मंगलवार, 26 मार्च 2024

mere ghar aayi ek nanhi pari

                   




                                     मेरे घर आयी एक नन्हीं परी 

अलहम्दोलीलाह २६ मार्च २०२४ मंगल के रोज़ सिदृरा मुक़म्मल एक साल की होजएंगी। बड़ी दुआओं मन्नतो के बाद   हमारी ज़िन्दगी में आयी है और हम सब की ज़िन्दगी में बहार की तरह दाखिल होगयी है। हम सब को गुल व गुलज़ार कर दिया है। २६ मार्च २०२३ , हिजरी ४ रमजान १४४४ सिदरा की पैदाइश का दिन है। 

                                           इतना तो ज़िन्दगी में किसीका खलल पड़े 

एक साल में माशाल्लाह बड़ी तब्दीलियां उस में आयी है। लेटे लेटे हाथ पाओ मारा करती थी। फिर बैठने लगी। माशाल्लाह अब तेज़ी से बैठे बैठे मुड़ती भी है रेंगती भी है। सलाम करना सीख गयी है। मोमिना की तरह सजदा करती है। कुत्ता, बिल्ली गाय की आवाज़ भी निकालने लगी है। बड़ी साबिर तबियत पायी है। पैदाइश के कुछ महीनों  के बाद कनाडा से हिदुस्तान का हवाई सफर किया। और १० महीने की उम्र में  फिर ,हिंदुस्तान से कनाडा का लम्बा सफर किया। 

                                          जहाँ रहे वो खैरियत के साथ रहे 

                                          उठाये हाथ तो ये एक दुआ याद आयी 

       पहली सालगिरह पर हम नाना नानी उस की हिंदुस्तान में ना मौजूदगी पर कमी महसूस कर रहे हैं। लेकिन दिल से दुआ है के अल्लाह उसे हमेशा तंदुरुस्त ,हँसता खेलता, मुस्कुराता रखे  , अल्लाह सिदृरा को लम्बी उम्र अता करे। दुःख ,तकलीफ की परछाई  भी उसको छू कर न गुज़रे। आमीन 

आमीन सुम्मा आमीन 

  पापा ,मम्मी को दिल की गहराइयों से सिदृरा की पहली सालगिरह पर मुबारकबाद। 



बुधवार, 14 फ़रवरी 2024

sSaheli qalam ke liye

                                                                           سہیلی کالم کے لئے 

                                                      کسی کی منفی تنقید کا جواب آپ کیسے دیتی ہے 

منفی تنقید نتیجہ ہوتی ہے کسی غلط فہمی ،رنجش یا دوسرے کو زق پہچانا -کچھ لوگوں کی تو یہ عادت ہی ہوتی ہے -کبھی کبھی تنقید حقیقت پر بھی مبنی ہو سکتی ہے -میں صبر سے تنقید سن کر تجزیہ کرنے کے بعد غلط فہمی دور کرنے کی کوشش کرتی ہوں -تنقید حقیقت پر مبنی ہو تو اپنے آپ میں تبدیلی لانے کی کوشش بھی کرتی ہوں -نیگیٹو لوگوں سےدوری  رکھنے کی کوشش رہتی ہے جو دوسروں میں خامیوں کی تلاش میں رہتے ہیں

شگفتہ راغب احمد 

نیرول (نوی ممبئی )

٨٦٥٢٤٦٢٥٠٣


सोमवार, 25 दिसंबर 2023

                                                                 मेरी डायरी के एक पन्ना 


सिदरा आयी हुयी है। उसकी मासूम हरकते देख कर दिन ऐसा गुज़रता है पता नहीं चलता। ९ महीने की माशा,अल्लाह हो चुकी है। कायदे से बैठने लगी है ,बात बात में सर हिलती है और ताली भी बजाने लगी है। कभी कभी रोते रोते भी ताली बजाने लगती है। 

                                                               तुम आगये हो नूर आगया है 

लोग हसना भूल गए हैं वह इस लिए नहीं के उनेह हसना नहीं आता ,बल्कि इस लिए के वह हसना नहीं चाहते। सिदरा के साथ १० दिन गुज़ार कर हसने की आदत लौट आयी। शायद उसकी नानी जान ने इन दस दिनों में १ साल के हसने का कोटा पूरा कर लिया। हम दोनों नाना ,नानी का बचपना लौट आया। सिदरा के लिए हम दोनों ने गाया भी ,नाचा भी और ज़ोरदार क़हक़हे भी लगाए। उसकी मासूमियत देख कर दिल उसकी तरफ किछ जाता है। सिदरा अब खड़े रहने की कोशिश भी करती है। रेंगने भी लगी है। अल्लाह अल्लाह बोलने पर आगे पीछे झूमने लगती है।  बहुत काम वक़्फ़ा हम लोगों के साथ गुज़ार कर वह हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा बन गयी। जाते जाते वह एक खला (vacuum ) छोड़ गयी।  अल्लाह उसे सलामत रखे आमीन सुम्मा आमीन। 

       सिदरा के सुनने के लिए लगाए गए बच्चों के गीत लकड़ी की काठी ,नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए ,तीन मोठे हाती घूमने चले ,बन्दर ने खोली दूकान ,ग़ुब्बारे वाला हम को ज़बानी याद होगये। सिदरा के साथ हसींन  लम्हात गुज़ार कर हम अपने आप में नयी ताज़गी महसूस करने लगे हैं। जब वह हम से जुदा हुयी तो मझे  यूँ महसूस हुवा 

वक़्त खुश खुश काटने का मश्वरा देते हुए 

रो पड़ा वो आप ,मुझको हौसला देते हुए 

वो हमें जब तलक नज़र आता रहा ,तकते रहे 

गीली आँखों उखड़े लफ़्ज़ों से दुआ देते हुए 


 

मंगलवार, 12 दिसंबर 2023

Late Haji Sadiq Ahmed

Late Haji Sadiq Ahmed
                                                    लोग अच्छे हैं दिल में उतर जाते हैं 
                                                    एक खराबी है के ,मर जाते हैं 
                                                                
 1946-13th December 2023
आयी किसी की याद तो आंसू निकल पड़े 
आंसू किसी की याद के कितने क़रीब थे 
आज हाजी सादिक़ अहमद (दादा भाई ) को इंतेक़ाल हुए ११ साल का लम्बा वक़्त गुज़र गया है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने पीछे ऐसे नक्श (foot prints)  छोड़ जाते हैं जो कोई मिटा नहीं सकता। 
        मरकज़े फलाह नेरुल माशाल्लाह दादाभाई ने क़ायम की थी। १२ साल इस organisation के सेक्रेटरी भी रहे। २९ दिसंबर २०२३ को अग्रि कोली हॉल नेरुल में मरकज़ की सिल्वर जुबली का प्रोग्राम रखा गया है। sovenier में  उनका ज़िकर किये बग़ैर मरकज़े फलाह की तारीख (history ) मुक़क़म्मिल नहीं होती । अल्हम्दोलीलाह आज भी उनकी लिखी AGM रिपोर्ट्स पढता हूँ ,दादाभाई के ड्राफ्ट किये लेटर्स पड़ता हूँ तो चौंक जाता हूँ। उनेह उर्दू ,अरबी और इंग्लिश ज़बान पर महारत (command ) हासिल थी। पिछले २५ सालों में १००० students मरकज़ से फीस लेकर ज़िन्दगी में सेट हो चुके हैं। अपने ख़ानदान ,मिल्लत और मुल्क का सरमाया (asset )बने हुए हैं। इंशाल्लाह इस कासवाब भी मरहूम सादिक़ अहमद को ज़रूर पहुँचता होगा। 
        २००७ से  क़ुरान की तफ़्सीर का प्रोग्राम, मरहूम सादिक़ अहमद ने किया था। १७  साल बाद भी ये प्रोग्राम  जारी है। दादा भाई के हक़ में सद्क़ये जरिया है। 
        अल्लाह मरहूम दादा भाई को जन्नते फिरदौस में आला मुक़ाम अता करे। 
आमीन सुम्मा आमीन। 
ये भी क्या काम है के उस शख्स ने जाते जाते 
ज़िन्दगी भर के लिए दर्द का रिश्ता छोड़ा 
अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोये 
शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब् रोये 



गुरुवार, 30 नवंबर 2023

khushbu jaise log mile

                                                                       खुशबु जैसे लोग मिले 

खुशबु जैसे लोग मिले कॉलम में आज जिस शख्सियत को मातार्रिफ़ किया जा रहा है वो किसी तार्रुफ़ की मोहताज नहीं। हमारी जनरेशन ने उन से जीने का सलीका सीखा है। 

अल्हाज नईमुद्दीन अलीमुद्दीन शेख़  (नासिक ) के हालते ज़िन्दगी पर सरसरी नज़र डालने की कोशिश की हूँ। कहा जाता है "जो बात दिल से निकलती है असर रखती है "। किस हद तक कामयाब हुवा हूँ अल्लाह बेहतर जनता है। पड़ने वालों की राय का इंतज़ार है। 

रागिब अहमद शैख़ 

inquilab ke liye

                                                                                اوڑھنی کا لم کے لئے 

                                                                        بسیار گفتاری کیوں نقصان دہ ہے ؟

                                                                   قوموں کی حیات انکے تخیل پے ہے موقوف 

بسیار گفتار کی  تین وجوہات ہوتی ہے اپنی بڑھا ی بیان کرنا دوسروں کی کمزوریاں بیان کرکے انہیں نیچا دکھانا دوسروں کے قد کو چھوٹا دکھا کر اپنا قد بڑھانے کی کوشش -پھر یہ جنوں کی شکل اختیار کر لیتا ہے -پوری قوم ملک ،سماج اس بیماری میں مبتلا ہوجاتا ہے -ہم مقصد سے ہٹ جاتے ہیں اور الله کی ناراضگی بھی مول لیتے ہیں -پوری دنیا میں سوشل میڈیا ،وہاٹس اپ ،ٹیلی ویژن خبریں اس کی زندہ  مثالیں ہیں -ہندوستان میں مسلم قوم کو حاشیے پر لانے کی یہ ایک بڑی وجہ  ہے -ہر کویی اس برائی میں ملوث ہے -دل کی گہرایوں توبہ ہی اس مسلے کا حل ہے -

شگفتہ راغب شیخ 

Haji Naeemoddin Alimoddin Shaikh



 
हाजी नईमुद्दीन अलीमुद्दीन शेख़ 
तारीख पैदाइश : 04 /07 /1942  जाये पैदाइश (place of birth ): भुसावल 

धुप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो 
ज़िन्दगी क्या है किताबों से निकल कर देखो 
आज हम ऐसी शख्सियत से आप को मुतारीफ (introduce ) करने जा रहे है जो  ज़िन्दगी की ८० बारिशें ,बहारें ,खिज़ाएं देख चूका है। और अब भी एक तन आवार दरख्त की मानिंद अपने ख़ानदान पर सायए आतेफ़त किये हुवे है। रिश्ते में मेरे भतीजे लगते है लेकिन बचपन से हम उनेह नईम दादा के लक़ब से पुकारते है। नईमुद्दीन अलीमुद्दीन हमारे बड़े अब्बा करीमुद्दीन के पोते और हमारे दादाभाई अलीमुद्दीन के बेटे। 
                                    मेहनत से वो तक़दीर बना लेते हैं अपनी 
                                    वर्से में जिन्हे कोई ख़ज़ाना नहीं मिलता 
     दादाभाई अलीमुद्दीन  (मरहूम )दुनिया  से जल्द रुखसत होगये थे। नईमुद्दीन को अपने दो भाइयों हमीदुद्दिन और जमिलाद्दीन की तालीम और तरबियत और ख़ानदान की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ी ,उनोहने बखुशी सर आँखों पर इस ज़िम्मेदादारी को क़बूल किया । माशाल्लाह हमीदुद्दीन इंजीनियर बने और जमीलोद्दिन  ने भी अच्छी तालीम हासिल की       
       मैट्रिक के बाद अल्हाज नईमुद्दीन ने  जलगाव कोर्ट में स्टेनोग्राफर के पेशे से शुरुवात की। शायद जजों के लम्बे लम्बे फैसले लिखना पसंद नहीं आया, ६ महीने में ऊब गए । बन्दे में दम था , अपनी क़ाबिलियत पर पूरा यक़ीन था। हिंदसों (figure ) से बे इन्तहा इश्क़ था। अपनी कोशिशों जफिशनी से income tax शोबे का इम्तेहान पास किया न कोई सिफारिश थी ,न रहनुमाई ,बल्कि सब कुछ अल्हाज नईमुद्दीन ने अपने बल बुते पर किया। 
                                  मुझको जाना है बहुत आगे हदे परवाज़ से 
       फिर अल्हाज  नईमुद्दीन अपने Department  के इम्तेहानात पास करते रहे और तरक़्की की सीढ़ियां चढ़ते रहे। २००२ में  Assistant Commissioner of Income Tax Nasik के ओहदे से पेंशन याब हुए। 
        हमीदुद्दीन अल्हाज नईमुद्दीन के छोटे भाई ने मुझे बताया के मीट्रिक के बाद दादा ने मुझसे पूछा "क्या करने का इरादा है। अगर ITI करना हो तो नासिक में अवेलेबल है " हमीदुद्दीन ने जवाब दिया उसे Diploma in Mechanical Engineering करना है "। unfortunately नासिक में इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं था।  हमीदुद्दीन ने बताया , मेरी तालीम की दादा को इतनी फिक्र थी कमिशनर के PA से मिल कर उस से धूलिया ट्रांसफर करने की request  की। PA ने पूछा "नासिक तो बड़ी अच्छी जगह है आप धूलिया क्यों ट्रांसफर चाहते हो " दादा ने कहा मेरे भाई की आला तालीम के लिए,  जो नासिक में अवेलेबल नहीं "। और immediate उन्हें धूलिया ट्रांसफर मिल गया। हमीदुद्दीन को धुलिया इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन मिला और  वही से उनोहने अपनी तालीम मुक़्क़मिल की। क्या आज के दौर में ये क़िस्से कहानियों की बातें मालूम नहीं होती ? 
                                उनकी ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए 
       नासिक की विजिट में नईम नईमुद्दीन दादा से पूछा आपकी शादी कब हुयी थी फ़ौरन कहा "६ मार्च १९६६ "। हमारी भाभी ( naseem bano )भी खुश मिज़ाज ,बुर्दबार हैं। माशाल्लाह २००४ में मिया बीवी को हज की सआदत (opportunity ) भी नसीब हुयी।   अल्लाह ने ५ औलादों से नवाज़ा है । मतीन ,तनवीर ,नवेद ,शगूफा और सीमा। अल्हाज नईमुद्दीन ,अपने अलकरम आशियाने (नासिक ) में तमाम औलादों के साथ पुरसुकून ज़िन्दगी गुज़ार रहे है।  
मौत क्या है थकन ख्यालों की 
ज़िन्दगी क्या है दम ब दम चलना 
         शायद  नईमुद्दीन दादा के लिए ये शेर कहा गया हो। आपने अपनी पीराने साली ( old age )के बावजूद। एक  मिशन शुरू किया है। ज़ियादा से ज़ियादा ख़ानदान ,क़ौम के बच्चों को Chartered Accountancy के कोर्स से मुतर्रीफ़  (introduce ) कराना । माशाल्लाह दादा नईमुद्दीन की बातें , हवाई किले नहीं होती। दादा का एक नवासा (ज़ैद ) उनकी  Guidance  और counselling  (रहनुमाई ) से CA बन चूका है। दादा का एक और पोता  (इमाद )और नवासा भी इन कोशिशों में मसरूफ हैं ,इंशाल्लाह कामयाबी उनके क़दम चूमेंगी और वो दोनों ज़रूर CA बनेंगें। 
नासिक उनके घर जा कर मुलाक़ात की थी। मुझ से भी इस सलीस अंदाज़ में CA बनने का तरीक़ा समझाया , मुझे लगा काश ! में भी अपनी तालीम के दौरान दादा से मिला होता तो आज CA होता। 
         अल्हाज नईमुद्दीन की दराज़िये उमर के लिए दूआ है।