सोमवार, 17 नवंबर 2025

एक हंगामे पे मौक़ूफ़ है घर की रौनक

                                                     एक हंगामे पे मौक़ूफ़ है घर की रौनक 

       माशाल्लाह ये शादी का हंगामा था। परवेज़ सैय्यद के फ़रज़न्द अफ्फान का निकाह जनाब अय्यूब सैय्यद की साहबज़ादी  उनैज़ा से ,नासिक में 19th अक्टूबर को होना था  । 18th अक्टूबर २०२५ को नवापुर में हल्दी की रस्म और दावत का इंतेज़ाम था। बहुत सादगी से हल्दी की रस्म अदा की गयी। पाकिस्तान में और मुंबई में भी हल्दी मेहँदी की रस्म ,नाच ,गाना ,D.J और बेहूदगी देख कर , सर शर्म से झुक जाता है। माशाल्लाह रिश्तेदारों में  शादी  में ,न जहेज़ ,न बेहूदा रस्मे।

             पता चला में भी बुज़र्ग होगया हूँ। निकाह में सलीम तुराब अली शैख़ के साथ मैं ने भी शाहिद के फ़रायज़ अंजाम दिये । अय्यूब सैय्यद साहब ने भी अच्छा इंतेज़ाम रखा। परवेज़ सैय्यद ने २ लक्ज़री बसेस का इंतेजाम किया था। औरतों और हम जैसे बुज़र्गों के लिए स्लीपिंग कोच भी थी। नवापुर  से १०० लोगों ने निकाह में शिरकत की। 21st अक्टूबर को नवापुर म्युनिसिपल हॉल वलीमे की सुन्नत ,शानदार तौर पर अदा की गयी। 

Affan Unaiza walima 
      जो शख्स बन्दों का शुक्रगुज़ार नहीं होता ,वह अल्लाह का शुक्रगुज़ार हो ही नहीं सकता 
19th तह अक्टूबर २०२५ को अफ्फान के निकाह के बाद जनाब मुजाहिद शैख़ सर से मुलाक़ात हुयी मुझे खुद से पुरखुलूस अंदाज़ में introduce करवाया "ज़िन्दगी भर में कभी आप और इक़रा खानदेश को भूल नहीं सकता " उनके फ़रज़न्द फहद शेख को इक़रा खानदेश फाउंडेशन की तरफ स्कॉलरशिप मे दी गयी थी। शायद मुजाहिद सर पहले और आखरी शख्स हैं जिनोहने पहली फुर्सत में इक़रा खानदेश के अकाउंट में  रक़्म लौटा दी। फ़हद शैख़ ने इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में डिप्लोमा करने के बाद ABB मल्टीनेशनल कम्पनी में मुलाज़मत हासिल कर ली।इक़रा खानदेश फाउंडेशन के लिए  एक मिसाल है। मुजाहिद सर नासिक ITI में फिटर  सब्जेक्ट पढ़ाते हैं। और रोज़ाना जूनियर खानदेश ग्रुप और जलगांव रिलेटिव ग्रुप में स्टूडेंट्स के मार्ग दर्शन के लिए कोर्सेज ,JOB OPPORTUNITES उन्वान पर मालूमात शेयर करते रहते है। अल्लाह जज़ाए खैर अता करे आमीन। 
                      
MUJAHID SIR KE SATH

                                           
FAHD SHAIKH

                                                            
FAHD SHAIKH DIPLOMA CERTIFICATE


                                                      आज तुम याद बे हिसाब आये 

          अफ्फान के निकाह के बाद हॉल में मरहूम बशीर मामू के फ़रज़न्द कलीम शैख़ से मुलाक़ात हुयी। बशीर मामू की अहलिया (WIFE ) शबनूर बी से उनके घर जा कर मुलाकत की, भड़भूँजे की पुरानी यादें ताज़ा होगयी  । बशीर मामू को भड़भूँजे में सब बशीर टपाली के नाम से जानते थे। ट्रैन से जो पोस्ट आती बशीर मामू फ़ौरन सॉर्ट आउट करके लोगो तक पुहंचा देते थे। भड़भूँजे में सभी उनको जानते यही और वो भी सभी को जानते थे। मैं ने भी उनके साथ बैठ कर पोस्ट सॉर्ट आउट की है।  
          अल्लाह मरहूम बशीर मामू को जन्नत नसीब करे आमीन। 
           
Mohtrema shabnur bi ke sath
PS : जलगांव विजिट में मामू मुरकोबद्दीन से मुलाक़ात का ज़िक्र करना भूल गया। मुबा मुमानी की कमी महसूस हुयी कफील ने हमेशा की तरह ईरानी चाय से ज़ियाफ़त की। 
                                     

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