود اسکے کے ،ٹیم میں چار نیشنل پلیئرز کھیل رہیں تھے عاقب نبی جو برامللہ ایکسپریس کے نام سے جانے جاتے ہیں  رانجی ١٠ٹرافی   میچز میں اپنی تہلکہ خیز بالنگ سے کل  ٦٠ وکٹ حاصل کے  اور ٹیم کی کامیابی کا حصّہ رہے 

     جموں کشمیر ٹیم نے  یہ مقام اپنی لگاتار جددو جہد اور محنت سے حاصل کیا ہے ٹیم کو اس مقام تک لانے میں بشن سنگھ بیدی ،عرفان پٹھان اور کوچ اجے شرما کی رہنمایی رہی -اس کامیابی سے ٹیم کے پلیئرز کو نیشنل ٹیم میں جلد  جگہ ملنے کی امید ہے 

جموں کشمیر ٹیم کو اس شاندار جیت پر دلی مبارکباد اور نیک خواہشات 

شگفتہ راغب شیخ 

نیرول (نئی ممبئی 

रविवार, 18 जनवरी 2026

aaj ka sher

 

पेड़ काटने वालों को ये मालूम तो था 

जिस्म जल जायेंगे जब सर पे न साया होंगा 

پیڈ کاٹنے والوں کو یہ معلوم تو تھا 

جسم جل جاینگے جب سر پے نہ سایا ہونگا 

गुरुवार, 1 जनवरी 2026

get together

                                                 कोशिश भी कर उम्मीद भी रख रास्ता भी चुन 

                                                  फिर उसके बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर 

            २०२५ रुखसत हो रहा था चंद घड़ियाँ बची थी। अचानक भाभी जान (ज़ुबेदा ) समीरा ,नाएला मुझे और शगुफ्ता को मिलने मेरे घर पहुंचे। क्या खूबसूरत माहौल था। न शिकायत न कोई गिला लगा हर कोई हमारे ख़ानदान का हिस्सा होने पर खुश (शाद ) था। नाएला का एक जुमला चौंका देने वाला था। अल्लाह ने हमारे ख़ानदान को उस मुक़ाम पर पुहंचा दिया है जहाँ हम जो तमन्ना करते हैं उस से बढ़ कर मिल जाता है अल्हम्दोलीलाह । दिल अल्लाह के शुक्र से पुर है। हम सब ने इस बात को एग्री किया। माशाल्लाह हर किसी ने ज़िन्दगी में बेइंतेहा मेहनत की है तब ये नतीजा आया है। 

             अब्बा हाजी क़मरुद्दीन का  ज़िक्र हुवा किस तरह अपनी  क़लील (कम) जायज़ आमदनी से हम चार भाइयों की  परवरिश की और हम सब के दिल दिमाग़ में ये बात पेवस्त हो गयी के हलाल रिज़्क़ क्या मानी (मीनिंग ) रखता है। उज़्मा इंडिया आयी दोनों मिया बीवी मुझे मिलने आये। वह भी अपनी ज़िन्दगी में सरशार (खुश ) है। सना ,हिना ,इरम ,लुबना, नावेद ,ईशा ,रूही सदफ  अल्लाह ने सभी को एक खुशहाल ज़िन्दगी अता की है उस मालिक का जितना शुक्र अदा किया जाये कम हैं। कभी कभी अपने आप पर रश्क होता है ,अल्लाह  ज़माने की बुरी नज़र से मेहफ़ूज़ रखे।  हमारे बुज़ुर्ग भाभी जान ,डॉ वासिफ अहमद ,नीलोफर भाभी का साया हम  पर क़ायम रखे। नयी पौद (Generation ) को  बे इन्तहा तरक़्क़ी अता हो। आमीन 

कुछ खूबसूरत लम्हे जो साथ बिताये