गुरुवार, 1 जून 2023

donation from Hina Patel

 इक़रा खानदेश फाउंडेशन के लाइफ मेंबर्स ,ग्रुप मेंबर्स को दील की गहराईओं से सलाम 

नए academic साल की शुरुवात हो चुकी है। रिश्तेदारों को इक़रा खानदेश फाउंडेशन से उम्मीदें वाबिस्ता होगयी हैं। बहुत सारे applications भी हम ट्रस्टीज के पास आ चुके हैं और इक़रा खानदेश फाउंडेशन के अकाउंट में सिर्फ 58000 रूपये बैलेंस हैं। आप सब से मौदेबाना गुज़ारिश है के monthly contribution की रक़म जल्द से जल्द  इक़रा खानदेश फाउंडेशन के अकाउंट में deposit करे। आज तक इक़रा खानदेश फाउंडेशन का रिकॉर्ड रहा है किसी को भी हम ने मायूस नहीं किया। अगर कोई application हमारी पालिसी से मैच नहीं करता हम किसी और ट्रस्ट या इंडिविज्वल से उसे फी की रक़म दिलवाई है। 

अल्हम्दोलीलाह हमारी छोटी साहबज़ादी (हिना मुज़फ्फर पटेल ) जो Canada (कनाडा ) में रहती है इक़रा खानदेश फाउंडेशन के अकाउंट में हमेशा कंट्रीब्यूट करती रहती है। मैं उसे हमेशा इक़रा ख़ानदेश की एक्टिविटीज से अपडेट करता रहता हूँ। अल्हम्दोलीलाह उसने , 3000/00 रूपये इक़रा खानदेश  फाउंडेशन के account में जमा किये हैं। अल्लाह हिना मुज़फ्फर पटेल की कमाई में बरकत आता करे। ज़िन्दगी की तमाम खुशयाँ उसे नसीब हो। 

इक़रा खानदेश फाउंडेशन ने  तमाम रिश्तेदारों को एक डोर में बांधा है। आज तक १६३ बच्चों को २ साल में ७५३,००० रूपये स्कालरशिप अदा की है। ख़ुशी की बात है ये अमाउंट डोनेशन के तौर हमारे पास जमा हुवा है। ज़कात के पैसे हम ने अभी तक नहीं लिए है। इतने कम अरसे में एक मज़बूत संस्था की बुनियाद एक खवाब की तरह नज़र  आता है। 

बुलन्दियों पर पहुंचना कोई कमाल नहीं 

बुलंदियों पर ठहरना कमाल होता है 

रिश्तेदारों के बच्चों के रोशन मुस्तकबिल की खातिर इस तंज़ीम से जुड़े रहे। ज़रूरतमंद बच्चों के एप्लीकेशन भी हम तक पहुंचाते रहे।  अपने कंट्रीब्यूशन भी इक़रा खानदेश के लिए करते रहे। 

प्रेजिडेंट 

इक़रा  फाउंडेशन 


गुरुवार, 18 मई 2023

CARRIER GUIDENCE PROGRAMME

 अस्सलाम अलैकुम 

अल्हम्दोलीलाह मोहिब शैख़ ,ज़ाहिद शैख़ ,डॉ वकील ,इरफ़ान शैख़ साहेब की कोशिशों से 10th और 12th में Appear होने वाले रिश्तेदारों के स्टूडेंट्स के लिए carrier guidance का online session आज रात ०९:३० बजे गूगल मीट पर फ्री रखा गया है। 

ज़िन्दगी में सही दिशा मिलने पर आप ज़रूर कामयाब होंगे । counselling करने वाले हज़रात स्टूडेंट्स की नफ़सियात से वाक़िफ़ होते हैं। carrier का इंतेखाब करना भी एक मुश्किल मरहला होता है। कुवां प्यासे के पास आ रहा है। आप इस सेशन का भरपूर फायदा उठाये। स्टूडेंट्स के वालेदैन से आजिज़ाना गुज़ारिश है ,आप सब इस online carrier guidance सेशन में अपने बच्चों के साथ ज़ियादा से ज़ियादा तादाद में शरीक होकर सेशन को कामयाब बनाये ,ताके organizers  की हिम्मत अफ़ज़ाई हो और वो आईन्दा  तरह के प्रोग्रामर्स organize करते रहे। 

शुक्रवार, 5 मई 2023

KADU MIYA BUDAN SAHEB


                                                                      कडु मिया बुढ़न साहेब 

पैदाइश :१९३२         इन्तेक़ाल : 23rd March 2023 

क्या लोग थे जो राहे वफ़ा से गुज़र गए 

जी चाहता है नक़्शे क़दम चूमते चले 

चाँद रात को कडु मिया दादाभाई का इंतेक़ाल हुवा ,गल्फ और अमेरिका में रमजान की शुरवात हो चुकी थी 

९० साल की तवील उम्र पायी। एक भीड़ उमड़ पड़ी थी जनाज़े में ,और ददफीन के वक़्त। जो उनके हर दिल अज़ीज़ और जन्नती होने की बशारत थी। परवेज़ /ऐजाज़ सैयद जनाज़े में शरीक थे। उनोहने बताया तद्फीन के बाद मौलाना ने मरहूम कडु मिया दादा भाई  की सवानेह,किरदार  पर रौशनी डाली उनके हुसन सुलूक की तारीफ़  बयां की। उनको लोगों /रिश्तेदारों को जोड़ने वाला बताया। 

अल्लाह के रसूल (SA ) ने ऐसे शख्स को जन्नत की बशारत दी ,जो अपने दिल में किसी के लिए बुग़ज़ ,कीना नहीं रखता। मरहूम कडु मिया दादाभाई में ये खूबी कूट कूट कर भरी थी। हर किसी की खूबियों पर नज़र रखते थे और कमज़ोरियों और ग़लतियों को नज़र अंदाज़ करते थे 

हमारे वालिद मरहूम हाजी क़मरुद्दीन से मरहूम दादाभाई को वालेहाना अक़ीदत थी। हम सब भाइयों पर तालीम के उन्वान पर शफ़क़त रखते थे। जलगांव डेपो जब भी उनकी ड्यूटी एस टी पर लगती ,वक़्त निकाल कर ज़रूर मरहूम वालिद साहेब से मिलने कटियाफाईल जलगांव के मकान पर तशरीफ़ लाते ,अब्बा को मामूजान कह कर मुखातिब किया करते। 

हमारे ससुर मरहूम ज़ैनुलआबेदीन साहेब से बहुत कुर्बत थी। शहादा में उनका ट्रांसफर हुवा उस्वक़्त दोनों खानदानो का करीबी ताल्लुक़ रहा। हमारी सास (खुश दामन ) मरहूमा अनीस खातून से ,मरहूम कडु मियां दादाभाई बहन का  रिश्ता लगाते थे। इत्तेफ़ाक़ की बात है मेरी ज़ौजा (wife ) शगुफ्ता का  उर्दू स्कूल शहादा में , दाखला मरहूम कडु मिया दादा भाई ने करवाया था। 

बस्ती बसना खेल नहीं है बस्ती बस्ते बस्ती है 

अपनी कामयाब ज़िन्दगी में मरहूम कडु मियां दादाभाई ने बेशुमार नेकियां की। सब से बड़ा कारनमा लोगो को  कम क़ीमत में  सर पर छत मुहैया करना । मरहूम ने कामगार हाउसिंग सोसाइटी के नाम से धुलिया के ग़रीब मुसलमानों के लिए कॉलोनी की बुनियाद रखी ,अब ये हज़ार खोली के नाम से जानी जाती है। इस सोसाइटी के मरहूम २५ साल,  माशाल्लाह डायरेक्टर भी रहे। तकरीबन १५ से २० रिश्तेदारों को कम क़ीमत पर इस सोसाइटी में घर भी दिलवाया। हमारे ससुर मरहूम ज़ैनुलआबेदीन साहेब को भी इस सोसाइटी में मकान दिलवाया था। 

उस शख्स की तर्कियों का सबब जान जायेंगा 

उस आदमी के पाँव के छाले तलाश कर 

२६ सितम्बर २०२१ इक़रा खानदेश फाउंडेशन की जानिब से ,स्कूल /कॉलेज में नुमाया कामयाबी हासिल करने वालो स्टूडेंट्स के लिए तहनियति प्रोग्राम, हकम हॉल धुलिया में रखा गया था। मरहूम कडु मियां दादा भाई को पहले "Life Time  Achievement Award " से नवाज़ा गया ,ट्रॉफी ,शाल और गुलदस्ता दिया गया था । मेरी खुश नसीबी ,मैं भी इस प्रोग्रम में नफ़्स ब नफीस मौजूद था और उनेह शॉल तोहफे में दी थी। मरहूम बहुत जज़्बाती हो गए थे। प्रोग्राम के कन्वेयर नियाज़ अहमद ने बताया ,मैं ने अब्बा से पूछा "प्रोग्राम में कितना वक़्त बोलेंगे " अब्बा ने जवाब दिया "कितना वक़्त देंगा " तमाम महफ़िल गुलो गुलज़ार होगयी थी। ८८ साल की उम्र में हाफ़िज़ा सही था,लहजा दमदार था । अपनी बात और दुआ से महफ़िल को अश्क ज़ार कर दिया था । उनका नाम कडु मिया क्यों रखा गया हालिंके वो इतने मीठे है। उनोहने कहा उस ज़माने का trend था। वही पता चला किस तरह मरहूम बहादरपुर से पैदल चल कर धुलिया आते थे। अपनी मेहनत और कोशिशों से उन्हने trainer और फिर controller की पोस्ट तक तरक़्की हासिल की। तास्सुरात में लोगो ने बताया के मरहूम कडु मियां दादाभाई की बदौलत कई लोगों,रिश्तेदारों को एस.टी में जॉब मिल था। मरहूम अरसे तक S.T यूनियन के प्रेजिडेंट भी रहे। आखिर में मरहूम ने रिक़्क़त अमेज़ दुआ मांगी। खास कर इक़रा खानदेश फाउंडेशन के के लिए रो रो कर दुआ मांगी। 

बिछड़ा कुछ इस अदा से के रुत ही बदल गयी 

एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया 

कामयाबी ये नहीं है के आप ने कितनी दौलत छोड़ी। कामयाबी ये है के आप के बाद भी लोग आप को कैसे याद करते  हैं। आप की औलाद कैसी है? माशाल्लाह मरहूम कडु मियां दादा भाई भरपूर ज़िन्दगी गुज़ार कर कर गए। तीन नेक बेटे ,चार बेटियां और पोते ,नवासे ,निवासियों को बेहतरीन तरबीयत दे कर दुनिया से रुखसत हुए। 

अल्लाह मरहूम कडु मियां दादाभाई को जन्नत फिरदौस में आला मक़ाम अता करे आमीन ,सुम्मा आमीन। 


सोमवार, 1 मई 2023

Khushbu jaise log mile

आज खुशबु जैसे लोग मिले कॉलम के तहत जलगाँव एंड रिलेटिव्स के एडमिन , इक़रा खानदेश फाउंडेशन का Utube भी उनोहने बनाया था ,जवांसाल सय्यद मोहिब मुजाहिद सर ,जो जॉब के सिलसिले में बहरीन में मुक़ीम हैं। और आज इत्तिफ़ाक़न (2nd May ) उनका जनम दिन भी है, के संग रूबरू गुफ्तगू पेश की जा रही है। मोहिब सैय्यद ने बहुत कम वक़्फ़े में बहुत तर्रकी की है। हम चाहते है के रिश्तेदारों के स्टूडेंट्स उनके तजुर्बात से सीखे ,सबक़ हासिल करे। 

बुधवार, 12 अप्रैल 2023

 आपने भेजा है जो तोहफा मुझे  रमज़ान का 

महीना है ये रोज़ों का रेहमान का 

पूरी करे अल्लाह आप की हर ख्वाहिश 

ये दुआँ है मेरी तोहफा समझ लो रमज़ान का 


गुरुवार, 23 मार्च 2023

badi mushkil se hota hai chaman me dedawar paida

بڑی مشکل سے ہوتا ہے چمن میں دیداور پیدا 

١٩٧٥-١٩٧٧ کی بیچ سے مہاراشٹر کالج سے بی ایس سی کی پڑھائی کی جو مہاراشٹر کالج کا سنہری دور تھا -میٹھا والا ،پرنسپل منشی ،کوکشیوالا  ،،پروفیسر مالوستے ،پروفیسر جاوید سر کالج کے روح رواں ہوا کرتے -مہاراشٹرا کالج میں ان دنو ہمیشہ گہما گہمی رہا کرتی -مہاراشٹرا چیف منسٹر ایس بی چوان ،کشمیر کے وزیر آلہ شیر کشمیر عبدللہ ،رفیق زکریا جیسے معروف سیاست داانو کی آمد تو ہوتی تھی -ادبی محفلیں ،مشا ارے ،شام طنز مزاح ،شام افسانہ کی گرم گرم محفلیں منعقد ہوتی -فیض احمد فیض ،کرشن چندر خواجہ احمد عبّاس ،عصمت چغتائی ان محفلوں میں شریک ہوتے اور پروفیسر جاوید ان پروگرام کی خوبصورت  نظامت کرتے 

مجھے یاد ہے ال شےندڑ تھیٹر میں انگلش فلموں کی نمایش ہوتی تھی اور تھیٹر پر اردو ترجمے کے ساتھ عریاں پوسترر بھی ڈسپلے کے جاتے تھے -جاوید سر اور منشی سر ان پوسٹرز کو نکلوانے میں پیش پیش رہا کرتے تھے -

کالج انول دے میں امجد خان ،جاوید اختر ،بلراج سہنی کو میں نے شریک ہوتے دیکھا تھا -جاوید سر منشی کا اینا رسوخ تھا -

جاوید سر میتھس کے پروفیسر تھے بدی سلیس انداز میں وہ پڑھاتے تھے -انکا ایک جملہ بھولیے نہیں بھولتا "زبان سے نکلی بات کمان سے نکلا تیر کبھی واپس نہیں آتے اس لئے سنبھال کر گفتگو کرنی چاہیے 

پروفیسر جاوید سر  نے دو بار گوونڈی ،چیتا کیمپ سے الیکشن بھری اکثریت سے جیتا -مہاراشٹرا کیبنٹ مے وزیر تعلیم بھی رہے -انتقال سے پہلے پہلے ممبئی نیی ممبئی میں کوللیجو اسکولوں کا جال بھی بچھا کر گئے 

میری بیٹی ثنا کو سٹرلنگ کالج ایم بی اے  میں داخلے کے وقت ان سے ملاقات کی تھی حیرت ہے انو ہونے مجھے ٣٥ سال کے بعد بھی پہچان لیا مہذب لہجے مے کہا "غالیبن تم میرے طالب علم رہ چکے ہو "

پروفیسر جاوید سر نے ہم جیسے  نہ جانے کتنے قوم کے بچوں کا کریر روشن کنے میں مدد کی ہوگی -

الله انکو اپنی جوارے  رحمت میں جگه عطا کرے انکے درجات بلند کرے آمین 

منوں متی کے نیچے دب گیا وہ 

ہمارے دل سے لیکن کب گیا وہ 

मंगलवार, 3 जनवरी 2023