बुधवार, 15 नवंबर 2023

                               ये तहरीर मुझे तहरीम की हल्दी की रस्म के दिन पढ़नी थी 

१५ नवंबर २०२३ बमुताबिक़ १ जमादि उल अव्वल तहरीम की शादी की दावत हम दोनों (शगुफ्ता और मुझे ) को तवील अरसे पहले मिल चुकी थी। और में ने अपनी डायरी में नोट भी कर लिया था। आठ रोज़ पहले साइमा और खालिद ने याद दहानी कराई। साइमा ने ज़ोर दे कर कहा "भाई जान शादी में शरीक होंगे, तो  शादी को चार चाँद लग जायेंगे। में ने उससे कहा "मेरी आँखों में भी चार चाँद लग लग गए हैं, मोती बिंदु (cataract ) के ऑपरेशन के बाद दोनों आँखों में लेंस लग गए हैं और ५० साल पुराना चश्मा भी छूट गया है "फिर ख्याल आया डॉ ने मुझे कुछ रोज़ सफर के लिए मना किया है। बाकायदगी से दवा डालनी होंगी। सोचा मैं नहीं जावूंगा तो मेरा छोटा भाई खालिद नाराज़ होजाएंगा । उसकी नाराज़गी बर्दाश्त कर लूंगा। बहन साइमा की नाराज़गी का क्या करूँगा सोचा उसे भी मना लूंगा। लेकिन कुछ रिश्ते अजीब होते हैं। तहरीम से दो रिश्तों से जुड़ा हूँ वो भांजी भी है और भतीजी भी। फिर शादी में आने का फैसला कर ही लिया। 

जलगांव ,एरंडोल ,नवापुर ,भड़भूँजा जाने के बहाने ढूंढ़ता रहता हूँ। में नहीं ढूंढ़ता बहाने मुझे ढूंढ लेते हैं। क्यूंकि मुन्नी में मुझे गोरी मुमानी दिखाई देती है, सबीना में मुमानी अम्मा ,साजिद /खालिद में खालू जान ,अज़हरुद्दीन में दूल्हे मामू ,ज़की में गोरे मामू। हम चारो भाइयों को ननिहाल से अक़ीदत की हद तक क़ुरबत रही है। मामू,मुमनिया ,ख़ालाये , खालू भरा पूरा ख़ानदान  था। अम्माँ की वफ़ात के बाद सभी हम पर ,बे इन्तहा शफ़क़त ,मोहब्बत ,इनायतें और करम निछावर करते रहें। धीरे धीरे सब  हम से बिछड़ गए। सेहरा में नखलिस्तान की तरह एक निशान बचा है खाला जान में. उनेह करुणानिधि कहता हूँ करुणा (महबतों ) का मौजे मरता समंदर। जब भी उन से मिल कर बिछड़ता हूँ लगता है 

तेरी क़ुरबत के लम्हे फूल जैसे 

मगर फूलों की उमरें मुख़्तसर हैं 

                                                      एक हंगामे पे मौक़ूफ़ है घर की रौनक़ 

शदी में मारूफ शख्सियतें शरीक हुयी हैं। शारिक  शीराज़ी वतन शीराज़ है ,हिंदुस्तान में अहमदाबाद को अपना वतन बनाया ,और अब सालों से अमेरिका में अपनी रिहाइश कर रखी है ,नफ़स ब नफीस तशरीफ़ लाये हैं। हर दिल अज़ीज़ डॉ वासिफ अहमद दुबई से तशरीफ़ लाये हैं। तहरीम की चाचा चाची  ,फूफा फूफी ,चाचा ज़ाद बहने भाई ,मामू ज़ाद सूरत ,नवापुर ,कल्याण ,धूलिया और जलगाओं से शादी में शिरकत के लिए आएं हैं। भरा पूरा ख़ानदान है। 

वो बाग भी क्या बाग़ जहाँ तितलियाँ न हो 

वो घर भी कोई घर है जहाँ लड़कियां न हो 

क़ुदरत का उसूल है लड़कियों को जुदा  होना ही पड़ता है। जानता हु ,ख़ाला जान ,खालिद और साइमा के लिए तहरीम की जुदाई तकलीफ दे ज़रूर होंगी ,लेकिन उसके रोशन मुस्तकबिल और नयी ज़िन्दगी की शुरवात पर दिल मुत्मइन भी होंगे । एक तालीम याफ्ता,संजीदा और तहज़ीब याफ्ता  ख़ानदान की बहु बनना भी खुश नसीबी की बात होती है। 

जहाँ रहे वो खैरियत के साथ रहे 

उठाये हाथ तो ये दुआ याद आयी 

हम सब की दुवायें ,नेक ख्वाहिशात बेटी तहरीम के साथ  हैं , नयी ज़िन्दगी की शुरुआत पर दिल की गहराइयों से मुबारकबाद। 

आमीन सुम्मा अमीन  

सोमवार, 13 नवंबर 2023

Salahuddin Malik

                                                             मरहूम  हाजी सलाहुद्दीन मालिक  

पैदाइश  :       01 /06 /1965  (नसीराबाद )

वफ़ात   :         29 /10 /2023   (जलगांव )    तद्फीन : 30 /10 /2023   सुबह ११ बजे बड़ा क़ब्रस्तान जलगांव 


मौत उस की है करे जिस का ज़माना अफ़सोस 

यूँ तो दुनिया में सभी आये हैं मरने के लिए 


सलाहुद्दीन का मतलब होता है "दींन की पुकार " या " वह इंसान जो लोगों को फायदा पुह्चायें "

      मरहूम हाजी  सलाहुद्दीन मालिक साहेब में ये दोनों खूबियां कूट कूट कर भरी थी।  माशाल्लाह मरहूम क़ुरान की तफ़्सीर ,तशरीह ,और लोगों को अरबी Grammar सिखाने में अपने आप को मसरूफ रखते थे। मरहूम के दो निजी channels तज़्कीर बिल क़ुरान और फ़हम क़ुरान भी थे जिन पर मरहूम सलाहुद्दीन रोज़ाना क़ुरान की तफ़्सीर और अरबिक grammar की इशाअत करते रहते थे। कुछ लोगों ने ग्रुप में उन पर तंज़ भी किया उनेहे इन कामों से रोकने की कोशिश भी लेकिन बक़ौल शायर 

"न सताइश की तमन्ना न सिले की परवाह " मरहूम अपना काम जूनून की हद तक करते रहे और इस दुनिया से अपनी आक़ेबत सवार कर रुखसत होगये। 

    उनकी मौत पर हर ग्रुप में उनको ताज़ियत के पैग़ामात का एक सैलाब आया , जो थमने का नाम नहीं लेता था। तब पता चला वो हमारे रिश्तेदारों में कितने हर दील अज़ीज़ थे। बैरून मुल्क से भी खान मोहम्मद (दुबई) नईम शैख़ और उनके पुराने साथियों के messages आये। 

खुदा बख्शे बहुत सी खूबियां थी मरने वाले में 

मालिक सलाहुद्दीन की पैदाइश नसीराबाद की है। इब्तेदाई तालीम एरंडोल उर्दू स्कूल में हुयी। साबू सिद्दीक़  इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की तालीम मुक़्क़मिल की। मुख़्तसर अरसा मुम्ब्रा में जॉब किया और 

मुझ को जाना है आगे हदे परवाज़ से के मिस्दाक़ सऊदी अरबिया की जानिब उड़ान उडी। १० साल वाटर पाइप लाइन प्रोजेक्ट पर काम किया। हज उसी दौरान अदा किया और जेद्दा बेस होने की बिना पर कई उम्रे भी अदा किये। इसी  सर ज़मीन पर कई मुक़द्दस मुक़ामात की सैर की। मक़्क़ा ,मदीना ,मैदाने बद्र ,तबूक वग़ैरा ,मैं ने उनके हातों से बने सऊदी के नक़्शे अपनी आँखों से देखें है. मैं ने कई बार सऊदी मक़ामात के बारे में सवालात करके उनसे कीमती मालूमात भी हासिल की है। 

आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा 

अगले १५ साल मरहूम सलाहुद्दीन दुबई में कंस्ट्रक्शन कंपनी में अपनी खिदमत देते रहें। ज़ियादा वक़्त उनका दुबई ओमान बोर्डेर पर गुज़रा। वहां भी वह लेबर कैंप की मस्जिद में क़ुरान की तफ़्सीर करते थे। कई वीडियो उनोहने मुझे अपनी दुबई तफ़्सीर के share किये थे। 

सोहबतें सालेह तुरा सालेह कुनद 

मरहूम को किताबों से जूनून की हद तक लगाव था। इस दौर में जब "जिसे भी देखिये वह अपने आप में गुम है " लोग व्हाट्स उप सोशल मीडिया पर वक़्त बर्बाद करते नज़र आते हैं ,में ने उन के घर की विज़िट के दौरान तफ़्सीर क़ुरान के मुख्तलिफ मजमुवे ,तारीख इस्लाम पर लिखी किताबों की एक लायब्ररी देखि  उसदिन ,दिल बाग़ बाग़ होगया के इस दौर में भी ऐसे लोग मौजूद है। उनका अपना बेड रूम ही उनका स्टूडियो हुवा करता। 

उनकी दोस्ती और ताल्लुक़ात भी मारूफ हस्तियों से थी। प्रोफेसर हमीदुद्दीन मराज़ी जो कई किताबों के लेखकः है और ३० सालों से जम्मू यूनिवर्सिटी में "Religious Studies "  के प्रोफेसर है मरहूम को बहुत अज़ीज़ रखते थे और वो भी प्रोफेसर साहेब की बहुत इज़्ज़त करते थे। 

लेकिन तेरे ख्याल से ग़ाफ़िल नहीं रहा 

इन सब मसरूफियतों के बावजूद मरहूम सलाहुद्दीन मलिक ने अपनी औलाद की तरबियत भी उम्दा तरीके से की। माशाल्लाह  बेटा सऊद इंजीनियरिंग ग्रेजुवट है बहुत जल्द post graduation के लिए कनाड़ा रवाना होने वाले है। बेटी सनया भी इंग्लिश लिटरेचर में M.A हैं ,और आर्ट टीचर भी है, और बहुत जल्द अज़्दवाजी रिश्ते में बंधने वाली है। कुछ ख्वाब ज़िन्दगी में पुरे नहीं हो पाते ,अल्लाह की मस्लेहत ,लेकिन नेक औलाद और फर्माबरदार ज़ौजा उन ख्वाबों की ताबीर ,परेशानियों,नामवाफ़िक़ हालात के बावजूद हकीकत के रूप में बदल देती है , जो मरहूम की रूह को सकून का सबब बन जाता है। 

पहुंची वही पे ख़ाक जहाँ का खमीर था 

मरहूम हाजी सलाहुद्दीन भी नसीराबाद में पैदा हुए थे और ,१० किलोमीटर के दायरे जलगांव में आराम फार्मा है। अल्लाह मरहूम की रूह को करवट करवट जन्नत नसीब करे। 

आमीन सुम्मा आमीन 



सोमवार, 30 अक्टूबर 2023

Advance Eye Hospital and Institute (AEHI) (Agrawal eye clinic)





 AEHI  (Advance Eye Hospital and Institute )

2013 से मैं AEHI सानपाडा में अपनी वाइफ के साथ हर साल आँखों की चेकिंग के लिए विजिट करता रहा हूँ। पहली बार २०१३ में जब हॉस्पिटल का उद्धघाटन हुवा था "कछ युथ एसोसिएशन "की तरफ से फ्री ऑय चेक अप  हुवा था। मुझे ये फैसिलिटी इतनी दिल को भा गयी थी ,अपने कई दोस्तों और रिश्तेदारों को में ने इस हॉस्पिटल में रेफेर किया था। और सभी ने इस हॉस्पिटल की प्रसंशा की थी। 

मेरी आदत सी बन गयी है तू 

और आदत कहीं नहीं जाती 

डॉ वंदना जैन AEHI की बानी (Founder ) है और इंचार्ज रही है। मोहतरमा बहुत शरीफ ,मुख्लिस  और नरम लहजे (soft spoken )में बात करती है। मरीज़ की आधी बीमारी उनसे बात करके दूर होजाती है। और वह हमेशा से हम दोनों वाइफ हस्बैंड की ऑंखें चेक करती रही है। AEHI में हर किस्म की मॉडर्न फैसिलिटीज अवेलेबल है। यहाँ का स्टाफ भी मुस्तैद (ALERT ) है। और डॉक्टर्स  की फ़ौज है जो अपने अपने फील्ड में माहिर है Squint Cataract , Retina Cornea problems में माहिर डॉक्टर्स की खिदमत (सर्विसेज ) हासिल की जा सकती है। इस हॉस्पिटल में डॉ वंदना जैन ,डॉ राजेश मिश्रा , डॉ अक्षय नायर ,डॉ प्रतिक गोगरी ,डॉ योगेश पाटिल ,डॉ प्राची आकाशे डॉ नितीश तिवारी जैसे मारूफ डॉक्टर्स की सर्विसेज अवैल की जा सकती है। 

दिल के ज़ख्मों को छुवा है तेरे गालों की तरह 

१७ अक्टूबर २०२३ मंगलवार को  डॉ वंदना जैन मेरी लेफ्ट ऑय का  कैटरेक्ट का ऑपरेशन किया और लेंस भी लगा दिया। ५० सालों से में ग्लासेज का इस्तेमाल कर रहा था अब तो ,आँखों की रौशनी इतनी तेज़ होगयी के Spectacles की  ज़रूरत ही नहीं रही। १५ मिनट्स के मुख़्तसर (short ) टाइम में surgery मुक़्क़मिल (complete ) होगयी और यु लगा डॉ साहेबा ने नश्तर (LANCET) की बजाय गुलाब की पंखड़ी से ऑपरेशन किया हो "Hats off to Dr Vandana Jain "

गुरुवार, 6 जुलाई 2023

kamyabi mubarak

                                                                           मुबारकबाद 
उकाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में 
नज़र आती हैं उनको अपनी मंज़िल आसमानो में 
शुमाइज़ा ज़ाहिद शैख़  को A Grade में Master of Commerce का एग्जाम क्लियर करने पर दिली मुबारकबाद। इक़रा खानदेश फाउंडेशन से उसे पिछले २ सालों से कॉलेज फी स्कॉलरशिप की सूरत में अदा की गयी। इक़रा खानदेश फाउंडेशन के तमाम कमीटी मेंबर्स की जानिब से मुबारकबाद ,और रोशन मुस्तकबिल  के लिए ढेर सारी दुवाएँ। 
सिदृरा नूरुद्दीन शैख़ ने तबियत खुश करदी, माशाल्लाह A + Grade मे Master of Commerce एग्जाम पास किया है। अमर ट्रांसपोर्ट ख़ानदान को  रिश्तेदारों में एक मक़ाम हासिल है। हमेशा खैर के कामों में पेश पेश रहते हैं। कल्याण प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन का प्रोग्राम अमर ट्रांसपोर्ट की ऑफिस ही  में रखा गया था ,तब जनाब नूरा से मुलाक़ात का शरफ़ हासिल हुवा था। आप पुर खुलूस शख्सियत के मालिक हैं और अपने बच्चों की तरबियत पर खास  ख्याल रखा है। अल्लाह से दुआ है उनका ख़ानदान इसी तरह तरक़्की की राह पर गामज़न रहे। अमीन सुम्मा आमीन 

सोमवार, 12 जून 2023

kalyan couselling programme

किसी भी तंज़ीम की कामयाबी खुलूस और डेडिकेशन से काम करने वाले मेंबर्स  से होती है। जंग में हमेशा प्यादे अहम रोल अदा करते हैं और  कर्नल ,जनलस को क्रेडिट मिलता है। सही है कर्नल की स्ट्रेटेजी प्लानिंग का कामयाबी में  बड़ा दखल होता है। 

माशाल्लाह कल्याण इक़रा खानदेश फाउंडेशन यूनिट की जानिब से ११ जून २०२३ इतवार को Counselling का कामयाब  प्रोग्राम कम्युनिटी हॉल रहेजा काम्प्लेक्स कल्याण में मुनकिद किया गया। ९ से १२ क्लास के बच्चों की Counselling जनाब अख़लाक़ शैख़ साहेब मशहूर कौंसलर ने की। आप इन्किलाब में रोज़ाना "मंज़िल की जुस्तजू है तो जारी  रहे सफर  " मोटिवेशनल कलम लिखते है। माशाल्लाह रिश्तेदारों में प्रोग्राम के ताल्लुक़ से एक जोश दिखाई दिया। 

हमारे मुक़ामी कार्यकर्ता जनाब मखदूम अली सय्यद   ,हिसामुद्दीन ,अनीस सर ,मैडम यास्मीन मखदूम ,इमरान मखदूम ,रुखसार इमराम अली , अनीस सर अज़ीम (कालसेकर कॉलेज ),सलीम शैख़ ,आसिफ शैख़ और हसींन साहेबान ने प्रोग्राम को कामयाब बनाने में अनथक मेहनत की जज़ाक अल्लाह खैर। हाजी सलाहुद्दीन मालिक ने प्रोग्राम में शिरकत कर प्रोग्राम को चार चाँद लगाए। और आखिर तक प्रोग्राम में शरीक  रह कर हम सब की हिम्मत अफ़ज़ाई की। 

माशाल्लाह जनाब मखदूम अली सय्यद और हिसामुद्दीन साहब को देख कर लग रहा था उनके घर शादी है। हॉल की बुकिंग से ले कर साफ़ सफाई तक । अक्सर ये होता है पब्लिक हॉल में टॉयलेट बहुत गंदे होते है यहाँ तो टॉयलेट भी चकाचक थे। फिर बच्चों का नाश्ता पानी का इंतेज़ाम पंखे ,लाइट ,70 MM स्क्रीन भी provide किया गया था। हॉल भी  बच्चों ,और साथ आये वालेदैन से भर गया था। बच्चों ने प्रोग्राम को दिलचस्पी से सुना। प्रोग्राम के बाद भी अख़लाक़ अहमद को घेरे में ले कर बच्चों ने बेतहाशा सवालों की बौछार कर दी ,और जनाब अख़लाक़ ने उनके तस्सली बख्श जवाबात दिए।  

प्रोग्राम के बाद हिसामुद्दीन साहब के घर लज़ीज़ खानो से मेहमान नवाज़ी हुयी। हमारी अहलिया मोहतरमा शगुफ्ता रागिब और हमारे  भाई  जनाब जावेद अहमद शैख़ जो सानपाडा से तशरीफ़ लाये थे, इनोह ने  प्रोग्राम और खाने का बेहद लुत्फ़ लिया 

special thanks तो इमरान मखदूम अली फॉर recording और online शेयरिंग प्रोग्राम on you tube . हालाँकि  internet अवेलेबल नहीं था।  अल्लाह जज़ाए खैर आता करे।  आमीन सुम्मा आमीन 

शुक्रगुज़ार है  प्रिंसिपल शकिलोद्दीन सर के जिनोह्णे स्कूल के स्टूडेंट्स को छुट्टी के रोज़ बुला कर बड़े स्क्रीन पर प्रोग्राम live दिखाया। माशाल्लाह २६०  लोग अब तक प्रोग्राम देख चुके हैं। 

कुछ लोगो से  अल्लाह अहम काम ले लेता है ,वह हर जगह मौजूद होकर भी कही दिखाई  नहीं देते। हमारे  counselling प्रोग्राम के पिलर ,financial supporters ,अल्लाह उनके  रिज़्क़ में बेहद बरकत आता करे। 

 जज़ाक अल्लाह कैप्टेन शाहबाज़ अली सैयद 

जज़ाक अल्लाह जनाब नवेद अंजुम वासिफ शैख़ (दुबई )

जज़ाक अल्लाह मोहतरमा नाएला चूनावाला (सऊदी अरबिया )

जज़ाक अल्लाह सुहैल शैख़ (कल्याण )

इक़रा खानदेश फाउंडेशन उम्मीद करता है के स्टूडेंट्स ज़रूर इस प्रोग्राम से फायदा उठाएंगे। अगर कुछ सवालात अख़लाक़  अहमद साहब से करने हो तो  मुझ से इस नंबर पर राब्ता करे 9892369233 

 रागिब अहमद शेख (नेरुल नवी मुंबई )

प्रेजिडेंट इक़रा खानदेश फाउंडेशन 


गुरुवार, 8 जून 2023

Happy Birthday Dr wasif

 तुम्हारी हंसती  हुयी ज़िन्दगी की राहों में 

हज़ार फूल लुटाती हुयी बहार आये 

तमाम उम्र तुझे ज़िन्दगी का प्यार मिले 

खुदा करे के ये ख़ुशी तुमको बार बार मिले 

हमारी जनरेशन में हम ने जन्म  दिन मनाते सिर्फ फिल्मों में ही देखा था। शायद डॉ साहेब ने डॉक्टरी मुक़क़म्मिल करनेतक कभी जन्म दिन मनाया हो। अँगरेज़ हिन्दुस्तान छोड़ तो गए ,लेकिन जाते जाते कुछ निशानात अपनी यादों के छोड़ गए। उनेह केक ,फूल ,मोम बतियाँ बेचना था, जन्म दिन मनाने का शोशा छोड़ गए। वैलेंटाइन डे ,क्रिस्टमस न जाने क्या क्या और हिंदुस्तान में लोगों ने इन बातों को ऐसे अपना लिया जैसे अपनी तहज़ीब का हिस्सा हो। 

डॉ वासिफ ने अपनी ज़िन्दगी चोपड़ा ,जलगांव की जिल्ला परिषद् स्कूल से शुरू की थी। एंग्लो उर्दू स्कूल  जलगांव से १९६६ में मेट्रिक की परीक्षा पास की, में भी उनके नक़्श क़दम पर चलता रहा ,क्या करे हम दोनों  की उम्रों में ४ साल का difference है जो  हम कभी हम पाट नहीं सकते। इत्तिफ़ाक़ से हम चारों भाइयों में चार साल का फासला  है। दादाभाई  (सादिक़ अहमद )पैदाइश १९४६ ,डॉ वासिफ १९५० ,रागिब अहमद १९५४ ,जावेद अहमद १९५८ । डॉ वासिफऔर मेरे बीच वाक़िफ़ अहमद भी था ,इंतेक़ाल कर गया शायद अल्लाह को ४ साल का फासला बरकरार रखना था। दादा भाई भी साबेक़ून अवलीन साबित हुए ,हम से जल्द मुं मोड़ लिया। 

डॉ वासिफ दो साल जलगांव ऍम जे कॉलेज से intermediate पास कर, सेवाग्राम मेडिकल कॉलेज से मेडिकल  पढ़ाई करने जलगांव छोड़ गए फिर उनोहने  जलगांव की तरफ मुड कर नहीं देखा बल्कि गुजरात के होगये। 

में ९वी जमात तक घर कटिया फैल  से एंग्लो उर्दू स्कूल जलगांव ३ किलोमीटर पैदल बग़ैर चप्पलों के जाया करता था। डॉ वासिफ मेरे लिए विरासत में अपनी RAMI साइकिल छोड़ गए। में रातों रात कल्लाश से बादशाह बन गया। उन दिनों साइकिल ओन करना अपनी एक अहमियत थी।  

जावेद और मेरी शादी के  रिश्ते में डॉ वासिफ ने  एक अहम रोले अदा किया। 

आज भी जब हम  तारीखे पैदाइश से दूर होते जा रहे ,बालों में सफीदी  है। सर पर चाँद चमकने लगा है। डॉ साहेब घने काले बालों ,फिजिकली फिटनेस की बिना  पर ,हम उनके सामने उम्र रसीदा दिखयी देते हैं। अल्लाह डॉ वासिफ की उम्र दराज़ करे  हमेशा सेहतमंद रखे। 

सुम्मा आमीन 

जहाँ रहे वो ,खैरियत के साथ रहे 

उठाये हाथ तो ये एक दुआ याद आयी 




मंगलवार, 6 जून 2023

Cousenselling programe at Kalyan

                                                            Iqra Khandesh Foundation Kalyan Unit 

                                                                                    Presents 

Carrier Guidance Seminar at your doorsteps 

Topics

1. How to select a career ?

2. Career options after 10th and 12th Standard .

3. Completing Graduation and still worried ?

4. Different Scholarship Schemes.

5. Competitive Exams ETC.

6. Question Answer Session .

Date: 11th June 2023

Venue :At Community Hall , Raheja Complex (Near New Vani Vidyashala) ,

Patripool ,Kalyan (W)

Program Organizers :

Janab Imran Ali Sayed 

Janab Aness Ahmed Shaikh

Supported By :

Captain Shahbaz Ali Sher Ali Sayed

Janab Naved Anjum Wasif Ahmed Shaikh (Dubai )

Mrs. Naila Chunawala (Saudi Arabia )