सोमवार, 6 अप्रैल 2020

एक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया

एक सूरज था सितारों के घराने से उठा।
आंख हैरान क्या शख्स ज़माने से उठा। 
५ साल का लम्बा वक़्त देखते देखते गुज़र गया। आज ही के दिन ७ अप्रैल  २०१५ को अल्हाज ज़ैनुल-आबेदीन सय्यद हम से जुदा होकर ख़ालिक़े हक़ीक़ी अल्लाह से जा मिले थे। अल्लाह उन की मग़फ़िरत करे ,कर्वट कर्वट जन्नत नसीब करें। 
वक़्त रुकता नहीं टिक कर ,ज़माना अपनी रफ़्तार से आगे बढ़ता रहता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं भूलाते नहीं भूलते। उन से जुङी यादें ,उन के साथ गुज़ारा वक़्त ,अनमोल ख़ज़ाने की तरह हमारी ज़िन्दगी का सरमाया बन जाता है। 
 ३० मई १९८२ में उनहो ने मुझे अपना दामाद बना कर इज़्ज़त बख्शी, अपनी फूल सी लख्ते जिगर मेरे हवाले कर दी ये जानते हुवे ,उस ज़माने में न मेरे पास घर था ,न अछि नौकरी लेकिन वो हमारे अब्बा की बहुत कदर करते थे जो रिश्ते में उनके बहनवायी होते थे। उनका favorite topic था अपनी क़ौम में तालीम की कमी ,वो हम सब भाइयों को तालीम हासिल करते देख दिल से खुश होते थे। मेरी तर्रकी देख कर वो खुश होते थे ,दिल से दुआयें देते थे। अपनी नवासियों
सना ,हिना की तालीम का ज़िक्र जब करते बहुत जज़्बाती होजाते। काश आज वो हयात होते अपनी दोनों निवासियों की तर्रकी की देख कर वो फूले नहीं समाते। 
  शगुफ्ता से सुना है उनेह समाज में शहादे में सब लोग सय्यद साहेब चाय वालों के नाम से जानते थे। और वो अपने ख़ानदान के साथ साथ शाहाना जिंदिगी गुज़रते थे। लोग उनसे मश्वरे लेते और उन पर अमल भी करते थे।  उनका हाथ बहुत खुला था गरीबो मिस्कीनों की मदद में हमेशा आगे आगे रहते।  उनका दोस्तों का दायरा संजीदा लोगो पर मुश्तमिल था। में भी उनके दोस्तों से मिल चूका हूँ। शायरी अदब तहज़ीब से उनेह रग़बत थी। माशाल्लाह नफासत पसंद थे। अपने वालिद से बे पनाह मोहब्बत थी हर हफ्ते छुट्टि के दिन तमाम मसरूफियतों को छोड़ कर नवापुर वालिद से मिलने ज़रूर जाते। पड़ने का बहुत शौक़ था अपने घर पर अदबी किताबों की  liberary बना रखी थी। खुशकिस्मत भी थे उनेह सुघड़
 तहज़ीब याफ्ता बीवी का साथ मिला था जिस ने उनके घर को जन्नत बना रखा था , मरहूमा अपनी तमाम खूबियां अपनी औलाद में मन्तक़िल कर गयी। मामूजान ने अपनी तमाम जिंदिगी हलाल रिज़्क़ कमाने में गुज़र दी। जो कमाया अपने औलाद की तालीम पर खर्च किया। सोच समझ कर इन्वेस्टमेंट किया ,और अल्लाह ने उस में बरकत भी दी। नेक औलाद दी ,जो उनके बताये उसूलों पर ज़िन्दगी गुज़ार रही है।
 हदीस में आता है  मरहूम माँ बाप तक सिर्फ औलाद की दुवायें नेक आमाल पहुँचते है और जन्नत में उनके दरजात बुलुंद होते हैं।  में उनके लिए क़ुरान पढ़ कर बख्श रहा हूँ ,ख़ानदान के हर आदमी से गुज़ारिश है के उनकी मग़फ़ेरत के लिए दुवाएँ करे ,उनके के लिए सदक़ा करे ,शबे बारात आने वाली जुमरात को है उनके लिए दुवाओँ का खास एहतेमाम करे।











गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

Carfew ka 8th din (01/04/2020

न गुल खिले न उनसे मिले न मए पी है
अजीब रंग में अबके बहार गुज़री है
आज १  अप्रिल २०२० government के नाफ़िज़ करदा  करोना के रोक थाम के लिए carfew का अठवा दिन। दीनों ,तारिख की पहचान भी मुश्किल हो गयी है। काश हर दिन का एक रंग होता पहचान आसान होजाती। एक जमाना था महीने की पहली तारीख़ को लोगों को तनख्वाह मिलती थी ,और रेडियो से किशोर कुमार का ”आज पहली तारिख है ” गाना बजना ज़रूरी था। लोग जान लेते नए महीने की शरुआत होगयी। आज अप्रैल फूल day है लेकिन गवर्नमेंट के सख्त रूल के किसी किस्म की झूटी खबर फैलाने पर सख़त रोक है। झूठि खबर फैलाने पर सज़ा भी हो सकती है। 

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

Carfew 28th March

आज government के declare किये कर्फू का 4th दिन है। हर तरफ ख़ामोशी छायीं है। सीर्फ परिंदों के चहचहाने का शोर सुनाई पढ रहा है। अब लग रहा है  क्या हम कभी आज़ादी से घूमे फिरे भी थे? न बच्चों के खेलने का शोर सुनाई देता है न दुकाने खुली हैं न कारों ,रिक्शा ,बसों और ट्रैनो का शोर है। आज ये बात  साबित (prove )होगयी के ज़िन्दगी इन चीज़ों के बग़ैर भी गुज़र सकती है। अगर फ़ोन internet की सेवाएं भी बंद कर दी जाये तो क्या हम ज़िंदा नहीं रह पायेँगे? काश्मीरी लोगों  ने इन्ही सख्त हालत में ७ महीने गुज़ारें हैं। इंसान वक़्त और हालात के मुताबिक़ अपने आप हो ढाल लेता है। तरक़्क़ी करते करते हम २१ वि शताब्दी में पहुँच चुके हैं। लेकिन कुदरत (nature ) की एक मार ने हमें फिर हज़ारों साल पहले की ज़िंदगी में धकेल दिया है, जब इंसान जंगलों में ज़िन्दगी गुज़रता था और सब से करीब उसकी बीवी बच्चें ख़ानदान हुवा करता था। हवा।,पानी ,खाने पीने के सिवा उसे किसी चीज़ की ज़रुरत नहीं थी और वो इन बातों से पूरी तरह संतुष्ट भी था।
   कल से carfew की वजह से एक बड़ी समस्या कड़ी हो गयी है हज़ारों लोग शहर से गाँव की तरफ लौट रहें हैं। कर्फू में शहेर में न खाना पीना मिल रहा हैं न काम। मुश्किल ये है के transport न होने की बिना पर ये लोग पैदल ही कई कई सौ किलोमीटर का सफर (journey )कर रहे है। ये करोना की रोक थाम में मुश्किलें खड़ी कर सकता हैं। लेकिन ये इन लोगों की मजबूरी है। एक तरफ खायी है दूसरी तरफ कुआं।


शनिवार, 21 मार्च 2020

Artificial intelligence

Maximum city मुंबई में अब तक मनसुखलाल को अपनी धर्म पत्नी के बिछड़ने का इतना एहसास नहीं हुवा था। लम्बी चौड़ी दोस्तों की मण्डली ने इस कमी को पूरा कर दिया था, हालाँकि उस के दोनों लड़के फॅमिली के साथ canada में shift होगये थे।
अचानक PMC बैंक बंद होजाने पर उसे अपनी पूंजी के डूब जाने के ग़म ने उसके हर ग़म को ताज़ा कर दिया। मानो किसी ने उसके ज़ख्म कुरेद दिए हो। शिदत से उसे अपनी तन्हाई का एहसास होने लगा। दोस्तों की ठहाके मारती महफिलें उसे सुनी सुनी लगने लगी। हर चीज़ का डर उसे सताने लगा। जिंदिगी अजीरन सी लगने लगी। अनजाने खौफ ने उसे चरों तरफ से घेर लिया Global warming news पड़ कर उस का दम घुटने लगता। उसे लगता समंदर बहुत जल्द शहर को डुबो देंगा  ,महारष्ट्र ,election के प्रति सरकार नहीं बन पाती ,वो अपने आप को ज़िम्मेदार ठहराता  ,हर बुरा समाचार जो न्यूज़ पेपर में publish होता ,TV  पर दिखाया जाता या social media पर viral होता ,किसी न किसी तरह से अपने आप से जोड़ लेता  उम्मीद की हलकी किरन भी उसे नज़र नहीं आती। 
          एकदिन morning walk पर उसे जगह जगह स्टैंड पर नयी नई सायकलें दिखयी पड़ी। उसके शहर में ये नया developement था। उसे पता चला के yulu application अपने मोबाइल पर download करके ये सायकलें किराये पर मिल सकती हैं। न जाने क्यों मनसुखलाल का दिल इन सयकलों की जानिब खींचने लगा। बचपन की यादें ताज़ा होगयीं। लेकिन उसे smart phone होना लाज़मी था। फ़ोन पर internet होना भी ज़रूरी था। ये मालूमात मिलने पर उसे एक thrill का एहसास हुवा। लेकिन इस उम्र में ये सब करने के लिए मनसुखलाल को हिम्मत जुटानी पड़ी। smart phone खरीद कर उसे एक दबी दबी ख़ुशी मिली। फिर internet facility अपने मोबाइल मिलाने के प्रति उसे दूसरी ख़ुशी मिली। देखते देखते सोशल मीडिया पर active होगया। अपने mobile पर yulu का applicatio load करने में उसे कई दिन लग गए। application पर पैसे डालने में उसे पसीने छूठ गए। और finally एक दिन सुबह सुबह मनसुखलाल
सायकल का lock खोलने stand पर पहुँच गया। उसे घबराहट और ख़ुशी की feeling होने लगी। लॉक खोलने में उसे
कई घंटे लग गए। lock खोलने पर उसे लगा उसनें हिमालय चोटी पर चढ़ाई कर ली हो। lock खुलने पर सालो बाद सायकल चलाने पर उसे अजीब फीलिंग होने लगी। trip पूरी करने प्रति स्टैंड पर सायकल कड़ी करने के पश्चात् उसे मैसेज yulu की तरफ से मिला उसने कितने समय सायकल चलायी ,कितनी caleries कम  होई। कितना carbon 
बचाया। मनसुखलाल से पूछा गया सायकल में कोई खराबी तो नहीं। उसे ये सब पढ़ कर ख़ुशी का एहसास हुवा। जिंदिगी में नयी ताज़गी ,energy महसूस हुवी। हर दिन सायकल चलाने के प्रति वो शिकायत yulu application पर लोड करता। सायकल के ब्रेक काम नहीं कर रहे। उसे जवाब मिलता सायकल repair कर दी गयी।  इतनी आज्ञा का पालन ,मनसुखलाल खुश होजाता ,आज तक मेरे बच्चोँ ने भी इतना आज्ञा का पालन नहीं किया ,वो सोचने लगता। सायकल गनदी होने पर शिकायत करने पर जवाब आता ,सायकल साफ़ कर दी गयी है। और उसका उस दिन का किराया सही शिकायत करने पर माफ़ कर दिया गया है।
मनसुखलाल को yulu  साइकल और application से एक अपनायत का अहसास होने लगा। 
     सायकल पर रोज़ाना घूमते हुवे मनसुखलाल से पेपर ,दूध deliver करने वालों से जान पहचान होगयी। सुबह सवेरे
स्कूल buses की गहमा गहमी रहती। मस्जिद से नमाज़ से निकलते लोग दिखयी पड़ते। मंदिरों से अगरबत्ती की भीनी
भीनी खुशबु  से उसकी रूह महक उठती। मंदिर के दवार पर थोड़ी देर ठहर कर वो सर झुका देता। पुरे शहर का सायककल पर चक्कर लगाते लगाते उसे अपने शहर से एक मानूसियत  (aattachment )हो गयी। अब वो  गार्डन के  सामने से गुज़र रहा है,लोग walk कर रहे थे वर्ज़िश कर रहे हैं। थोड़ी दूरी पर आगे reliance का supermarket खुल चूका था लोग दूध ,bread की खरीदारी कर रहे हैं।  कुछ  दिनों में वो हर चीज़ से मानुस होगया। दोस्तों के साथ उठने बैठने लगा। ज़िन्दगी फिर से पटरी पर लौट आयी।
  एक दिन अचानक दोपहर में सोते हुवे खौफनाक सपना देख कर  मनसुखलाल पसीने में भीग गया। घबरा कर वो उठ बैठा। बचपन  में उस ने एक कहानी पड़ी थी। सपना उस से मिलता जुलता था। नींद से जागने के पश्चात् भी मनसुखलाल को सपने को जगीआँखों से देखता लगा। तीसरी महायुद्ध के पश्चात् विश्व की तबाही एक  भी मनुष्य नहीं बचा ,लेकिन रोबोट अब भी घरों में नाश्ता तैयार कर रहे हैं।बच्चों को स्कूल के लिए जगा रहे है ,खाना बना रहे हैं , बर्तन धो रहैं हैं। सब काम समय पर हो रहे हैं। उस ने तरुंत कनाडा कॉल किया उंसे उसके बचे उसे कनाडा बुला रहे थे। मनसुखलाल ने बच्चों  से अपना टिकट बुक करने के लिए कहा। ये भी पूछा के क्या युलु सायकल वहां अवेलेबल है। अगर नहीं तो उसके पहुंचने से पहले नयी सायकल खरीद कर रख ली जाये।
















































सोमवार, 16 मार्च 2020

dil ke zakhmon ko Chuwa hai Tere galon ki trah

१५ फेब्रुअरी २०२० सनीचर के दिन मेरा left hernia का operation apollo hospital में होना तै पाया। एक हफ्ता पहले dr नितिन झावर से मुलाक़ात की थी उनोह ने चेक करने के प्रती ऑपरेशन करने की सलाह दी। कुछ शख्सियतें इतनी डैशिंग होती हैं ,उनसे मिलने के बाद इंसान मरऊब( impress )हुवे बिना नहीं रह सकता। ये dr नितिन झावर से पहली मुलाक़ात थी ,और किसी ने उनका reference भी नहीं दिया था। लेकिन डॉ झावर की खुद ऐतेमादि (self confidence ) को देख कर impress हुवे बिना न रह सका। Dr .झावर ने अपनी सेहत पर खास ख्याल रखा है। लिबास में भी खुश असलूबीका फन नज़र आया। सूट टाइ पहन कर उनकी शख्सियत (personality ) निखार जाती है। में ने उसी समय सोच लिया के उनिह से operation करवाना है।
  १५ feb २०२० दोपहर २ बजे से शाम ५ बजे के दरमियान ऑपरेशन मुकम्मल होगया। DR झावर की महारात (expertise ) पर यक़ीन आगया। होश आने पर यक़ीन नहीं होता था के ऑपरेशन होगया है। क्या डॉ झावर ने surgical instruments की बजाये फूलों की पंखड़ियों से मेरी surgery की। 
 आप को डॉ झावर से मुलाक़ात करनी हो तो apollo hospital नेरुल में सुबह OPD में मिला जा सकता है। मेरी राय उनके बारे में 
उन से ज़रूर मिलना सलीक़े के लोग हैं


शनिवार, 20 जुलाई 2019

Statue of unity





दुनियां का सब से ऊँचा मुजस्मा जो भारत के सब से पहले home minister वल्ल्भ भाई पटेल का है गुजरात के केवाडिया मुक़ाम पर है जिस की ऊंचाई १८२ मीटर्स है सिर्फ ४२ महीनो में तैयार किया गया। बरोड़ा से १०० किलो मीटर की दूरी पर है। कार से २.५ घंटे का सफर करना होता है। कईं किलो मीटर की दूरी से मजसमे की झल्कियाँ नज़र आनी शुरू होजाती है। मुजसमे की विजिट के लिए ७५० रूपये चार्ज किये जाते हैं। ऑनलाइन बुकिंग की facility भी available है। .मुजसमे की visit के साथ साथ बस की ride भी फ्री है जो narmada dam की सैर के लिए availale होती है। मुजसमे के सीने ११० मीटर्स तक लिफ्ट से जाया जा सकता है। मुजसमे के नीचे खबसूरत museam बनाया गया है जहाँ video के ज़रिये वल्लभ भाई पटेल के हालाते ज़िंदगी पर रौशनी डाली जाती है। जगह जगह free guides अवेलेबल है।




रविवार, 28 अप्रैल 2019

फरहीन (रौशनी) का निकाह

मुबाशिर का मतलब होता है खुश्ख़बरी सुनाने वाला और फरहीन का मतलब (खुश) और उस का दूसरा नाम है रौशनी यानि लाइट। दोनों का निकाह आज २६ अप्रैल २०१९ को खुश असलूबी से मुकम्मिल हुवा। मुझे यक़ीन है मुबाशिर फरहीन को हमेशा खुश रखेगा। मुबाशिर भी रिश्ते में हमारा नवासा ही हुवा। वो हमारे बड़े भाई बुध्या दादा का नवासा है। अल्हम्दोलीलाह करीबी रिश्तेदारी होने की वजह से दिली इत्मीनान होता है के लड़की अपनों ही में बियाही जा रही है।
   हालाँकि फरहीन हमारी नवासी है। लेकिन बचपन ही से मुझे  उस से लगाव रहा है दिली उन्सियत  रही है। उस ने भी जिस मेंहनत जिस लगन से graduation किया है , काबीले तारीफ है। मुफिजा और मुजाहिद भी मुबारकबाद के मुस्तहिक़ है के उनोह ने फरहीन की तालीम व तरबियत में दिलो जान से उस की मदद की। फरहीन ने १० वी जमात ही से अपनी तालीम के साथ साथ अड़ोस पड़ोस के ज़रूरत मंद बच्चों से मामूली ट्यूशन फीस ले कर उनेह सिखाया पढ़ाया। अपनी studies के अखराजात पूरी करती रही। आज भी माशाल्लाह २५ गरीब घरानों के बच्चे उस के पास  tuition के लिए आतें हैं और वो उनेह मेंहनत से पढ़ाती  है। मुझे अपने वालिद मारहुँम हाजी क़मरुद्दीन की याद ताज़ा हो गयी जिनोह्  ने काटिया फ़ैल में मामूली फीस ले कर tuition classes शुरू की थी और कई ज़रुरत मन्द  ग़रीब मुस्लिम बच्चों के रोशान मुस्तकबिल की बुनियाद रखी थी। 
  ख़ुशी इस बात की है के हम सब मॉमू मुमानियों ,भांजे भांजियों ,भतीजे ,भतीजियों ने  मुफिजा के इस शादी के फ़र्ज को अदा करने के लिए माली  इमदाद (financial help ) फ़राहम की। अल्लाह सब मदद करने वालों के रिज़्क़ में बरकत दे। उन सब की परेशानियां दूर करें आमीन सुमा आमीन। ज़ाहिद अली का शुक्र गुज़ार हूँ के बीमारी कमज़ोरी के बावजूद अपने आप को इस काम के लिए वक़्फ़ कर दिया। जिस खुश असलूबी से उस ने दावत का इंतज़ाम  किया,जहेज़ जमा किया कबीले सताइश है। आबिदा ,शाहीन ,उज़ैर ,उमेर और मोहिब ने भी अपना किरदार बेहतरीन तरीके से अंजाम दिया दिन रात मेहनत की और प्रोग्राम को कामियाब बानने में मदद की। 
  मेरी जानिब से तमाम मेहमानान का शुक्रिया के इस रस्म निकाह में शिरकत की और programme  को कामयाब बनाया।