बुधवार, 30 सितंबर 2026

Khiraje aqeedat

                                   

                                                                  Late Bismilla Shaikh Sir

Date of Birth : 10 /05 /1937  (नंदुरबार )
Deatth           :  22  /09 /2026  (नेरुल नवी मुंबई )
Qualification : BA, MA,BEd From Rizvi College Bandra )
JOB                : 31 वर्ष अंजुमन इस्लाम हाई स्कूल ( teaching English Subject )
फैला के पाँव सोयेंगे तुर्बत में आज हम 
लो अब सफर तमाम हुवा घर क़रीब है 
    ज़िन्दगी के  इत्मेनिनं बख्श ८९ साल गुज़ार कर  २२ सितम्बर २०२६ को बबिस्मिल्ला शैख़ सर, इस फानी  दुनिया से रुखसत हुए। फजर के बाद नेरुल जामे  मसजिद में उनके ३५/४०  साल पुराने शागिर्द (STUDENT ) फ़याज़ प्रकार  सेक्रेटरी नुरुल इस्लाम ट्रस्ट ने, सर की वफ़ात का ऐलान किया। अपने साथ जुड़े रिश्ते का भी ज़िक्र किया के वो अंजुमन इस्लाम में मेरे उस्ताद रह चुके हैं। मेरे पड़ोस में बैठे रफ़ी शैख़  (रिटायर्ड एक्साइज इंस्पेक्टर )ने भी मुझ से कहा के बिस्मिल्ला शैख़ सर ने उनेह भी पढ़ाया है। जाने ऐसे कितने स्टूडेंट्स को मरहूम ने राह दिखाई होंगी। अक्सर ये होता है के रिटायरमेंट के बाद टीचर्स को सिर्फ उनके स्टूडेंट्स ही याद रखते है। लेकिन दुनिया भर के लिए वह बीस्मील्ला शैख़ सर ही थे। ये ऐज़ाज़ बहुत काम लोगों को नसीब होता है। 
       अंजुमन इस्लाम हाई स्कूल में बिस्मिल्ला शैख़ सर का रेप्युटिशन रहा है। स्टूडेंट्स में  वह बड़े मक़बूल थे । ३१ साल अपनी ज़िन्दगी के ,स्कूल के लिए वक़्फ़ कर दिए। उस ज़माने में उनका ज़ियावोद्दीन बुखारी ,दलीप कुमार से मुलाक़ातों का सिलसिला रहता था।सबानी हॉस्टल के लिए सुपरिंटेंडेंट की सर्विसेज भी   मरहूम सर ने दी। 
         1995 रिटायर्ड होने के बाद बिस्मिल्ला सर ने सन्मान होटल के टॉप फ्लोर पर घर खरीदा था। चूँकि मरहूम मेरे हम वतन थे। उनकी पूरी फॅमिली से हमारे क़रीबी रिलेशन हो गए। खालिद एडवोकेट ,साजिद ,असलम और ग़ज़ाला और मरहूम की अहलिया से अक्सर मिलना जुलना होता। मरहूम बिस्मिल्ला सर हमारे बड़े भाई मरहूम सादिक़ अहमद से बहुत उन्सियत रखते थे। मरहूम अब्बास सय्यद साहेब भी उन दोनों के क़रीबी दोस्तों में हुवा करते थे। इतिफाकन तीनो यार नेरुल सेक्टर ४ के कब्रिस्तान में पास पास क़ब्रों में दफ़न हैं । 
         १९९८ में मरकज़े फलाह की बुनियाद राखी गई मरकज़ का ऑफिस कई बरसों मरहूम बिस्मिल्ला सर के घर के नीचे 2nd फ्लोर पर रहा। मरहूम ज़िंदा दिल थे मरकज़ के प्रेजिडेंट  अली एम शम्सी ,भी किसी ज़माने में टीचर रह चुके थे ,मरहूम बिस्मिल्लाह सर से नोक झोंक होती रहती। शम्सी साहेब खानदेश की मशहूर डिश ,हलीम ,गोश्त मांडे की फरमाईश करते और सर बड़े एहतेमाम से हम सब की दावत भी करते। 
         मरकज़े फलाह में मरहूम बिस्मिल्ला सर बुनियाद से जुड़े रहे , vice president ,जॉइंट सेक्रेटरी ,जॉइंट ट्रेझर भी रहे। १० से १२ साल 10th ,12th std के  स्टूडेंट की ट्यूशन क्लासेज भी कामयाबी से कंडक्ट की।अक्सर पुराने स्टूडेंट्स के फ़ोन आते हैं और सर की खैरियत पूछते है। 
         आखरी उम्र में मरहूम बिस्मिल्ला शैख़ सर , उलवा शिफ्ट होगये थे। कमज़ोर होगये थे ,सुनने के लिए कान की मशीन का इस्तेमाल भी  करने लगे थे , फिर भी जुमे की नमाज़ के लिए जुमा मस्जिद नेरुल आते थे। नेरुल से उनेह दिली लगाव था। तद्फीन भी नेरुल क़ब्रस्तान में हुयी। 
          अल्लाह मरहूम बिस्मिल्ला शैख़ की मग़फ़िरत करे।