गुरुवार, 27 अगस्त 2026

ameen patel ,aslam shaikh jyoti gaikawad ko mubarkbad

                                                   امین پٹیل ،اسلم شیخ ،جیوتی گایکواد کو مبارکباد 

مکرمی 

جمہوریت میں عوامی نمایندوں کی کارگردگی اسمبلی میں حاضری، پوچھے گئے سوالات ،سوالات کا  میعار کیسا تھا پچھلے ایک سال کے دوران پوچھے گئے سوالات ،سوالات کا میعار ،اسسمبلی میں حاضری اور ممبر کیا کسی غیر قانونی کاموں میں ملوث تھے پرجا فاؤنڈیشن کے سروے کے چونکا دینے والے نتایج سامنے آے ہیں اپنی ایماندارانہ کار گردگی کی بنا پر امین پٹیل ٨٢.٨٩  فیصد ،اسلم شیخ ٨٠.٥٨ فی صد جیوتی گائکوواد ٨٠.٣ فی صد سکور کے ساتھ بہترین کار گردگی کا مظاہرہ کیا ہے اور اتفاقاً تتینوں ممبران کانگریس ٹکٹ پر جیتے ہیں 

        افسوس کا مقام ہے پچھلے ١٥ سالوں میں اسسمبلی میں  سوال پوچھنے کی تعداد میں ٧٢ فی صد کی کمی آی ہے پتا چلتا ہے کس طرح عوامی نمایندوں کے میعار میں گراوٹ آی ہے اسی لئے اپنے اپنے حلقوں میں اسسمبلی ممبرز کو نہ روڈ  بنانے ،روڈ درستی ،ڈرینیج، صاف صفائی، گورنمنٹ  اسپتال کا کام کاج  کے کاموں میں کویی دلچسپی دکھایی نہیں دیتی الیکشن کے وقت پیسوں سے ووٹ خرید کر ٥ سالوں تک لوٹ مار کر اپنی جبیں بھرنے والے  ممبران کی تعداد میں دن بدن اضافہ ہوتا جا رہا ہے جو جمہوریت کی بنیادیں کھوکھلا کرنے کی وجہ بنتا جا رہا ہے 

       اگر عوام میں بیداری نہیں آتی ہے تو دن بدن حالت دگرگوں ہوتی جا ینگے 

راغب احمد 

نیرول نیی مممبئی 

WARNA SURAJ KI KAHAN SALGIRAH HOTI HAI

 

L to R ragib Tariq Munshi,Zakira TRiq Munshi,Shagufa Ragib 
                                                    वरना सूरज की कहाँ सालगिरह होती है 
आज हम सब होटल कॉर्पोरेट बेलापुर में अहम् शख्सियत जनाब सज्जाद तारिक़ मुंशी की 75 th सालगिरह मानाने जमा हुए है। उन की खिदमत में दो शेर पेश करता हूँ। 
                          रौनक़े महफ़िल नहीं था कोई तुझ से पहले 
                           रौनक़े बज़्म नहीं है कोई तेरे बाद 
                           आप आये तो बहारों ने लुटाई खुशबु 
                            फूल तो फूल हैं ,काँटों से भी आयी खुशबु 
     आज के रौनक़े बज़्म जनाब हाजी तारिक़ मुंशी  अपनी ज़िन्दगी की  डायमंड जुबली मुक़्क़मिल कर रहे हैं। तारिक़ का मतलब होता है रात में दिखने वाला सितारा और सज्जाद यानि बहुत सजदा करने वाला। माशाल्लाह पिछले साल हमने इनकी शादी की 50 th  (गोल्डन जुबली ) सालगिरह मनाई थी। ख़ूबरू (handsome )शख्सियत के मालिक ,निकलता क़द ,नरम गुफ़्तार (soft spoken ),बहुत ज़माने से हमें मुत्तासिर करते रहे है। जनाब शत्रुघन सिन्हा से मुशबीहाट (similarity ) रखते हैं। एक ज़माना था उनेह देख कर शत्रुघन सिन्हा के मशहूर डॉयलग्स ज़हन में गूंजने लगते थे।  " खामोश " लगी को आग कहते हैं बुझी को राख कहते कहते है और इस बुझी राख से बनी बारूद को विश्वनाथ कहते हैं " ५० साल पहले जब हम ने उनेह पहली बार देखा था  वह शत्रुघन सिन्हा से ज़ियादा ख़ूबरू थे और आज भी उम्र के इस दौर में हमारी नज़रों में शत्रुघ्न सिन्हा से कई ज़ियादा स्मार्ट हैं।looks से ज़ियादा   इंसान का अख़लाक़ ,किरदादर अहमियत रखता है। भाई जान के लिए जिस तरह लोगों ने  इस महफ़िल  में अपने ख्यालात का इज़हार किया मेरी नज़रों में उनकी अहमियत /इज़्ज़त और बढ़ गयी। अपनी औलाद बहने शरीके हयात पोते पोतियां ,नवासे नवासियां ,दामाद सब के दिलों  में उनके लिए  बे हद एहतेराम हैं। 
     कुछ यादें अँधेरी रातों में चमकते जुगनुओं की तरह होती है। १९७१ साल में पहली बार जलगाव से मुंबई आया था।  सादिक़ भाई मुझे सोमैया कॉलेज में दाखला दिला कर  नौकरी के लिए कुवैत रवाना हो गए थे। कभी कभी अकेले पन तन्हाई  का एहसास होता। दो खानदान मुंशी और अख़लाक़ भाई के घर चला जाता फिर लगता किसी ने दलदल में डूबने से बचा लिया हो। तारिक़ भाई जान ज़ाकिरा भाभी ने भी हमेशा मुशफेक़ना रवैया रखा। मैं ने भी उनेह  हमेशा बड़े भाई की तरह इज़्ज़त दी। शादी के बाद हमारी रज़िया खाला और शगफ्ता (अहलिया ) की फूफी ने हम दोनों को अपनी मोहबतों ,इनायतों ,मेहरबानी और करम से  शराबोर  कर दिया। तारिक़ भाई जान से कुछ अरसा मुलक़ातें कम कम हो गयी थी। जब १९ साल में ,लगातार मुल्क से बाहेर रहा। फिर इत्तेफ़ाक़न से ये हुवा के वह हमारे पड़ोस नेरुल में वाइट हाउस में शिफ्ट हो गए। फिर से मुलाक़ातों का सिलसिला जारी होगया। अल्लाह से दुआ हैं 
जहाँ रहे वह खैरियत के साथ रहे 
उठाये हाथ तो ये दुआ याद आयी 


गुरुवार, 23 जुलाई 2026

SHER EPLAINED

                                           शेर का मतलब  

दुःख बाँटने की चीज़ नहीं फिर भी दोस्तों 

एक दूसरे के हाल से वाक़िफ़ रहा करों 

हसन सोज़ 

हाल :  तबियत  ,हालत 

वाक़िफ़ : जानकारी 

ज़िन्दगी गुजरने के दो शायरों के दो फलसफे 

कोशिश भी कर उम्मीद भी रख रास्ता भी चुन 

फिर उसके बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर 

निदा फ़ाज़ली 

रखने की बस ये तीन ही चीज़ें हैं इन दिनों 

हिम्मत रखो ,यक़ीन रखो ,फासला रखो 

जव्वाद शैख़ 

मंगलवार, 14 जुलाई 2026

Khushbu jaise log mile 4

                                                                   खुशबु जैसे लोग मिले 

Myself with Dr Affan
     हम ने दुबई को दो बार विजिट की । अफ्फान छोटा था हम दोनों उनके बिल्डिंग की छत पर स्विमिंग पूल में घंटों नहाया करते। जितने दिन रहा शौक़ पूरा करता रहा। मुझे शतरंज खेलने के लिए भी  कहता लेकिन ज़िन्दगी में  ने शतरंज कभी खेला ही नहीं था इसलिए उस का साथ न दे सका । 

     अक्सर डॉ वासिफ से  जो दुबई में रहते है ,अफ्फान के APJ बारे  में जानकारी मिलते रहती। ५ क़ुरान के पारे हिफ़्ज़ कर रखे हैं। .उसकी किरात भी बहुत उम्दा है। चैस में अपने दादा अयाजोद्दीन की विरासत को आगे बढा रहा है। 
        आठवे स्टैण्डर्ड तक दुबई के स्कूल में तालीम मुक़म्मिल की हर साल क्लास में टॉप करता रह । अपने ख्वाबों की तामीर के लिए अपने वालिद के हुक्म पर पूना का रुख किया। 
      DR   APJ Abdulkalam का क़ौल है "You have to Dream before your  Dreams come true " बचपन से इस बच्चे (अफ्फान ) ने डॉक्टर बनने का ख्वाब सजा रखा था। शायद DR APJ Abddulkalam के इस क़ौल से भी वो वाकिफ था " A dream is not that you see while sleeping , it is something that does not let you sleep "
         किसी  उर्दु शायर ने भी कहा है 
                             कोशिश भी कर उम्मीद भी रख रास्ता भी चुन 
                              फिर उसके बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर 
         उसे अपनी दो बड़ी बहनों डॉ सिदृरा  नाज़िमुद्दीन और डॉ सारा  नाज़िमुद्दीन से भी प्रेरणा (inspitaion ) मिली हो जो मेडिकल प्रोफेशन को अपना चुकी थी। अपने वालिदैन  (नज़ीमुद्दीन और निकहत )से भी उसे पूरी पूरी सहायता मिली। क्यूंकि ख्वाबों की तकमील के लिए हालात भी सही मयस्सर आने चाहिए। 
         10th मैं 95 % मार्क्स स्कोर करना जुए शीर ( दूध की नहर खोदना ) लाने से कम नहीं। 12th स्टैण्डर्ड में 90 %
 और नीट एग्जाम में महराष्ट्र में ३०० रैंक। किसी ख्वाब की मानिंद लगता है। 
                                 खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है 
           उसे JJ  medical college mumbai से एडमिशन ऑफर था जो उसने ठुकराय और B J Medical college puna  में अपनी ज़ाती चॉइस  मर्ज़ी से दाखला करवाया। 
           GEN Z  अफ्फान भी इसी GEN से ताल्लुक़ रखता है ,की ये खूबी है के उनमे  बला की खुद ऐतेमादि देखने को मिलती है।  
१. अफ्फान में भी खुद ऐतेमादि मौजुद है लेकिन अना (Ego ) से पाक। ज़मीं से जुड़ा है। वालेदैन बुज़र्गों की इज़्ज़त 
अहतराम का जज़्बा शायद घर खानदान से मिला है। 
२. ५ क़ुरान के पारों का हिफ़्ज़ करना मानी रखता है। खूबसरत आवाज़ में किरात भी कर लेता है। नमाज़ की पाबंदगी 
३. डिबेट में स्कूल कॉलेज में कई ट्रॉफीज हासिल कर चूका है 
४. शतरंज (chess ) खेलना उसे विरसे में मिला है। 
५. उर्दू शायरी से दिलचस्पी है ,उर्दू पढ़ लेता है ,लिख भी सकता है। उर्दू के उर्दू शेर उसे ज़बानी याद है। 
    अच्छे अख़लाक़ से ज़िन्दगी में बहुत कामयाबियां मिलती है। ऐसे लोग क़ौम मुल्क के लिए सरमाया होते हैं। इंशाल्लाह बहुत जल्द  अफ्फान अच्छा MBBS डॉक्टर बन कर अपने खानदान क़ौम का नाम रौशन करेंगा। डॉ अफ्फान को नेक ख्वाहेशात रोशन मुस्तक़बिल के लिए ढेर साड़ी दुवायें।  आमीन 
     ख़ानदान और क़ौम के बच्चों को डॉ अफ्फान की मिसालि ज़िंदगी से सबक़ लेने की ज़रूरत है। 
affan ke Ghar ki 2 drs  sisters Dr Sara &Dr Sidra


       
     
         

मंगलवार, 30 जून 2026

Gardishe Ayyam

                                                                 گردش ایام بائیو پر میرے تاثرات 

جناب مع الدین عثمانی کی سوا نح حیات مجھے گفت کی تھی پڑھی بہت لطف آیا کتاب کا ٹائٹل بہت عمدہ ہے چھپایی بھی خوبصورت ہے لگا قیمت بھی معقول ہی ہے 

              جاوید سددیقی نے ایک انٹرویو میں کہا ہے کسی بھی کتاب کو تین بار پڑھنے پر ہی کتاب کو سمجھا جا سکتا ہے میں نے بھی اس بات پر عمل کیا ہوں اور اب گردش ایام میری اس الماری کی زینت بن گی ہے جس میں میری پسندیدہ کتابیں رکھی ہیں 

      جلگاؤں سے وابستہ یادوں میں جناب عثمانی نے ١٢ نمبر اور ١٣ نمبرسکول سے پرائمری کی تعلیم حاصل کی جب کے میں نے سکول نمبر ١١ سے پرائمری تعلیم حاصل کی جا معے جلگاؤں کی عمارت میں تھی لا ڈجی جناب ہیڈ ماسٹر تھے اینگلو اردو اسکول کے حالات موصوف نے جس خوبصورتی سے بیان کے ہیں لگا ما ضی میں لوٹ گیا ہوں اسکول کی عمارت پیچھے مسجد چار پاخانے جن پر چار سیڑھی چاڈ کر پہچنا ہوتا تھا ہم جب بھی استمعال کرتے پلین پر چڑھنے کے انداز میں نیچے کھڈے دوستوں کو بانے بانے کرتے چاند مار یا گولی بار پر لنچ کے وقت مین وزٹ کرتے 



 

मंगलवार, 23 जून 2026

lagta hai ye daulat nayi nayi hai2

                                                     यह भारतीय आईएसआईएस है 

                                                                                                                   

आजकल भारतीय पर्यटकों का घिनौना और बदसूरत चेहरा दुनिया भर में मीडिया और अखबारों के माध्यम से तेजी से वायरल हो रहा है और दुनिया भर में बदनामी बटोर रहा है। मॉल में जोर-जोर से बातें करना, छोटी-मोटी चोरियां करना, कूड़ा फेंकना, हवाई जहाज में जान-पहचान वालों के साथ खाना बांटना, यात्रियों को धक्का-मुक्की करना, उड़ान के दौरान अपने मोबाइल फोन पर तेज आवाज में संगीत सुनना, लाइन तोड़ना, पान के पैकेटों से पर्यावरण को प्रदूषित करना, विदेशी कानूनों का उल्लंघन करना - ये सब भारतीयों की पहचान बन गया है और अब भारतीय पर्यटकों के बीच एक अजीब सा जुनून पनप रहा है। 

वियतनाम हवाई अड्डे पर विमान में चढ़ने से पहले भारतीय पर्यटक विमान के चारों ओर घूम रहे थे, जो कि एक खतरनाक हरकत है। 

भारतीय पर्यटकों ने हनोई की मशहूर ट्रेन स्ट्रीट पर रेलवे ट्रैक पर अपनी भद्दी कला का प्रदर्शन करते हुए और मशहूर गाना 'चिया चिया' गाते हुए भारत को शर्मिंदा कर दिया। 

 हाल ही में, नेपाल में भारतीय पर्यटकों ने बेशर्मी से नेपाल की सड़कों पर अपनी कारों की खिड़कियों से अपने गीले अंडरवियर का प्रदर्शन किया। 

अब कौन से देश भारतीय पर्यटकों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं? 

किसी ने यह सच कहा कि हमारे पर्यटकों ने 5,000 साल पुरानी भारतीय सभ्यता को असभ्य के रूप में कलंकित कर दिया है। 

शबीना अदीब की यह कविता, कुछ संपादन के बाद, भारतीय पर्यटकों के लिए भी सत्य है। 

परिवार के मुखियाओं का स्वभाव सौम्य होता है। 

आपका रवैया ही बताता है कि आप कितने अमीर हैं। 




LAGTA HAI YE DAULAT NAYI NAYI HAI

                                                    اف یہ ہندوستانی صیا ح 

                                                                                                                   

آجکل میڈیا اور اخبارات میں ہندوستانی سیلانیوں کا مکروہ بھددہ چہرہ دنیا کے سامنے تیزی سے وایرل  ہو رہا ہے اور دنیا میں بدنامی کی وجیہ بھی ہورہا ہے بلند آواز میں گفتگو کرنا ، مال میں معمولی نوعیت کی چوریاں ،کوڑا پھینکنا ،ہوائی جہاز میں جان پہچان والے ساتھیوں کے ساتھ کھانا شیر کرنا ،مسافروں کے ساتھ دھکّا مکی ،اپنے ذاتی موبائل پر فلائٹ میں  زور زور سے میوزک سننا ، لائن توڑنا ،پان کی پیکوں سے ماحول خراب کرنا ،غیر ملکوں کے قوانین توڑنا یہ سب   ہندوستانیوں کی پہچان بن گیا ہے اور اب ایک عجیب خبط ہندوستانی سیاحوں میں پرورش پا رہا ہے ناچ 

ویتنام ائیرپورٹ پر فلائٹ پر سوار ہونے سے پہلے ہندوستانی سیاحوں نے فلائٹ کے ارد گرد  گربے کا پردرشن کیا جو ایک خطرناک  بات ہے 

ہنوئی کی مشهور ٹرین سٹریٹ پر ہندوستانی سیلانیوں نے چھیا چھیا نغمہ  بجا کر پٹریوں پر اپنے   بد صورت فن کا مظاہرہ کر ہندوستان کا سر شرم سے جھکا دیا 

 حال ہی میں نیپال میں ہندوستانی صیاحوں   نے نیپال کی سڑکوں پر اپنی کار کی کھڑکیوں میں اپنے انڈر گارمنٹ گیلے کپڑوں کو سکھانے کا بےشرم مظاہرہ کیا 

اب کیی ملکوں میں ہندوستانی سیلانیوں پر پا بندگی عاید کی جا رہی ہے 

کسی نے سچ کہا کے ٥٠٠٠ سالوں پرانی ہندوستانی تہذیب کو ہمارے سیاحوں نے غیر مہذب ہونے کا کلنک لگا دیا 

شبینہ ادیب کا یہ شیر کچھ ترمیم کے بعد ہندوستانی سیلانیوں پر صادق اتا ہے 

جو خاندانی رئیس ہیں وہ مزاج رکھتے ہیں نرم اپنا 

تمہارا رویہ بتا رہا ہے تمہاری دولت نیی نیی ہے