मंगलवार, 23 जून 2026

lagta hai ye daulat nayi nayi hai2

                                                     यह भारतीय आईएसआईएस है 

                                                                                                                   

आजकल भारतीय पर्यटकों का घिनौना और बदसूरत चेहरा दुनिया भर में मीडिया और अखबारों के माध्यम से तेजी से वायरल हो रहा है और दुनिया भर में बदनामी बटोर रहा है। मॉल में जोर-जोर से बातें करना, छोटी-मोटी चोरियां करना, कूड़ा फेंकना, हवाई जहाज में जान-पहचान वालों के साथ खाना बांटना, यात्रियों को धक्का-मुक्की करना, उड़ान के दौरान अपने मोबाइल फोन पर तेज आवाज में संगीत सुनना, लाइन तोड़ना, पान के पैकेटों से पर्यावरण को प्रदूषित करना, विदेशी कानूनों का उल्लंघन करना - ये सब भारतीयों की पहचान बन गया है और अब भारतीय पर्यटकों के बीच एक अजीब सा जुनून पनप रहा है। 

वियतनाम हवाई अड्डे पर विमान में चढ़ने से पहले भारतीय पर्यटक विमान के चारों ओर घूम रहे थे, जो कि एक खतरनाक हरकत है। 

भारतीय पर्यटकों ने हनोई की मशहूर ट्रेन स्ट्रीट पर रेलवे ट्रैक पर अपनी भद्दी कला का प्रदर्शन करते हुए और मशहूर गाना 'चिया चिया' गाते हुए भारत को शर्मिंदा कर दिया। 

 हाल ही में, नेपाल में भारतीय पर्यटकों ने बेशर्मी से नेपाल की सड़कों पर अपनी कारों की खिड़कियों से अपने गीले अंडरवियर का प्रदर्शन किया। 

अब कौन से देश भारतीय पर्यटकों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं? 

किसी ने यह सच कहा कि हमारे पर्यटकों ने 5,000 साल पुरानी भारतीय सभ्यता को असभ्य के रूप में कलंकित कर दिया है। 

शबीना अदीब की यह कविता, कुछ संपादन के बाद, भारतीय पर्यटकों के लिए भी सत्य है। 

परिवार के मुखियाओं का स्वभाव सौम्य होता है। 

आपका रवैया ही बताता है कि आप कितने अमीर हैं। 




LAGTA HAI YE DAULAT NAYI NAYI HAI

                                                    اف یہ ہندوستانی صیا ح 

                                                                                                                   

آجکل میڈیا اور اخبارات میں ہندوستانی سیلانیوں کا مکروہ بھددہ چہرہ دنیا کے سامنے تیزی سے وایرل  ہو رہا ہے اور دنیا میں بدنامی کی وجیہ بھی ہورہا ہے بلند آواز میں گفتگو کرنا ، مال میں معمولی نوعیت کی چوریاں ،کوڑا پھینکنا ،ہوائی جہاز میں جان پہچان والے ساتھیوں کے ساتھ کھانا شیر کرنا ،مسافروں کے ساتھ دھکّا مکی ،اپنے ذاتی موبائل پر فلائٹ میں  زور زور سے میوزک سننا ، لائن توڑنا ،پان کی پیکوں سے ماحول خراب کرنا ،غیر ملکوں کے قوانین توڑنا یہ سب   ہندوستانیوں کی پہچان بن گیا ہے اور اب ایک عجیب خبط ہندوستانی سیاحوں میں پرورش پا رہا ہے ناچ 

ویتنام ائیرپورٹ پر فلائٹ پر سوار ہونے سے پہلے ہندوستانی سیاحوں نے فلائٹ کے ارد گرد  گربے کا پردرشن کیا جو ایک خطرناک  بات ہے 

ہنوئی کی مشهور ٹرین سٹریٹ پر ہندوستانی سیلانیوں نے چھیا چھیا نغمہ  بجا کر پٹریوں پر اپنے   بد صورت فن کا مظاہرہ کر ہندوستان کا سر شرم سے جھکا دیا 

 حال ہی میں نیپال میں ہندوستانی صیاحوں   نے نیپال کی سڑکوں پر اپنی کار کی کھڑکیوں میں اپنے انڈر گارمنٹ گیلے کپڑوں کو سکھانے کا بےشرم مظاہرہ کیا 

اب کیی ملکوں میں ہندوستانی سیلانیوں پر پا بندگی عاید کی جا رہی ہے 

کسی نے سچ کہا کے ٥٠٠٠ سالوں پرانی ہندوستانی تہذیب کو ہمارے سیاحوں نے غیر مہذب ہونے کا کلنک لگا دیا 

شبینہ ادیب کا یہ شیر کچھ ترمیم کے بعد ہندوستانی سیلانیوں پر صادق اتا ہے 

جو خاندانی رئیس ہیں وہ مزاج رکھتے ہیں نرم اپنا 

تمہارا رویہ بتا رہا ہے تمہاری دولت نیی نیی ہے 




सोमवार, 22 जून 2026

MUBARAKBAD

                                                                मुबारकबाद 

निहायत मुस्सरत ख़ुशी के साथ खबर दी जाती है के मोइज़ काज़िम अली सय्यद ने CA का एग्जाम पहली ATTEMPT में पास कर लिया है। माशाल्लाह मोइज़ काज़िम अली ने साथ साथ MASTER OF COMMERCE का एग्जाम भी फर्स्ट क्लास फर्स्ट में क्लियर कर लिया। हम सब मोइज़ ,काज़िम अली ,नुसरत और सईदा आप को दिली मुबारकबाद पेश करते हैं। मोइज़ के रोशन मुस्तकबिल के दिल से दुआ करते हैं । मोइज़ ने  सिर्फ रिश्तेदारों में नहीं अपनी क़ौम और मुल्क में अपना  नाम रोशन किया है। 

      कल जनाब उज़ैर सय्यद ने मोइज़  के घर जाकर हम दोनों (रागिब अहमद (नेरुल ) और बजाते खुद अपनी जानिब से मोइज़ को मुबारकबाद  पेश की। गुलदस्ता और मिठाई पेश कर उनको मेरी जानिब से दुआ अपनी जानिब से नेक ख्वाहिशात पेश की। 

Uzer Moiz ko mubarkbad pesh karte huye
 

शुक्रवार, 19 जून 2026

khushbu jaise log mile-5

                   

Saeeda aapa

                                                 

                                                                        सईदा आपाl


                                                               खुशबू जैसे लोग मिले 


कहानी वो होती है जो हमें इस ज़माने में वापस ले जाए, उस ज़माने के किरदारों को ज़िंदा कर दे और हमें ऐसा महसूस कराए कि हम उसी ज़माने में सांस ले रहे हैं जब यह घटना घाटी थी। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बीते हुए कल को ऐसे बताते हैं जैसे यह घटना हमारे ठीक सामने हो रही हो। अगर आप 78 साल की सईदा आपा से मिलें, तो आपको लगेगा कि वह एक थर्मस लेकर बैठी हैं जिसमें यादें जमा दी गई हैं और आपा धीरे-धीरे थर्मस खोलकर यादों की खुशबू फैला रही हैं। आपा की आवाज़ भी दमदार और गूंजती है और उनके बताने का अंदाज़ भी जादुई है।


        सईदा मेरी भतीजी, चाचाज़द भाई  अलीमुद्दीन की बेटी है, लेकिन मैंने हमेशा उन्हें सईदा आपा ही कहा है - उनकी ज़िंदगी भी ने सांप-सीढ़ी के खेल की तरह है । 1969 में जलगांव में उनका घर दंगाइयों ने जलाकर राख कर दिया था। आपा मुस्कुराती रहीं। वह "दंगा  पीड़ित कॉलोनी" में अपने नए घर को सजाने में मसरूफ रही। अपने पति आबिद अली की मौत से वह टूट गई थीं। उन्होंने खुद को संभाला। शायस्ता परवीन शाफिता परवीन की शादी करवाई। लेकिन अल्लाह ने उनके लिए दूसरे और भी  इम्तिहान रखे थे। उन्हें अपने प्यारे जवान बेटे , परवेज़ अली सैयद की मौत का सदमा सहना पड़ा। वह साँप सीढ़ी  खेल में हारने वाली नहीं थीं। छायादार, घना दरख्त कभी अपनी जगह से नहीं हिलता। फिर वह उठीं और काज़िम अली को जॉब के लिए कुवैत भेज दिया। उन्होंने उसकी शादी करवाई और नुसरत जैसी सुलझी बहू घर  में लाईं। काज़िम की गैरमौजूदगी में अब्दुल मोएज़ ,मिसरा और नुसरत का ख्याल रखा।


   आज, अपने पोते अब्दुल मोएज़ के पहले ही अटेम्प्ट में  CA एग्जाम में सफल होने पर मुझे लगा कि आपा सईदा ने एक बहुत बड़े गेम में जीत की बाउंड्री पार कर ली है। लेकिन मुझे यकीन है कि आगे भी, इस साँप सीढ़ी के खेल में, वह ऐसे ही हमेशा कामयाब होती रहेंगी इंशाल्लाह । आपा तुम अपनी जीत दर्ज कराती रहोगी। सईदा मैं तुम्हारी लंबी उम्र की दुआ करता हूँ। क्योंकि तुम ही वो अकेली जो हमारे ख़ानदान को जानती हो ,जो हमारे रिश्ते,जो उलझे हुए धागों की गठरी जैसे हैं ,सुलझा सकती हो। आपा सईदा रिश्तों को पहचानने में माहिर हैं। 

   अगर आप  साहबान भी किसी रिश्ते में कोई कड़ी  (MISSING LINK )जोड़ना चाहते हैं या जलगांव का इतिहास जानना चाहते हैं, तो आपको जलगांव में सईदा आपा से ज़रूर मिलना चाहिए।

KHUSHBU JAISE LOG MILE-4

                           

SAEEDA AAPA

                                                    

                                                                                  خوشبو جیسے لوگ ملے 

                                                                                              سعیدہ آپا 

         کہانی وہ ہوتی ہے جو اس دور میں لا کر کھڈا کردے اس دور کے کرداروں کو زندہ کردے اور ہمیں لگے کے ہم اسی دور میں سانس لے رہے ہیں جس وقت   یہ واقیہ گزرا تھا کچھ لوگ بھی ایسے ہوتے ہیں جو ماضی کے گزرے زمانے کو اس طرح بیان کرتے ہیں جیسے یہ سانحہ  ہمارے سامنے ابھی  ہورہا ہو ٧٨ سالہ سعیدہ آپا سے ملو تو لگاتا وہ تھرموس لئے بیٹھی ہے جس میں یادوں کو منجمد  کر دیا  گیا ہو اور آپا دھیرے سے تھرموس کھول کر یادوں کی  خوشبو کو بکھر دیتی ہے آپا نے آواز بھی کھنکدار پایی ہے اور بیان کرنے کا انداز بھی جادوگرانہ ہے 

        میری بھتیجی سگے چاچا زاد بھایئ کی اولاد لیکن میں نے اسے ہمیشہ سعیدہ آپا ہی کہا ہے -اس کی زندگی بھی کسی سانپ  سیڑھی کے کھیل کی طرح الله کی آزماش سے گزرتی رہی جونے جلگاؤں میں 1970میں اسکا مکان دنگایئوں نے  جلا کر راکھ کر دیا  تھا آپا مسکرا مسکرا کر تنکے جوڈ جوڈ کر "دنگا پیڈٹ کالونی " میں اپنا نیا گھر سجانے میں مصروف ہوگیی اپنے شریک حیات عابد علی  کی موت نے اسے نڈھال کر دیا اس نے اپنے آپ کو سمیٹا شایستہ پروین شبستا پروین کی شادیاں کروایی  لیکن للہ کو اور امتحان آپا کے لینے تھے اپنے نور نظر لخت جگر پرویز علی سید کی موت کا صدمہ جھیلنا پڑا سانپ  سیڑھی کے کھل میں اسے مات نہیں کھانی تھی سایے دار گنجان پیڈ کو  کبھی بھی ،آندھی طوفان اپنی جگہ سے نہیں ہلا پاتا آپا پھر اٹھ کھڈی ہویی  کاظم علی کو ہنستے ہنستے جاب کے لئے کویت روانہ کیا اسکی شادی کرواکے نصرت جیسی سگھڈ بہو کو گھر لایا کاظم کی غیر موجودگی میں عبدل معز میسرہ اور نصرت کی نگہداشت کی 

   آج اپنے پوتے عبدل معز کی سی ایے امتحان  میں پہلے اتتیمپ میں کامیابی پر مجھے لگا آپا سعیدہ نے بہت بڑے  کھیل میں جیت کی بونڈری پا ر کر لی ہو لیکن مجھے یقین ہے  آپا مسقبل میں بھی سانپ سیڑھی کے اس کھل میں اسی طرح اپنی جیت درج کرتی رہینگی آپا سعیدہ آپ  کی درازی عمر کے لئے دعآ ہے کیوں کی ایک آپ ہی ایک  بچی ہے جو ہماری  رشتیداری جو  کے الجھے ہویے تاگے کے بنڈل کی طرح ہے اس کی گانٹھ کو آپ ہی سلجھا سکتی ہے رشتوں کی پہچان کرانے میں ماہر ہو اگر آپ کو بھی رشتیداری میں کسی کڑی کو جوڑنا ہو یا جلگاؤں کی تاریخ جاننی ہو آپا سعیدہ سے جلگاؤں میں ضرور ملے 



बुधवार, 6 मई 2026

कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन

         

With Joslin Almeida


With dear Ashok Juriani


                                        

Carbon ke Doston ke sang

              कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन 

 गर खुदा मुझ से कहे कुछ मांग ऐ बन्दे मेरे, में खुदा से दुआ करूँगा के मुझे यूनाइटेड कार्बन कंपनी के (१९८०-१९८७ ) (PERIOD ) में लौटा दे। चाहे कुछ क्षणों के लिए। वो मस्ती वो तरंग वो बे फ़िक्री ज़िन्दगी में कही देखने को नहीं मिली। उन जैसे प्यारे प्यारे दोस्त फिर ज़िन्दगी में कभी नहीं मिले। कंपनी से घर लौटने बाद भी कंपनी में दिल अटका रहता था। ठाणे बेलापुर रोड पर स्टैण्डर्ड कंपनी के पड़ोस में कंपनी थी। अब कंपनी के नज़दीक से गुज़रता हु तो चटयल मैदान दिखयी पड़ता है, दिल पर एक ठेस लगती है । खलंडरा अशोक जुरिआनी , बातूनी प्रदीप खूबचंदानी , दिल रुबा प्रकाश खंबायते , सीरियस  जोसलिन अलमेडा , दिल फेक हशमत , खुश मिज़ाज रागिब शैख़ ,रंगीला पागड़ ,सुधाकर ,टंडेल ,लक्षमण साबले मेरे खानदान के फर्द (PART ) हिस्सा महसूस होते थे। हम सब एक ही DECADE १९५०/१९६० की पैदायश थे। सब की सोच एक, मिज़ाज एक और हम सब की शादियां भी इसी दौर (PERIOD ) में हुयी। 

      ड्यूटी ख़त्म होने पर हम सब की ऑंखें काजल  (CARBON BLACK )से काली होजाती थी। लोगों को लगता अजीब शौक हम लोगों ने पाल रखा है। BALCK POWDER से हम पूरी तरह अट जाते थे। नाक ,कान ,थूक में काला मादा (MATERIAL ) निकलता था। ड्यूटी ख़त्म होने के पश्चात् सब एक हमाम में नंगे हो कर LIFEBOUY साबुन से नहाते थे। 

    नाईट शिफ्ट में आधे से ज़ियाद समय प्रदीप के साथ LAB में गुज़रता। MIXER मशीन जहा कार्बन ब्लैक को पानी के साथ मिला कर PALLET बनायीं जाती थी। की ड्यूटी HORRIBLE होती थी। MIXER TRIP  होजाता उसे CLEAN करना नाक में दम कर देता था। लेकिन हम सब मिल कर उसे चालू करते क्लीन करते। खाना भी साथ मिलकर कैन्टीन में खाते । केसकर ,रोहरा हमारे BOSS थे बड़े TYPICAL थे भूलते नहीं भूलते। अब दोनों दुनिया से रुखसत हो चुके हैं। 

    LONG ऑफ में अक्सर साथ मिल कर PARTY करते,सिनेमा देखते ,कही घूमने निकल जाते । एक के बाद एक  हम सब की शादियां हुयी। सब साथ मिल कर शरीक (ATTEND ) करते। किसी के घर मौत होती सब मिल कर जाते दुःख में शरीक होते दिलासा देते। उन दिनों में बहुत हँसता ,बे वजे क़हक़हे लगाया करता था। हम सब एक दिन किसी दोस्त के DADDY की मौत पर MOURNING /CONDOLENCE  के लिए निकले। प्रदीप हाथ जोड़ कर कहने लगा "शैख़ भाई ग़म के घर में प्लीज हंसना मत हम सब का कचरा हो जाएंगा  "

  फिर एक साल हम सब पर ग़म के बादल छाए रहे। कंपनी STRIKE पर थी। लेकिन कभी भी हमारे रिश्तो में दराड (CRACK ) नहीं आयी। वो दिन भी दस्तूर की ऑफिस में ठहाके लगा कर गुज़ारे । किसी ने भी अपने ग़म परेशानी की दास्तान नहीं सुनाई। 

    कल प्रदीप के जन्म दीन पर उसे मुबारकबाद पेश की तो पुराने दिनो की यादें फिल्म के फ़्लैश बैक की तरह ज़हन पर,ताज़ा हो गयी। अशोक जुरिआनी को याद करके आँख से आंसू जारी होगये। 

       आयी किसी की याद तो आंसू निकल पड़े 

         आंसू किसी की याद के कितने क़रीब (नज़दीक ) थे 

किसी ने क्या खूब कहा है 

दिन जो पखेड़ु होते पिंजरे में मैं रख लेता पालता उनको जतन से 

मोती के दाने देता ,सींने से रहता लगाए 

याद न जाये बीते दिनों की जाके न आये जो दिन दिल क्यों बुलाये उन्हें 

दिल क्यों बुलाये 

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

DOSTON KI MEHRBANI CHAHIYE

                 

Anjuman Murud school

                                                       दोस्तों की मेहरबानी चाहिए 

 हामिद ख़ानज़ादा की दावत थी के उनके भतीजे जुऐब ख़ानज़ादा की शादी में  मुरुड जंजीरा में २२ अप्रैल को   शिरकत करू। शादी में हम कार से ०६३० बजे रवाना हुवे ११०० बजे उनके आबाई माकन पहुंचे। अपने खानदान में हामिद ख़ानज़ादा बड़े हर दिल अज़ीज़ (फेमस ) हैं। क्या खानदान के बच्चे ,बुज़र्ग ,औरतें सब ने उहे जिस अंदाज़ में खुश आमदीद कहा देख कर दिली ख़ुशी हुयी।  मुझे भी अपने खानदान वालों से तार्रुफ़ कराया। मुझे भी इस खानदान से एक अपनायत,उन्सियत  का एहसास हुवा। नाश्ते के बाद शहर की सैर कराई। 

                                                       अंजुमने इस्लाम मुरुड जंजीरा 

    हर शहर की अपनी पहचान होती है। हामिद ख़ानज़ादा खुद भी नवाब खानदान से ताल्लुक़ (blong ) रखते हैं , आप ने बचपन समंदर के बीच किल्ले में गुज़ारा। तालीम अंजुमन मुरुड जंजीरा से हासिल की। स्कूल क्या है मिनी अलीगढ है। बेहतरीन मस्जिद ,बच्चों को रहने के लिए केप टाउन हॉस्टल ,लाइब्रेरी ,ऑफिस की ईमारत और बिल्डिंग जहाँ क्लासेज होती थी अब भी उसी हालत में हैं रंग रोग़न और दूरिस्ति करके और भी स्कूल की शान में इज़ाफ़ा हो गया है। खेलने के मैदान भी है। लैब्स भी है। नवाब साहेब की दूर अंदेशी पर दाद दने को दिल चाहता है। क़ौम में पढ़े लिखे लोगों की बड़ी तादाद कोकण से बिलोंग करती है। जलगाओं शहर से भी लोगों ने इस स्कूल में पुराने वक़्तों तालीम हासिल की है। 

Anjuman murud entry gate

Anjuman murud office building
    पुरे मुरुड जंजीरा को हामिद ख़ानज़ादा ,हाथ की लकीरों की तरह जानते हैं। ख़ानज़ादा ,दामाद ,शेख़ानी ,काज़ी ,खतीब,पेश इमाम खानदान और उनके मोहल्ले कहाँ हैं सब जानते हैं। मुरुड में नाना पाटेकर का बंगलो भी मुझे दिखया। नवाब खानदान के पूर्वजों के मज़ार जो खुखरी में हैं वहां से गुज़रते मुझे बताया। सीद्धि याक़ूत का मज़ार जो उनके बुज़र्ग है ,भी देखा। आज़ादी से पहले नवाब साहब की रियासत मुरुड जंजीरा में पावर प्लांट चला कर रात भर बिजली सप्लाई की जाती थी। शायद किसी और स्टेट में ये इंतज़ाम हो ?
  खूबसूरत साफ़ शफ़्फ़ाफ़ बीच भी देखा
Murud Jajeera beach with Hamid khanzadaa 



 वलीमे के लिए १२ बजे लौटना था इस लिए चलते चलते नवाब मुरुड जंजीरा के महल की झलक भी देख ली 
Nawab murud janjeera palace gate
वलीमे का सादा खाना पुलाव और हलवा था। सब रिश्तेदारों ने मिल का मेज़बानी की मज़ा आगया 

Murud Janjira Eid gah

Naushe miya zoeb ke sath L Hamid R Ragib

Janjira palace gate par state ka emblem

Khukhri ka mazar

   मुरुड जंजीरा देखने के लिए बहुत कम वक़्त मिला लेकिन जो देख ज़हन में  नक़्श हो गया।