खुशबु जैसे लोग मिले
| Myself with Dr Affan |
खुशबु जैसे लोग मिले
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گردش ایام بائیو پر میرے تاثرات
جناب مع الدین عثمانی کی سوا نح حیات مجھے گفت کی تھی پڑھی بہت لطف آیا کتاب کا ٹائٹل بہت عمدہ ہے چھپایی بھی خوبصورت ہے لگا قیمت بھی معقول ہی ہے
جاوید سددیقی نے ایک انٹرویو میں کہا ہے کسی بھی کتاب کو تین بار پڑھنے پر ہی کتاب کو سمجھا جا سکتا ہے میں نے بھی اس بات پر عمل کیا ہوں اور اب گردش ایام میری اس الماری کی زینت بن گی ہے جس میں میری پسندیدہ کتابیں رکھی ہیں
جلگاؤں سے وابستہ یادوں میں جناب عثمانی نے ١٢ نمبر اور ١٣ نمبرسکول سے پرائمری کی تعلیم حاصل کی جب کے میں نے سکول نمبر ١١ سے پرائمری تعلیم حاصل کی جا معے جلگاؤں کی عمارت میں تھی لا ڈجی جناب ہیڈ ماسٹر تھے اینگلو اردو اسکول کے حالات موصوف نے جس خوبصورتی سے بیان کے ہیں لگا ما ضی میں لوٹ گیا ہوں اسکول کی عمارت پیچھے مسجد چار پاخانے جن پر چار سیڑھی چاڈ کر پہچنا ہوتا تھا ہم جب بھی استمعال کرتے پلین پر چڑھنے کے انداز میں نیچے کھڈے دوستوں کو بانے بانے کرتے چاند مار یا گولی بار پر لنچ کے وقت مین وزٹ کرتے
यह भारतीय आईएसआईएस है
आजकल भारतीय पर्यटकों का घिनौना और बदसूरत चेहरा दुनिया भर में मीडिया और अखबारों के माध्यम से तेजी से वायरल हो रहा है और दुनिया भर में बदनामी बटोर रहा है। मॉल में जोर-जोर से बातें करना, छोटी-मोटी चोरियां करना, कूड़ा फेंकना, हवाई जहाज में जान-पहचान वालों के साथ खाना बांटना, यात्रियों को धक्का-मुक्की करना, उड़ान के दौरान अपने मोबाइल फोन पर तेज आवाज में संगीत सुनना, लाइन तोड़ना, पान के पैकेटों से पर्यावरण को प्रदूषित करना, विदेशी कानूनों का उल्लंघन करना - ये सब भारतीयों की पहचान बन गया है और अब भारतीय पर्यटकों के बीच एक अजीब सा जुनून पनप रहा है।
वियतनाम हवाई अड्डे पर विमान में चढ़ने से पहले भारतीय पर्यटक विमान के चारों ओर घूम रहे थे, जो कि एक खतरनाक हरकत है।
भारतीय पर्यटकों ने हनोई की मशहूर ट्रेन स्ट्रीट पर रेलवे ट्रैक पर अपनी भद्दी कला का प्रदर्शन करते हुए और मशहूर गाना 'चिया चिया' गाते हुए भारत को शर्मिंदा कर दिया।
हाल ही में, नेपाल में भारतीय पर्यटकों ने बेशर्मी से नेपाल की सड़कों पर अपनी कारों की खिड़कियों से अपने गीले अंडरवियर का प्रदर्शन किया।
अब कौन से देश भारतीय पर्यटकों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं?
किसी ने यह सच कहा कि हमारे पर्यटकों ने 5,000 साल पुरानी भारतीय सभ्यता को असभ्य के रूप में कलंकित कर दिया है।
शबीना अदीब की यह कविता, कुछ संपादन के बाद, भारतीय पर्यटकों के लिए भी सत्य है।
परिवार के मुखियाओं का स्वभाव सौम्य होता है।
आपका रवैया ही बताता है कि आप कितने अमीर हैं।
اف یہ ہندوستانی صیا ح
آجکل میڈیا اور اخبارات میں ہندوستانی سیلانیوں کا مکروہ بھددہ چہرہ دنیا کے سامنے تیزی سے وایرل ہو رہا ہے اور دنیا میں بدنامی کی وجیہ بھی ہورہا ہے بلند آواز میں گفتگو کرنا ، مال میں معمولی نوعیت کی چوریاں ،کوڑا پھینکنا ،ہوائی جہاز میں جان پہچان والے ساتھیوں کے ساتھ کھانا شیر کرنا ،مسافروں کے ساتھ دھکّا مکی ،اپنے ذاتی موبائل پر فلائٹ میں زور زور سے میوزک سننا ، لائن توڑنا ،پان کی پیکوں سے ماحول خراب کرنا ،غیر ملکوں کے قوانین توڑنا یہ سب ہندوستانیوں کی پہچان بن گیا ہے اور اب ایک عجیب خبط ہندوستانی سیاحوں میں پرورش پا رہا ہے ناچ
ویتنام ائیرپورٹ پر فلائٹ پر سوار ہونے سے پہلے ہندوستانی سیاحوں نے فلائٹ کے ارد گرد گربے کا پردرشن کیا جو ایک خطرناک بات ہے
ہنوئی کی مشهور ٹرین سٹریٹ پر ہندوستانی سیلانیوں نے چھیا چھیا نغمہ بجا کر پٹریوں پر اپنے بد صورت فن کا مظاہرہ کر ہندوستان کا سر شرم سے جھکا دیا
حال ہی میں نیپال میں ہندوستانی صیاحوں نے نیپال کی سڑکوں پر اپنی کار کی کھڑکیوں میں اپنے انڈر گارمنٹ گیلے کپڑوں کو سکھانے کا بےشرم مظاہرہ کیا
اب کیی ملکوں میں ہندوستانی سیلانیوں پر پا بندگی عاید کی جا رہی ہے
کسی نے سچ کہا کے ٥٠٠٠ سالوں پرانی ہندوستانی تہذیب کو ہمارے سیاحوں نے غیر مہذب ہونے کا کلنک لگا دیا
شبینہ ادیب کا یہ شیر کچھ ترمیم کے بعد ہندوستانی سیلانیوں پر صادق اتا ہے
جو خاندانی رئیس ہیں وہ مزاج رکھتے ہیں نرم اپنا
تمہارا رویہ بتا رہا ہے تمہاری دولت نیی نیی ہے
मुबारकबाद
निहायत मुस्सरत ख़ुशी के साथ खबर दी जाती है के मोइज़ काज़िम अली सय्यद ने CA का एग्जाम पहली ATTEMPT में पास कर लिया है। माशाल्लाह मोइज़ काज़िम अली ने साथ साथ MASTER OF COMMERCE का एग्जाम भी फर्स्ट क्लास फर्स्ट में क्लियर कर लिया। हम सब मोइज़ ,काज़िम अली ,नुसरत और सईदा आप को दिली मुबारकबाद पेश करते हैं। मोइज़ के रोशन मुस्तकबिल के दिल से दुआ करते हैं । मोइज़ ने सिर्फ रिश्तेदारों में नहीं अपनी क़ौम और मुल्क में अपना नाम रोशन किया है।
कल जनाब उज़ैर सय्यद ने मोइज़ के घर जाकर हम दोनों (रागिब अहमद (नेरुल ) और बजाते खुद अपनी जानिब से मोइज़ को मुबारकबाद पेश की। गुलदस्ता और मिठाई पेश कर उनको मेरी जानिब से दुआ अपनी जानिब से नेक ख्वाहिशात पेश की।
| Uzer Moiz ko mubarkbad pesh karte huye |
| Saeeda aapa |
सईदा आपाl
खुशबू जैसे लोग मिले
कहानी वो होती है जो हमें इस ज़माने में वापस ले जाए, उस ज़माने के किरदारों को ज़िंदा कर दे और हमें ऐसा महसूस कराए कि हम उसी ज़माने में सांस ले रहे हैं जब यह घटना घाटी थी। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बीते हुए कल को ऐसे बताते हैं जैसे यह घटना हमारे ठीक सामने हो रही हो। अगर आप 78 साल की सईदा आपा से मिलें, तो आपको लगेगा कि वह एक थर्मस लेकर बैठी हैं जिसमें यादें जमा दी गई हैं और आपा धीरे-धीरे थर्मस खोलकर यादों की खुशबू फैला रही हैं। आपा की आवाज़ भी दमदार और गूंजती है और उनके बताने का अंदाज़ भी जादुई है।
सईदा मेरी भतीजी, चाचाज़द भाई अलीमुद्दीन की बेटी है, लेकिन मैंने हमेशा उन्हें सईदा आपा ही कहा है - उनकी ज़िंदगी भी ने सांप-सीढ़ी के खेल की तरह है । 1969 में जलगांव में उनका घर दंगाइयों ने जलाकर राख कर दिया था। आपा मुस्कुराती रहीं। वह "दंगा पीड़ित कॉलोनी" में अपने नए घर को सजाने में मसरूफ रही। अपने पति आबिद अली की मौत से वह टूट गई थीं। उन्होंने खुद को संभाला। शायस्ता परवीन शाफिता परवीन की शादी करवाई। लेकिन अल्लाह ने उनके लिए दूसरे और भी इम्तिहान रखे थे। उन्हें अपने प्यारे जवान बेटे , परवेज़ अली सैयद की मौत का सदमा सहना पड़ा। वह साँप सीढ़ी खेल में हारने वाली नहीं थीं। छायादार, घना दरख्त कभी अपनी जगह से नहीं हिलता। फिर वह उठीं और काज़िम अली को जॉब के लिए कुवैत भेज दिया। उन्होंने उसकी शादी करवाई और नुसरत जैसी सुलझी बहू घर में लाईं। काज़िम की गैरमौजूदगी में अब्दुल मोएज़ ,मिसरा और नुसरत का ख्याल रखा।
आज, अपने पोते अब्दुल मोएज़ के पहले ही अटेम्प्ट में CA एग्जाम में सफल होने पर मुझे लगा कि आपा सईदा ने एक बहुत बड़े गेम में जीत की बाउंड्री पार कर ली है। लेकिन मुझे यकीन है कि आगे भी, इस साँप सीढ़ी के खेल में, वह ऐसे ही हमेशा कामयाब होती रहेंगी इंशाल्लाह । आपा तुम अपनी जीत दर्ज कराती रहोगी। सईदा मैं तुम्हारी लंबी उम्र की दुआ करता हूँ। क्योंकि तुम ही वो अकेली जो हमारे ख़ानदान को जानती हो ,जो हमारे रिश्ते,जो उलझे हुए धागों की गठरी जैसे हैं ,सुलझा सकती हो। आपा सईदा रिश्तों को पहचानने में माहिर हैं।
अगर आप साहबान भी किसी रिश्ते में कोई कड़ी (MISSING LINK )जोड़ना चाहते हैं या जलगांव का इतिहास जानना चाहते हैं, तो आपको जलगांव में सईदा आपा से ज़रूर मिलना चाहिए।
| SAEEDA AAPA |
خوشبو جیسے لوگ ملے
سعیدہ آپا
کہانی وہ ہوتی ہے جو اس دور میں لا کر کھڈا کردے اس دور کے کرداروں کو زندہ کردے اور ہمیں لگے کے ہم اسی دور میں سانس لے رہے ہیں جس وقت یہ واقیہ گزرا تھا کچھ لوگ بھی ایسے ہوتے ہیں جو ماضی کے گزرے زمانے کو اس طرح بیان کرتے ہیں جیسے یہ سانحہ ہمارے سامنے ابھی ہورہا ہو ٧٨ سالہ سعیدہ آپا سے ملو تو لگاتا وہ تھرموس لئے بیٹھی ہے جس میں یادوں کو منجمد کر دیا گیا ہو اور آپا دھیرے سے تھرموس کھول کر یادوں کی خوشبو کو بکھر دیتی ہے آپا نے آواز بھی کھنکدار پایی ہے اور بیان کرنے کا انداز بھی جادوگرانہ ہے
میری بھتیجی سگے چاچا زاد بھایئ کی اولاد لیکن میں نے اسے ہمیشہ سعیدہ آپا ہی کہا ہے -اس کی زندگی بھی کسی سانپ سیڑھی کے کھیل کی طرح الله کی آزماش سے گزرتی رہی جونے جلگاؤں میں 1970میں اسکا مکان دنگایئوں نے جلا کر راکھ کر دیا تھا آپا مسکرا مسکرا کر تنکے جوڈ جوڈ کر "دنگا پیڈٹ کالونی " میں اپنا نیا گھر سجانے میں مصروف ہوگیی اپنے شریک حیات عابد علی کی موت نے اسے نڈھال کر دیا اس نے اپنے آپ کو سمیٹا شایستہ پروین شبستا پروین کی شادیاں کروایی لیکن للہ کو اور امتحان آپا کے لینے تھے اپنے نور نظر لخت جگر پرویز علی سید کی موت کا صدمہ جھیلنا پڑا سانپ سیڑھی کے کھل میں اسے مات نہیں کھانی تھی سایے دار گنجان پیڈ کو کبھی بھی ،آندھی طوفان اپنی جگہ سے نہیں ہلا پاتا آپا پھر اٹھ کھڈی ہویی کاظم علی کو ہنستے ہنستے جاب کے لئے کویت روانہ کیا اسکی شادی کرواکے نصرت جیسی سگھڈ بہو کو گھر لایا کاظم کی غیر موجودگی میں عبدل معز میسرہ اور نصرت کی نگہداشت کی
آج اپنے پوتے عبدل معز کی سی ایے امتحان میں پہلے اتتیمپ میں کامیابی پر مجھے لگا آپا سعیدہ نے بہت بڑے کھیل میں جیت کی بونڈری پا ر کر لی ہو لیکن مجھے یقین ہے آپا مسقبل میں بھی سانپ سیڑھی کے اس کھل میں اسی طرح اپنی جیت درج کرتی رہینگی آپا سعیدہ آپ کی درازی عمر کے لئے دعآ ہے کیوں کی ایک آپ ہی ایک بچی ہے جو ہماری رشتیداری جو کے الجھے ہویے تاگے کے بنڈل کی طرح ہے اس کی گانٹھ کو آپ ہی سلجھا سکتی ہے رشتوں کی پہچان کرانے میں ماہر ہو اگر آپ کو بھی رشتیداری میں کسی کڑی کو جوڑنا ہو یا جلگاؤں کی تاریخ جاننی ہو آپا سعیدہ سے جلگاؤں میں ضرور ملے
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| With Joslin Almeida |
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| With dear Ashok Juriani |
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| Carbon ke Doston ke sang |
कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन
गर खुदा मुझ से कहे कुछ मांग ऐ बन्दे मेरे, में खुदा से दुआ करूँगा के मुझे यूनाइटेड कार्बन कंपनी के (१९८०-१९८७ ) (PERIOD ) में लौटा दे। चाहे कुछ क्षणों के लिए। वो मस्ती वो तरंग वो बे फ़िक्री ज़िन्दगी में कही देखने को नहीं मिली। उन जैसे प्यारे प्यारे दोस्त फिर ज़िन्दगी में कभी नहीं मिले। कंपनी से घर लौटने बाद भी कंपनी में दिल अटका रहता था। ठाणे बेलापुर रोड पर स्टैण्डर्ड कंपनी के पड़ोस में कंपनी थी। अब कंपनी के नज़दीक से गुज़रता हु तो चटयल मैदान दिखयी पड़ता है, दिल पर एक ठेस लगती है । खलंडरा अशोक जुरिआनी , बातूनी प्रदीप खूबचंदानी , दिल रुबा प्रकाश खंबायते , सीरियस जोसलिन अलमेडा , दिल फेक हशमत , खुश मिज़ाज रागिब शैख़ ,रंगीला पागड़ ,सुधाकर ,टंडेल ,लक्षमण साबले मेरे खानदान के फर्द (PART ) हिस्सा महसूस होते थे। हम सब एक ही DECADE १९५०/१९६० की पैदायश थे। सब की सोच एक, मिज़ाज एक और हम सब की शादियां भी इसी दौर (PERIOD ) में हुयी।
ड्यूटी ख़त्म होने पर हम सब की ऑंखें काजल (CARBON BLACK )से काली होजाती थी। लोगों को लगता अजीब शौक हम लोगों ने पाल रखा है। BALCK POWDER से हम पूरी तरह अट जाते थे। नाक ,कान ,थूक में काला मादा (MATERIAL ) निकलता था। ड्यूटी ख़त्म होने के पश्चात् सब एक हमाम में नंगे हो कर LIFEBOUY साबुन से नहाते थे।
नाईट शिफ्ट में आधे से ज़ियाद समय प्रदीप के साथ LAB में गुज़रता। MIXER मशीन जहा कार्बन ब्लैक को पानी के साथ मिला कर PALLET बनायीं जाती थी। की ड्यूटी HORRIBLE होती थी। MIXER TRIP होजाता उसे CLEAN करना नाक में दम कर देता था। लेकिन हम सब मिल कर उसे चालू करते क्लीन करते। खाना भी साथ मिलकर कैन्टीन में खाते । केसकर ,रोहरा हमारे BOSS थे बड़े TYPICAL थे भूलते नहीं भूलते। अब दोनों दुनिया से रुखसत हो चुके हैं।
LONG ऑफ में अक्सर साथ मिल कर PARTY करते,सिनेमा देखते ,कही घूमने निकल जाते । एक के बाद एक हम सब की शादियां हुयी। सब साथ मिल कर शरीक (ATTEND ) करते। किसी के घर मौत होती सब मिल कर जाते दुःख में शरीक होते दिलासा देते। उन दिनों में बहुत हँसता ,बे वजे क़हक़हे लगाया करता था। हम सब एक दिन किसी दोस्त के DADDY की मौत पर MOURNING /CONDOLENCE के लिए निकले। प्रदीप हाथ जोड़ कर कहने लगा "शैख़ भाई ग़म के घर में प्लीज हंसना मत हम सब का कचरा हो जाएंगा "
फिर एक साल हम सब पर ग़म के बादल छाए रहे। कंपनी STRIKE पर थी। लेकिन कभी भी हमारे रिश्तो में दराड (CRACK ) नहीं आयी। वो दिन भी दस्तूर की ऑफिस में ठहाके लगा कर गुज़ारे । किसी ने भी अपने ग़म परेशानी की दास्तान नहीं सुनाई।
कल प्रदीप के जन्म दीन पर उसे मुबारकबाद पेश की तो पुराने दिनो की यादें फिल्म के फ़्लैश बैक की तरह ज़हन पर,ताज़ा हो गयी। अशोक जुरिआनी को याद करके आँख से आंसू जारी होगये।
आयी किसी की याद तो आंसू निकल पड़े
आंसू किसी की याद के कितने क़रीब (नज़दीक ) थे
किसी ने क्या खूब कहा है
दिन जो पखेड़ु होते पिंजरे में मैं रख लेता पालता उनको जतन से
मोती के दाने देता ,सींने से रहता लगाए
याद न जाये बीते दिनों की जाके न आये जो दिन दिल क्यों बुलाये उन्हें
दिल क्यों बुलाये
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| Anjuman Murud school |
हामिद ख़ानज़ादा की दावत थी के उनके भतीजे जुऐब ख़ानज़ादा की शादी में मुरुड जंजीरा में २२ अप्रैल को शिरकत करू। शादी में हम कार से ०६३० बजे रवाना हुवे ११०० बजे उनके आबाई माकन पहुंचे। अपने खानदान में हामिद ख़ानज़ादा बड़े हर दिल अज़ीज़ (फेमस ) हैं। क्या खानदान के बच्चे ,बुज़र्ग ,औरतें सब ने उहे जिस अंदाज़ में खुश आमदीद कहा देख कर दिली ख़ुशी हुयी। मुझे भी अपने खानदान वालों से तार्रुफ़ कराया। मुझे भी इस खानदान से एक अपनायत,उन्सियत का एहसास हुवा। नाश्ते के बाद शहर की सैर कराई।
अंजुमने इस्लाम मुरुड जंजीरा
हर शहर की अपनी पहचान होती है। हामिद ख़ानज़ादा खुद भी नवाब खानदान से ताल्लुक़ (blong ) रखते हैं , आप ने बचपन समंदर के बीच किल्ले में गुज़ारा। तालीम अंजुमन मुरुड जंजीरा से हासिल की। स्कूल क्या है मिनी अलीगढ है। बेहतरीन मस्जिद ,बच्चों को रहने के लिए केप टाउन हॉस्टल ,लाइब्रेरी ,ऑफिस की ईमारत और बिल्डिंग जहाँ क्लासेज होती थी अब भी उसी हालत में हैं रंग रोग़न और दूरिस्ति करके और भी स्कूल की शान में इज़ाफ़ा हो गया है। खेलने के मैदान भी है। लैब्स भी है। नवाब साहेब की दूर अंदेशी पर दाद दने को दिल चाहता है। क़ौम में पढ़े लिखे लोगों की बड़ी तादाद कोकण से बिलोंग करती है। जलगाओं शहर से भी लोगों ने इस स्कूल में पुराने वक़्तों तालीम हासिल की है।
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| Anjuman murud entry gate |
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| Anjuman murud office building |
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| Nawab murud janjeera palace gate वलीमे का सादा खाना पुलाव और हलवा था। सब रिश्तेदारों ने मिल का मेज़बानी की मज़ा आगया Murud Janjira Eid gah |
| Naushe miya zoeb ke sath L Hamid R Ragib |
| Janjira palace gate par state ka emblem |
| Khukhri ka mazar |
अकबर इलाहबादी ने क़ौम को झंझोड़ेने नींद से उठाने के लिए जो शायरी लिखी थी आज भी वह इतनी ही relevent है।
हुए इस क़दर मोह्ज़ीब (civilised ) कभी घर का मुँह न देखा
कटी उम्र होटलों में मरे इस्पेताल जा कर
अकबर ने कहा सुन लो यारों अल्लाह नहीं तो कुछ भी नहीं
यारों ने कहा ये क़ौल ग़लत तन्खाव (salary ) नहीं तो कुछ भी नहीं
पहुंचे होटल में तो तो फिर ईद की परवाह न रही
केक को चख के सीववयों का मज़ा भूल गए
हम ऐसी सब किताबों को कबीले ज़ब्ती समझते हैं
के जिन को पढ़ के बेटे बाप को खब्ती समझते हैं
पैदा हुवा वकील तो शैतान ने कहा
लो आज हम भी साहेबे औलाद हो गए
फलसफी (philosper ) को बहस में खुदा मिलता नहीं
डोर उलझा रहा है और सिरा मिलता नहीं
उन्हें शौक़ -ऐ -इबादत भी है और गाने की आदत भी
निकलती हैं दुवाएं उनके मुँह से ठुमरियाँ हो कर
| Late Murakoboddin |
एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया
जलगांव शहर की आबादी /सरहदें चारो और बढ़ती जा रही है। लेकिन मेरे लिए जलगांव सिमटा जा रहा है अजनबी मक़ाम लगने लगा है। शहर ईंट ,पत्थरों और इमारतों से नहीं बनता। शहर बनता हैं वहां रहने वाले लोगों से । पिछले साल मुबा मुमानी हम से जुदा हुयी लगा आधा शहर सुना होगया हो। पिछले महीने मामू मुरकोबोद्दीन दुनिया से रुखसत हुए लगा जलगांव शहर सन्नाटे में डूब गयाहो । लेकिन अपनी औलादों कफील और नाज़िरुद्दीन अपनी विरासत में छोड़ गए, मखदूम अली भी जो उनकी सरपरस्ती में परवान चढ़ा मामू की याद दिलाते रहेंगे। मेहरून तालाब ,बेर ,जाम और पोलन पेठ जलगाव का मामू मुमानी का मकान शायद कभी भूल पाए ।
1930 से 1945 के दरमियान पैदा होने वालो को silent generation कहा जाता है। मुरकोबद्दीन मामू भी १९३३ में पैदा हुए। आप की शख्सियत में भी एक ठहराव था। फिर baby boomer ,generation x ,Mellenials ,Generation Z ,Generation Alpha ,Beta को मामू ने अपनी आँखों से देखा। सेकंड वर्ल्ड वॉर ,जंगे आज़ादी ,पाकिस्तान और बांग्ला देश का बनना ,पाकिस्तान के साथ दो wars, china से war ,जलगांव के दंगे कितने हादसों को रु ब रु देखा। कुछ लोग छोटी छोटी बातों से डिस्टर्ब होजाते हैं। लेकिन ये बंदा slow & steady अपनी मंज़िल की जानिब बढ़ता ही रहे।
आप बड़े well known ख़ानदान से बिलोंग करते थे । हाकिम रियासोद्दीन इनके वालिद इस ज़माने में मशहूर हाकिम तो थे ही। medical officer पोस्ट से रिटायर हुए और आखिर उम्र तक हिकमत करते रहे।
जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है
मामू मुराकोबोद्दीन ने जलगांव ,उर्दू से मीट्रिक किया। co -operative dept maharashtra में peon की पोस्ट जॉइन की ,sub -auditor और फिर ऑडिटर हो कर पेंशन पायी। १९४८ से १९८७ तक govt service की। फिर १५ साल govt co -op panel पर भीअपनी सर्विसेज देते रहे ।
दिल को दर्द पुराने अच्छे लगते हैं
२६ अक्टूबर २०२५ को जलगाओं visit के दौरान उनसे मुलाक़ात की। मुझे देख कर चेहरे पर शनासाई की मुस्कराहट दिखाई पड़ी शायद ज़हन के किसी कोने में मेरा नाम तलाश करने की कोशिश करते रहे। कफील ने पूछा अब्बा पहचाना "मखदूम "कहा शायद कहना चाहते थे मखदूम का दोस्त। कफील ने कहा राग़िब दादा। उन का चेहरा खिल उठा।
90+ age में कपिल की लुब्रीकेंट की दुकान dedication से सँभालते रहे। कभी कुर्सी पर बैठ कर नमाज़ अदा नहीं की । हाफ़िज़ा भी आखिर उमर तक तकदुरस्त रहा ,माशाल्लाह। एक साल पहले मुमानी के इंतेक़ाल के बाद कुछ बुझ गए थे। दोनों में बहुत मोहब्बत थी।
जी चाहता है नक़्शे क़दम चूमते चले
कुछ शख्सियतें उनमिटी नक़ूश छोड़ जाती है। मामू खामोश तबियत थे लेकिन strong pesonality के मालिक थे। उनकी कमी हमेश महसूस होती रहेंगी।
अल्लाह से दुआ है उनकी मग़फ़िरत करे आमीन।
खुदा बख्शे बहुत सी खूबियां थी मरने वाले में
جموں کشمیر ٹیم نے رانجی ٹرافی میں تاریخ رقم کر دی
مکرمی
ہندوستان میں فلم انڈ سٹری اور کرکٹ نے وطن کو جوڑا ہے کل جب جموں کشمیر ٹیم نے کرناٹک کے خلاف رانجی ٹرافی فائنلس میں ٩٢٦ رنوں کا انبار لگا کر ہبلی میں تاریخ رقم کردی اور کرناٹک ٹیم کو بے دست و پا کر دیا باوجود اسکے کے ،ٹیم میں چار نیشنل پلیئرز کھیل رہیں تھے عاقب نبی جو برامللہ ایکسپریس کے نام سے جانے جاتے ہیں رانجی ١٠ٹرافی میچز میں اپنی تہلکہ خیز بالنگ سے کل ٦٠ وکٹ حاصل کے اور ٹیم کی کامیابی کا حصّہ رہے
جموں کشمیر ٹیم نے یہ مقام اپنی لگاتار جددو جہد اور محنت سے حاصل کیا ہے ٹیم کو اس مقام تک لانے میں بشن سنگھ بیدی ،عرفان پٹھان اور کوچ اجے شرما کی رہنمایی رہی -اس کامیابی سے ٹیم کے پلیئرز کو نیشنل ٹیم میں جلد جگہ ملنے کی امید ہے
جموں کشمیر ٹیم کو اس شاندار جیت پر دلی مبارکباد اور نیک خواہشات
شگفتہ راغب شیخ
نیرول (نئی ممبئی
पेड़ काटने वालों को ये मालूम तो था
जिस्म जल जायेंगे जब सर पे न साया होंगा
پیڈ کاٹنے والوں کو یہ معلوم تو تھا
جسم جل جاینگے جب سر پے نہ سایا ہونگا
कोशिश भी कर उम्मीद भी रख रास्ता भी चुन
फिर उसके बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर
२०२५ रुखसत हो रहा था चंद घड़ियाँ बची थी। अचानक भाभी जान (ज़ुबेदा ) समीरा ,नाएला मुझे और शगुफ्ता को मिलने मेरे घर पहुंचे। क्या खूबसूरत माहौल था। न शिकायत न कोई गिला लगा हर कोई हमारे ख़ानदान का हिस्सा होने पर खुश (शाद ) था। नाएला का एक जुमला चौंका देने वाला था। अल्लाह ने हमारे ख़ानदान को उस मुक़ाम पर पुहंचा दिया है जहाँ हम जो तमन्ना करते हैं उस से बढ़ कर मिल जाता है अल्हम्दोलीलाह । दिल अल्लाह के शुक्र से पुर है। हम सब ने इस बात को एग्री किया। माशाल्लाह हर किसी ने ज़िन्दगी में बेइंतेहा मेहनत की है तब ये नतीजा आया है।
अब्बा हाजी क़मरुद्दीन का ज़िक्र हुवा किस तरह अपनी क़लील (कम) जायज़ आमदनी से हम चार भाइयों की परवरिश की और हम सब के दिल दिमाग़ में ये बात पेवस्त हो गयी के हलाल रिज़्क़ क्या मानी (मीनिंग ) रखता है। उज़्मा इंडिया आयी दोनों मिया बीवी मुझे मिलने आये। वह भी अपनी ज़िन्दगी में सरशार (खुश ) है। सना ,हिना ,इरम ,लुबना, नावेद ,ईशा ,रूही सदफ अल्लाह ने सभी को एक खुशहाल ज़िन्दगी अता की है उस मालिक का जितना शुक्र अदा किया जाये कम हैं। कभी कभी अपने आप पर रश्क होता है ,अल्लाह ज़माने की बुरी नज़र से मेहफ़ूज़ रखे। हमारे बुज़ुर्ग भाभी जान ,डॉ वासिफ अहमद ,नीलोफर भाभी का साया हम पर क़ायम रखे। नयी पौद (Generation ) को बे इन्तहा तरक़्क़ी अता हो। आमीन
| कुछ खूबसूरत लम्हे जो साथ बिताये |