मंगलवार, 20 सितंबर 2022

ye phool mujhe koyi wirasat me mile hain

 ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं 

तुम ने मेरा काँटों भरा बिस्तर नहीं मिलता 

इक़रा खानदेश फाउंडेशन के मारेफ़त जिन रिश्तेदरारों के स्टूडेंट्स को स्कालरशिप दी जा  रही हैं हक़दार तो है ही कुछ बच्चों की काविशें ,मेहनतें देख कर हमारे struggles के दिनों की यादें ताज़ा हो जाती हैं। ३ किलोमीटर दूर पैदल बगैर चप्पल जूतों के स्कूल जाना। कभी नाश्ता नहीं मिलता था ,और कभी खाना नहीं  मिलता था। फी गवर्नमेंट की EBC स्कीम से मिलती थी। डॉ वासिफ ,मखदूम ,सलाहुद्दीन मलिक ,ताजुद्दीन ,ज़ाकिर अहमदाबाद वाले  ,  मरहूम सादिक़ इंजीनियर ,  हाफिज जावेद ,(इन  साहेबान से मेरी क़ुरबत रही है इन के हालत जनता हु )हमारी जनरेशन ने जिस मुसीबत से तालीम हासिल की। नौकरी के लिए दर बी  दर ठोकरे खायी और आज इस मुक़ाम तक पहुंचे ,जी चाहता हर किसी के हालत ज़िन्दगी लिखूं बहुत लोगों  को मुतर्रीफ़ (introduction )दे चूका हु और इंशाल्लाह वक़्त मिलने पर सब के बारे में अपना ब्लॉग ज़रूर लिखूंगा। 

जान कर ख़ुशी हुयी  के कुछ बच्चे हम से भी ज़ियादा जदो  जहद रहे हैं 

इक़रा खानदेश फाउंडेशन की जानिब से जिन बच्चों को स्कालरशिप दी गयी उन में से कुछ सख़्त हालात का मुक़ाबला करके अपनी तालीम मुक़्क़मिल कर रहे हैं और  साथ साथ फॅमिली को भी  support कर रहे हैं bravo 

कुछ मिसालें 

इंजीनियरिंग करने वाले कुछ बच्चे शाम को कॉलेज के बाद पार्ट टाइम जॉब करके अपने कॉलेज का खर्च (ट्रवेलिंग्+नोटबुक+टेक्सटबुक्स ) खुद अपनी कमाई से  ख़रीदते हैं। और फॅमिली की भी मदद करते हैं 

ITI  करने वाले कुछ बच्चें सुबह रिक्शा चलाने के बाद कॉलेज अटेंड करते हैं। 

कुछ पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले बच्चें   पार्ट टाइम रिसेप्शनिस्ट का काम करते हैं कॉलेज के साथ साथ अपनी  फॅमिली को भी सपोर्ट कर रहे हैं 

बहुत से बच्चों का फी न भरने की  बिना पर रिजल्ट रोक लिया गया था IKF ने तुरंत स्कॉलरशिप मंज़ूर की रिजल्ट मिलाने के पश्चात् बच्चों ने अगले कोर्स में एडमिशन लिया। वरना साल बर्बाद होजाता शायद कुछ बच्चे तो  तालीम ही छोड़  बैठते। 

एक स्टूडेंट पैसों की कमी की बिना पर अपना ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट यूनिवर्सिटी से ले नहीं प् रहा था IKF ने  मदद की उसका सर्टिफिकट दिलवाया। 

खुलूस हो तो निकलती हैं ग़ैब से राहें 

मरहूम मिस्बाह अंजुम ने रहनुमाई की। इक़रा खानदेश फाउंडेशन की बुनियाद रखी गयी।  काम को एक साल से कम वक़्फ़े में रिश्तेदारों में पज़ीराई मिली। हमारी लब्बैक पर ११० लाइफ मेंबर्स ५०० रुपये दे कर IKF से जुड़े। मखदूम अली रिटायर्ड एकाउंट्स अफसर ,अल्हाज हिसामुद्दीन बैंक से रिटायर्ड केशियर ने IKF अकाउंटेंट के फ़रायज़ बिना salary के अंजाम देने का बेडा उठाया। न कोई IKF का  एम्प्लोयी  है ,न ऑफिस का  खर्च है न  लाइट पानी का बिल। चार लाख रूपये जमा हुए डायरेक्ट  ५० रिश्तेदारों के बच्चों के स्कूल /कॉलेज के अकाउंट में जमा होगये। हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा। रहबरी के लिए अल्हाज सलाहुद्दीन नूरी ,ज़ाहिद शैख़ { अबू धाबी },फैसल शैख़ (मैंचेस्टर ), रागिब अहमद शैख़  (नवी मुंबई ),हमीदुद्दीन (नासिक ) डॉ वासिफ अहमद (दुबई ) ,एडवोकेट रज़ीउद्दीन  बुज़र्ग और काबिल लोगों  की रहनुमाई ,कयादत  मिली। रिज़वान जहागिरदार ,कमर शैख़ जैसे नौजवान और जोश भरे लोगों का साथ। बच्चों की स्कॉलरशिप भी डोनेशन से अदा की जाती है ,ज़कात की रक़म बिलकुल इस्तेमाल में नहीं लायी जाती। 

आज वक़्त न फ़ुज़ूल बहस मुबाहसे का है का है , न दूसरों पर कीचड  उछलने का। दो साल के लॉक डाउन के दौर ने अच्छे अच्छों की हिम्मतें तोड़ दी है। हालात सख़्त हैं। इक़रा खानदेश फाउंडेशन के अकाउंट में सिर्फ ४० हज़ार रूपये बैलेंस है।  १० से ज़ियादा एप्लीकेशन आये हैं और IKF किसी को मायूस नहीं करना चाहता है। आप सभी IKF मेंबर्स से मौदेबाना गुज़ारिश है के IKF की मदद के लिए आगे बढे। रिश्तेदारों के बच्चों के मुस्तक़बिल के लिए दिल खोल कर IKF केअकाउंट में डोनेशन जमा कराये । 






सोमवार, 12 सितंबर 2022

JALGAON PROGRAME

 शकिलोद्दिन  सर ,मोहमद जहांगीर ,साकिब अली ,कफील अहमद 

कुछ गुमनाम सिपाही ऐसे होते हैं जिन का खून फ़तेह में शामिल होता है मगर मफ़्तूह (जीता हुवे  ) किले की दीवारों पर जिन का नाम नहीं आ पता। 

जलगाव्  यूनिट के सिपाह सालार जनाब रिज़वान जहागिरदार की क़यादत में ११ सितम्बर को जलगाव प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन प्रोग्राम जिस खुश असलूबी से Organize किया गया ,दिल की गहराईओं से वाह  निकल पड़ी। मुंबई में इतने पप्रोग्राम Organize किये ,attend किये उन सब से बढ़ कर इस प्रोग्राम को पाया। 

उन से ज़रूर मिलना सलीक़े के लोग हैं 

किसी भी प्रोग्राम की कामयाबी उस organization के foot soldiers (ज़मीनी सतह ) पर काम करने वालों की अरक रेज़ी ,जाँफ़िषानी ,और dedication का नतीजा, होती है। हम सब सलाम करते हैं कफील अहमद ,शकिलोद्दिन सर ,मोहमद जहांगीर ,साकिब अली और जनाब रिज़वान जहाँगीरदार की काविशों को ,इन साहबान की दिन रात की मेहनतों का नतीजा है  ,जलगाव्  prize distribution प्रोग्राम इस कामयाबी से ऑर्गेनिसे किया गया। 

घर को जाने वाले रस्ते अच्छे लगते हैं 

दिल को दर्द पुराने अच्छे लगते हैं 

फूल नगर में रहने वालों आकर देखो 

अपने घर के कांटे अच्छे लगते हैं 

अपने वतन में आयी तबदीली को देख कर ख़ुशी हुयी। बच्चे ,बच्चियां तालीम में तर्कियों की बुलंदियों को छू रहे हैं। 

हम भी अब किसी समाज से डिसिप्लिन में काम नहीं। तर्रकी की यही रफ़्तार रही तो रिश्तेदारी इंशाअल्लाह आसमान को छू लेंगी। 

क्या हम सब ख़ानदान वाले हज़रत शाह वाजिहुद्दीन गुजरती और बाजन शाह बूरहानपूरी  के शिजरे से नहीं जुड़े हैं ? काश हम अपने बुज़र्गों के हलाते ज़िन्दगी से वाक़िफ़ होते। 

शाह वाजिहुद्दीन २३ साल की उम्र से दरस व तदरीस (teaching ) पेशे से जुड़े थे। अपनी आखरी साँस तक इल्म की रौशनी फैलते रहें। आपके मदरसे में  तमाम हिंदुस्तान के इलावा यमन ,सऊदी,बहरीन और middle east से students पढ़ने के लिए आते और इल्म की दौलत से माला माल होकर लौटते । कहा जाता है आज भी मदरसों में उनका syllabus मामूली तब्दीलियों के साथ पढ़ाया जा रहा है। काश हमारे इन अजदाद की किताब हर घर में छाप कर तक़सीम की जाती, जिन का सिलसिलये नसब हज़रात अली तक पहुँचता है। 

हमारे एक दोस्त ने मुंबई यूनिवर्सिटी से हज़रात बाजन  शाह पर थीसिस लिख कर डॉक्ट्रेट भी मिलायी है। 

आये, हम ९००० (family tree  latest figure ) से जुड़े  ख़ानदान के अफ़राद एक प्लेटफार्म पे जमा होकर खुलूस ,नेक नियति से एक दूसरे के ग़म ख़ुशी में शरीक हो। बच्चों की तालीम ,मुलाज़मत ,कारोबार ,रिश्तों के लिए जरिया बने। आमीन सुम्मा आमीन। 

जलगाव् तक़सीमे इनामात प्रोग्राम की कामयाबी पर लिखा गया ब्लॉग ( ब्लॉग लिंक ragibahme.blogspot.com )



गुरुवार, 18 अगस्त 2022

मुबारकबाद

अक़ाबि रूह जब पैदा होजाती है नौजवानो में 
नज़र आती है मंज़िल उनको अपनी आसमानो में 
फ़िज़ा नाज़ रईस अहमद (शमीम बानो  ) ,उँजेला नाज़ नफीस शैख़ (शबाना बी ), सय्यद मिस्बाह नाज़ तबरेज़ (सलमा बी ) और शैख़ तस्कीन इस्माइल (अंजुम बी ) चारों  बच्चियों का रिजल्ट देख कर तबियत खुश होगयी। अल्हम्दोलिलाह रिश्तेदारों में तालीमी बेदारी देख कर इत्मीनान महसूस हुवा। सभी  बच्चियों के मार्क शीट पर कैंडिडेट के इलावा माँ और बाप दोनों का नाम बोल्ड लेटर्स में  लिखा होता है । सोने पर सुहागा चारों बच्चियों  ने ९०%  मार्क्स स्कोर किये हैं। दिल की गहराइयोन से इक़रा खानदेश फॉउण्डेशन्स के मेम्बरान  की जानिब से मुबारकबाद। अल्लाह करे ये कारवां इसी तरह आगे बढ़ता रहे। 
इक़रा खानदेश फाउंडेशन ग्रुप  में pure educational मालूमात /ख़बरें /बच्चों के रिजल्ट्स और इक़रा खानदेश फाउंडेशन के ताल्लुक़ से information शेयर की जाती है। बहुत कम ऐसे ग्रुप्स होते हैं जहाँ इस तरह एहतियात बरता जाता है। future में भी इसी तरह से एहतियात बरतने की members से गुज़ारिश है। बच्चों के रिजल्ट्स declare हो गए हैं और और स्कॉलरशिप के लिए applications आ रहे हैं। आप सब से फिर एक बार 100 रूपये हर महीने donation के लिए request की जाती है, ताकि फाउंडेशन का काम बग़ैर किसी रुकावट के चलता रहे। 

गुरुवार, 11 अगस्त 2022

माशाल्लाह अभी तक हमारे ख़ानदान  में डॉक्टर है ,  engineers  है ,MBA भी है। 

ईशा का फाइनल ईयर LL.B का result कल declare हुवा है। She has passed the exam in 1st class from Mumbai University . हम सब की जानिब से ईशा जावेद एंड फॅमिली को दिली मुबारकबाद।  

ईशा को इस कामयाबी पर ढेरो मुबारकबाद। अल्लाह से उसके रौशन ताबनाक मुस्तकबिल के लिए दुआ है। आमीन सुम्मा आमीन।  

शनिवार, 23 जुलाई 2022

doston ki mehrbani chahiye

औसाफ़ उस्मानी साहेब की शख्सियत  इस एक शेर से अयं होजाती है 

 शहर में सब को कहाँ मिलती है रोने की जगह 

अपनी इज़्ज़त भी यहाँ हसने हँसाने से रही 

रसोई हमारे नेरुल शहर का अड्डा है जहाँ अजीब अल ख़ल्क़ (टिपिकल) लोग हर सुबह  अपनी बे इज़्ज़ती करवाने जमा होते है। और खुश भी होते हैं। कुछ  मुख़्तसर  group  के highlights 

प्रकाश सोनवणे navy से retire लेकिन दिमाग़ बहुत तेज अपनी साइकिल मार्किट में बेच दी पुलिस में FIR कर नेरुल पुलिस स्टेशन से नयी साइकिल मिल गयी।  bravo 

अब्दुल कोटियाद जिनेह उर्दू में जोक सुनाया जाता है तो एक हफ्ते बाद हँसते है। 

सब से जवान साथी जनाब अब्दुल हामिद ख़ानज़दा "मुंबई  की कोनसी गली कोनसी फिरदोस है जिसे वो नहीं जानते। 

मंसूर जेठाम साहब   उर्फ़ गुरु अपने से ज़ियाद दूसरों के ग़म में घुलते है। 

इश्तियाक़ भाई सौ सुनार की एक लोहार की। 

इमरान जलती में तेल डालने का काम करने वाला 

सुनील Badmintan में कब कैसे हारा जाता है 

हरीश साहेब का ये कहना है के वो मंदिर में थे 

और सकी की गवाही है के मैखने में थे। 

जो यहाँ था वो वहां क्यूकर हुवा ?

औसाफ़ साहेब के औसाफ़ क्या बयां करू फेडरल बैंक का चौकीदार उनकी बेरुखी से दुबला पतला होगया। 

लोग Gym का इस्तेमाल  सिर्फ ज्वाइन करने के दिन करते हैं लेकिन ये हज़रात को रोज़ाना Gym से ज़बरदस्ती भागना पड़ता है। आप अपने से ज़ियाद दूसरों को खिलने में महज़ूज़ होते हैं। हैदराबाद की नान खटाई ,बन पॉ व। 

हमेशा गर्दिश में रहते हैं। उनकी ज़िन्दगी का एक उसूल है 

जीने का ये होना भी आज़माना चाहिए 

दोस्तों से जंग हो तो हार जाना चाहिए 

Happy birthday अल्लाह सलामत रखे आमीन 








शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

میرا پیام محبّت ہے جہاں تک پہونچے

                                                       

                                                                       میرا پیام محبّت ہے  جہاں تک پہونچے 

مکرمی 

سریش کمار مینگڈے نوی ممبئی ڈپٹی کمشنر (کرائم) نے پنویل میں آزادی کا امرت مہوتسو اور آپسی بھایئ چارہ عنوان پر اپنے خوبصورت خیالات کا اظہار  کیا - موصوف اسلام کی اچھی معلومات رکھتے ہیں اور اکثر و بیشتر آپ کے اس موضوع پر خوبصورت  ویڈیوز  وائرل ہوتے رہتے ہیں جس میں وہ اسلام کے بنیادی اصولوں  نماز روزہ اور محمّد  رسول الله کی احادیث سنااتے ہیں 

ہندوستان میں جس طرح نفرت کی سیاست کو فروغ دینے کی کوشش جارہی ہیں لوگوں کو ایک دوسرے سے دورکیا جا رہا ہے   کچھ لوگ آج بھی ایسی مثالیں قیام کر رہے ہیں جو تاریخ کی کتابوں مے سنہری حروف میں  لکھی  جا سکتی ہے داراوے  گاؤں  نیرول نوی ممبئی میں  گرووریہ بالا رام پاٹل اسکول جہاں مراٹھی ،انگریزی ،ہندی میڈیم  سکول اور جونیئر کالج کے علاوہ ہوٹل مینجمنٹ کالج ،سپورٹ اکیڈمی بھی ہے بالا رام پاٹل جو اس سکول کے بانی تھے اور کارپو ریٹور سنیل پاٹل کے والد ہیں  ان کی دلی خواہش اردو میڈیم  سکول شروع کرنے کے تھی -الحسنات اردو اسکول کے  بانی جناب رؤف خان نے جو عرصے سے جگه کی تلاش میں  تھے بالا رام پاٹل صاحب سے ملاقات کی جنوری میں بالا رام پاٹل سکول میں پہلی سے ساتوی کلاس  تک تین کمروں پر مشتمل کلاسز کا آغاز ہوگیا بالا رام پاٹل صاحب نے ٩٥ سالہ عمر اور علالت کے باوجود پروگرام مے شرکت کی اسکول شروع ہونے پر جو انکی دلی خواہش تھی خوشی کا اظہارکیا - اور آشیرواد بھی دیا -اردو میڈیم اسکول شروع ہونے کے دو مہینے بعد بالا رام پاٹل  کا سورگ واس ١٦ مارچ ٢٠٢٢ کو  ہوگیا لیکن اردو میڈیم اسکول اسکول کی شروعات اپنی زندگی  میں دیکھ لی اور ٢٠٠ غریب اردو میڈیم میں پڑھنے والے   بچوں کا مستقبل تاریک ہونے سے بچ گیا 

جو اہل سیاست ہیں وہ  اپنا کام جانے 

میرا پیام محبت ہے جہاں تک پہنچے 

راغب احمد شیخ 

نیرول -نوی ممبئی 

٩٨٩٢٣٦٩٢٣٣ 


शनिवार, 26 मार्च 2022

खुशबु जैसे लोग मिले



                                                               
                                                     डॉक्टर वकील अहमद मुनाफ अली (खिराजे अक़ीदत )
      मैं आज कनाडा (कैलगरी ) में हूँ कल तमाम ग्रुप्स में ये खबर पढ़ कर ख़ुशी हुयी के डॉ सय्यद वकील अहमद  मुनाफ अली को जलगांव शहर में  टीचर्स डे के अवसर पर "Best Digital Teacher " award से नवाज़ा गया। बहुत बहुत मुबारक  डॉ वकील साहेब ,आपका तार्रुफ़ मारूफ शेर से कराना चाहूंगा 
                                                मेहनत से वो तक़दीर बना लेते हैं अपनी 
                                                विरसे में जीनेह कोई ख़ज़ाना नहीं मिलता 
    डॉ वकील से २०२२ में उनके घर जाकर , उनसे और उनकी अहलिया और बच्चों से मैं ने और मेरी अहलिया ने मुलाक़ात की थी। बड़े खुलूस से हम दोनों का खैर मक़दम किया था। मुझे आज भी याद है। 
  जब उनेह पूना कॉलेज में CEO बनाया गया उनहोने मुझे फ़ोन करके बताया था। में ने उस वक़्त उनका मुख़्तसर खाका (Caricature ) लिखा था हाज़िरे खिदमत है। 
                                                  मुझ को जाना है बहुत आगे हदे परवाज़ से 
सय्यद वकील अहमद अब डॉक्ट बन गए हैं। रिश्तेदारों के लिए ये फ़ख्र का मुक़ाम है। हम सब की जानिब से दिल की गहराईओं से मुबारकबाद। अल्लाह से दुआ है वो कामयाबियों ,बुलंदियों  की ऊंचाइयों को छू ले आमीन। 
हमारी  सगी चाची ज़ाद बहन आपा  बी (मुनाफ अली की वालिदा )हमारे वालिद हाजी क़मरुद्दीन की चहेती हुवा करती। वो भी अपने चाचा को बड़े अब्बा कहती थी । हमारे बहनवी मंज़ूर अली भी बड़े सादा मिज़ाज इंसान थे। बहुत बार अब्बा के साथ धुले  देव पुर मुनाफ अली के घर जाना हुवा आपा  बी हयात थी , अब्बा के लिए बड़े चाव से अब्बा की पसंदीदा dish हलीम ज़रूर बनाती थी। अब्बा भी तारीफ़ करते नहीं थकते। 
मुनाफ अली ने  Master of commerce  की डिग्री उस वक़्त हासिल की  ,जब मीट्रिक पास की भी एक हैसियत हुवा करती थी । बैंकिंग का पेशा (Accountant)इख़्तियार किया। हलाल रिज़्क़ हासिल करने के लिए ज़िन्दगी भर जुटे रहे। अपनी औलाद की परवरिश बड़ी जान फिशनी से की। औलाद को तालीम से तो आरास्ता किया ही ,साथ साथ खुश अख़लाक़ी ,ईमानदारी ,शराफत और बुज़र्गों की इज़्ज़त कूट कूट कर औलाद में भर दी। 
वही बुलुंद अख़लाक़ी ,शराफत , ज़मीन से जुड़े रहने की  आदत  डॉक्टर वकील अहमद में भी पायी जाती है। डॉक्ट्रेट की डिग्री मिलते ही मुझे फ़ोन करके बताया । " सदर साहब(उस समय में इक़रा खानदेश का प्रेजिडेंट था ) मुझे डॉक्टर की डिग्री मिल गयी है " मैंने भी ढेर सारी दुवाओं से नवाज़ा। 
                                    पर ही काफी नही आसमानो के लिए 
                                    हौसला चाहिए ऊँची उड़ानों के लिए 
     वकील अहमद ने SWES उर्दू स्कूल से जो तालीम की शुरुवात की थी , तालीम का सिलसिला जारी रखा। Z B college धुले से B .Commerce की डिग्री हासिल की। वालिद के नक़्श क़दम पर चल कर SSVPS college से M. Commerce (post graduation) किया । वकील  अहमद को निचला बैठना नहीं आता 
                                    पलटना  झपटना झपट कर पलटना 
                                    लहू गर्म रखने का है एक बहाना 
फिर एक नयी मंज़िल की तलाश में ,डॉक्ट्रेट करने की दिल में ठान ली। मुझे बता रहे थे दो तीन Attempt के बाद डॉक्टरेट  मिली। डॉ साहब कई लोगों ने डॉक्टरेक्ट करते करते अपनी उम्र गवां दी बाल सफ़ेद होगये । आप की मेहनत लगन के आगे यूनिवर्सिटी को घुटने टेकने ही पड़े ,आप को डॉक्टर बनाना ही पड़ा। शायद किसी शयर ने आप के लिए ही कहा है। 
                                       हम ने तै की कुछ इस तरह से मंज़िलें 
                                       गिर पड़े, गिर के उठे ,उठ के चले 
फिर एक नयी उड़ान में डॉ वकील अहमद मसरूफ़ हैं  । CA के लिए qualify हो गए हैं इंशाल्लाह अल्लाह से  उम्मीद है वह आप को मंज़िले मक़सूद तक ज़रूर आपकी  रहनुमाई कर देगा। 
डॉ अब्दुल कलाम का कौल है "you have to dream before your dream comes true " अल्हम्दोलीलाह डॉ वकील अहमद आप ने खवाब देखा ,जुस्तजू की और ख्वाबों की ताबीर पायी.  काश क़ौम के हर बच्चे  में ये जज़्बा उजागर होजाये , क़ौम को तरक़्क़ी से कोई नहीं रोक सकेगा। 

डॉ वकील अहमद  ने UGC NET साल 2011 में क्लियर कर लिया था। कुछ समय अरिहंट कॉलेज में  अस्सिटेंस प्रोफेसर के ओहदे पर ज्वाइन किया। 2013 से पूना की मारूफ (पूना कॉलेज) में  कॉमर्स शोबे में असिस्टेंट प्रोफेस्सर के ओहदे पर फायज़ है। 
     अपने शागिर्दों में डॉ वकील बड़े मक़बूल हैं। Mind Mapping ,Mnemonics ,Edutainment ,keywords methods ये जदीद इस्तेलाहैं (Terms ) डॉ प्रोफेसर वकील अहमद ने अपने स्टूडेंस में introduce कराई हैं। और अब online फ्री इंग्लिश सिखाने का सिलसिला शुरू किया है। 
                                              तमाम उम्र तुझे ज़िंदगी का प्यार मिले 
                                             खुदा करे के ख़ुशी तुम को बार बार मिले 
 अल्लाह से दुआ गो  हूँ के डॉ वकील अहमद तर्रकी ,कामयाबी ,कामरानी हमेशा आप के कदम चूमती रहे। आमीन सुम्मा आमीन। 
Note : ऊपर की तमाम मालूमात में ने डॉ वकील अहमद से हासिल की है