घर को जाने वाले रस्ते अच्छे लगते हैं
दिल को दर्द पुराने अच्छे लगते हैं
फूल नगर में रहने वालों आकर देखो
अपने घर के कांटे अच्छे लगते हैं
25th november 2025 नवापुर से जलगांव दादर भुसावल (spl ) से १०३० बजे सुबह धरणगांव पहुंचा वहां से एरंडोल ,खालिद शैख़ के साथ दिन बिताया। शाम जलगांव पहुंचा। होटल महिंद्रा अजंता नाका में ४।दिन क़याम रहा।
![]() |
| Hotel mahindra jalgaon |
सूरत भुसावल सेक्शन में हर प्लेटफार्म की लम्बाई १ किलोमीटर है। चिंचपाड़ा ,नंदुरबार ,सिंध खेड़ा ,अमलनेर और धरणगांव सभी स्टेशनों के नाम उर्दू में भी लिखे नज़र आये। वेस्टर्न रेलवे का शुक्रिया उर्दू ज़बान को ज़िंदा रखने की एक कोशिश/मिसाल है।
२५ अक्टूबर रात रिज़वान जहाँगीरदार की दुख्तर (Daghter ) की हल्दी की रस्म थी उनकी जानिब से थीम कॉलेज में मुशायरे का एहतेमाम किया गया था। रिज़वान जहाँगीरदार का शुक्रिया मुशायरे की रिवायत को ज़िंदा करने की कोशिश की ये उम्दा मिसाल है।
रिवायती अंदाज़ में सदरे मुशायरा करीम सालार और तमाम मुशायरा में शरीक शाइरों के हाथों शमा जलाई गयी। मुक़ामी शायरों ने कलाम पेश किया साबिर मुस्तफ़ाबादी की निज़ामत शानदार रही। निहाल धुलवीं ने मज़ाहिया और मुक़ामी खानदेशी लहजे में शायरी सुना कर महफ़िल को ज़ाफ़रान ज़ार किया।
हास्ले मुशायरा रहा ३ घंटे सालार साहब के साथ बैठ कर उन के उम्दा कमेंट सुनना ,तबियत खुश होगयी। सालार साहब सुबह ६ बजे से घर से निकले थे ,और मशायरे के आखिर वक़्त तक ज़िंदा दिली का मज़ाहिरा करते रहे ।
दूसरे रोज़ २६ अक्टूबर निकाह की महफ़िल में शिरकत और गोश्त मांडे का लज़ीज़ खाना। मोबिनद्दीन मालिक के साथ एक थाली में खाना enjoyकिया । सलाहुद्दीन नूरी ,हसींन ,बी.क.शैख़ ,आसिफ शैख़ ,कमर अहमद, हाफिज जावेद सब ने साथ खाने में अजब लुत्फ़ रहा । रिज़वान ,राग़िब ,रईस जहाँगीरदार भाइयों ने ख़ुश दिली से खाना माशाल्लाह परोसा ,मेहमान नवाज़ी का हक़ अदा किया।
दूसरे रोज़ एंग्लो उर्दू स्कूल को विजिट भी रही। पुरानी यादें ताज़ा होगयी। काफी मुसबित (positive ) चैंजेस नज़र आये। हर क्लास में स्मार्ट बोर्ड ,स्टूडेंट्स की हाज़री के लिएलगायी थंब इम्रेशन मशीने ,हर क्लास में लगे कैमरे ,और बेहतरीन किताबों से सजी लिबररी । ऐजाज़ मालिक ,प्रिंसिपल गुलाब शैख़ ,सुहैल अकबर रहमानी से मुलाक़ातें हुयी।
![]() |
| Anglo library Jalgaon |
तुम्हारी याद के जब ज़ख्म भरने लगते है



Bhaijaan aap ne mujh se bhi mulakat kiye
जवाब देंहटाएंMasha'Allah...bahut accha aur detail mei likhe aap ne uncle aisa laga fir se woh din jiye hum ne....Allah'tallah sabhi bade buzurgon ka saaya hum par hamesha kayam rakhein...aur hum sabhi ko aur humari aanewali pidhi ko nek, salaha aur kamyab banaye...Ameen
जवाब देंहटाएं