खुशबु जैसे लोग मिले
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| Late Basheer Kalal |
साँस लेने की भी कम्बख्त न मुहलत देंगी
१३ अक्टूबर २०२६ को हम से बशीर कलाल बिछड़ गए। हमारे साथ वक़्त गुज़ारने वाले डॉ खन्ना, मिसेस गोराडिया ,रूचि ,भारती ,फुर्टडो सर ,और कलाल साहेब की शम्मी कपूर (कलाल साहेब शम्मी को इसी नाम से बुलाते थे ),नाज़िमा जो सब एक ज़ंजीर की तरह जुड़े हैं ,एक कड़ा टूट गया। सब ने उनकी जुदाई के ग़म को दिल से महसूस किया। न जाने मुराद और दानिश के दिल पर कितने ग़मों के पहाड़ टूटे होंगे। अल्लाह उनेह सबरे जमील आता करे। आमीन
ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे
बहुत कम टाइम वो हमारे साथ रहे लेकिन वो हम सब में ,जिस तरह शक्कर दूध में घुल मिल जाती है
घुल मिल गए थे। गजेबो बनने के पश्चात् वो इस फैसिलिटी का फायदा नहीं उठा पाए। अक्सर हम सब बात करते करते चुप होजाते। हम सब को ज़ोर से "ओहो " की आवाज़ से चौंका देते। ओहो जैसे उन की ज़ात (pesonality ) का हिस्सा बन गया था। शुरू शुरू में हम लोग चौंक जाते थे। बाद में इस ओहो की आदत होगयी। अब ओहो कहने वाली ज़ात खामोश होगयी है।
कलाल ख़िताब उनके पूर्वजो को अंग्रेजी सरकार से मिला था। ज़िन्दगी भर कलाल साहेब ने औरंगाबाद में टीचरी की। अपने काबिल स्टूडेंट्स की एक आर्मी तैयार कर दी । उनके कई स्टूडेंट्स डॉक्टर्स ,इंजिनीर्स और बड़ी बड़ी पोस्ट पर जॉब करते हैं। बीमारी में उनके ex studnts उनका इलाज मुफ्त में करते थे। एक रेपुटेशन बनाया था स्कूल की जॉब में। इसी लिए वह औरंगबाद में रहना एन्जॉय करते थे। कलाल साहब हमेशा बिजी रहने की आदत से मजबूर थे। हम लोगों के साथ बैठे बैठे एकदम खड़े होजाते और गाना शुरू कर देते। विघ्नहर के बाहेर रेडी मेड कपड़ों की दुकान पर जा बैठते। १५ साल पहले उनकी वाइफ की मौत होगयी थी। उनके मोबाइल में उनकी फोट मुझे दिखा कर कहा "देखिये फरीदा जलाल की तरह दिखती है न " ज़िन्दगी कलाल साहेब ने हिम्मत से गुज़ारी और हमारे लिए मिसाल (Model ) छोड़ गए।
पिछले साथ औरंगाबाद की विजिट में उनके घर जाने का मौक़ा मिला था। उनके घर नाश्ता भी किया था।
जाने वाले कभी नहीं आते
जाने वालों की याद आती है
अल्लाह से दुआ है उनकी मग़फ़िरत करे आमीन (May his soul rest in peace )

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