शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

میرا پیام محبّت ہے جہاں تک پہونچے

                                                       

                                                                       میرا پیام محبّت ہے  جہاں تک پہونچے 

مکرمی 

سریش کمار مینگڈے نوی ممبئی ڈپٹی کمشنر (کرائم) نے پنویل میں آزادی کا امرت مہوتسو اور آپسی بھایئ چارہ عنوان پر اپنے خوبصورت خیالات کا اظہار  کیا - موصوف اسلام کی اچھی معلومات رکھتے ہیں اور اکثر و بیشتر آپ کے اس موضوع پر خوبصورت  ویڈیوز  وائرل ہوتے رہتے ہیں جس میں وہ اسلام کے بنیادی اصولوں  نماز روزہ اور محمّد  رسول الله کی احادیث سنااتے ہیں 

ہندوستان میں جس طرح نفرت کی سیاست کو فروغ دینے کی کوشش جارہی ہیں لوگوں کو ایک دوسرے سے دورکیا جا رہا ہے   کچھ لوگ آج بھی ایسی مثالیں قیام کر رہے ہیں جو تاریخ کی کتابوں مے سنہری حروف میں  لکھی  جا سکتی ہے داراوے  گاؤں  نیرول نوی ممبئی میں  گرووریہ بالا رام پاٹل اسکول جہاں مراٹھی ،انگریزی ،ہندی میڈیم  سکول اور جونیئر کالج کے علاوہ ہوٹل مینجمنٹ کالج ،سپورٹ اکیڈمی بھی ہے بالا رام پاٹل جو اس سکول کے بانی تھے اور کارپو ریٹور سنیل پاٹل کے والد ہیں  ان کی دلی خواہش اردو میڈیم  سکول شروع کرنے کے تھی -الحسنات اردو اسکول کے  بانی جناب رؤف خان نے جو عرصے سے جگه کی تلاش میں  تھے بالا رام پاٹل صاحب سے ملاقات کی جنوری میں بالا رام پاٹل سکول میں پہلی سے ساتوی کلاس  تک تین کمروں پر مشتمل کلاسز کا آغاز ہوگیا بالا رام پاٹل صاحب نے ٩٥ سالہ عمر اور علالت کے باوجود پروگرام مے شرکت کی اسکول شروع ہونے پر جو انکی دلی خواہش تھی خوشی کا اظہارکیا - اور آشیرواد بھی دیا -اردو میڈیم اسکول شروع ہونے کے دو مہینے بعد بالا رام پاٹل  کا سورگ واس ١٦ مارچ ٢٠٢٢ کو  ہوگیا لیکن اردو میڈیم اسکول اسکول کی شروعات اپنی زندگی  میں دیکھ لی اور ٢٠٠ غریب اردو میڈیم میں پڑھنے والے   بچوں کا مستقبل تاریک ہونے سے بچ گیا 

جو اہل سیاست ہیں وہ  اپنا کام جانے 

میرا پیام محبت ہے جہاں تک پہنچے 

راغب احمد شیخ 

نیرول -نوی ممبئی 

٩٨٩٢٣٦٩٢٣٣ 


शनिवार, 26 मार्च 2022

खुशबु जैसे लोग मिले



                                                               
                                                     डॉक्टर वकील अहमद मुनाफ अली (खिराजे अक़ीदत )
      मैं आज कनाडा (कैलगरी ) में हूँ कल तमाम ग्रुप्स में ये खबर पढ़ कर ख़ुशी हुयी के डॉ सय्यद वकील अहमद  मुनाफ अली को जलगांव शहर में  टीचर्स डे के अवसर पर "Best Digital Teacher " award से नवाज़ा गया। बहुत बहुत मुबारक  डॉ वकील साहेब ,आपका तार्रुफ़ मारूफ शेर से कराना चाहूंगा 
                                                मेहनत से वो तक़दीर बना लेते हैं अपनी 
                                                विरसे में जीनेह कोई ख़ज़ाना नहीं मिलता 
    डॉ वकील से २०२२ में उनके घर जाकर , उनसे और उनकी अहलिया और बच्चों से मैं ने और मेरी अहलिया ने मुलाक़ात की थी। बड़े खुलूस से हम दोनों का खैर मक़दम किया था। मुझे आज भी याद है। 
  जब उनेह पूना कॉलेज में CEO बनाया गया उनहोने मुझे फ़ोन करके बताया था। में ने उस वक़्त उनका मुख़्तसर खाका (Caricature ) लिखा था हाज़िरे खिदमत है। 
                                                  मुझ को जाना है बहुत आगे हदे परवाज़ से 
सय्यद वकील अहमद अब डॉक्ट बन गए हैं। रिश्तेदारों के लिए ये फ़ख्र का मुक़ाम है। हम सब की जानिब से दिल की गहराईओं से मुबारकबाद। अल्लाह से दुआ है वो कामयाबियों ,बुलंदियों  की ऊंचाइयों को छू ले आमीन। 
हमारी  सगी चाची ज़ाद बहन आपा  बी (मुनाफ अली की वालिदा )हमारे वालिद हाजी क़मरुद्दीन की चहेती हुवा करती। वो भी अपने चाचा को बड़े अब्बा कहती थी । हमारे बहनवी मंज़ूर अली भी बड़े सादा मिज़ाज इंसान थे। बहुत बार अब्बा के साथ धुले  देव पुर मुनाफ अली के घर जाना हुवा आपा  बी हयात थी , अब्बा के लिए बड़े चाव से अब्बा की पसंदीदा dish हलीम ज़रूर बनाती थी। अब्बा भी तारीफ़ करते नहीं थकते। 
मुनाफ अली ने  Master of commerce  की डिग्री उस वक़्त हासिल की  ,जब मीट्रिक पास की भी एक हैसियत हुवा करती थी । बैंकिंग का पेशा (Accountant)इख़्तियार किया। हलाल रिज़्क़ हासिल करने के लिए ज़िन्दगी भर जुटे रहे। अपनी औलाद की परवरिश बड़ी जान फिशनी से की। औलाद को तालीम से तो आरास्ता किया ही ,साथ साथ खुश अख़लाक़ी ,ईमानदारी ,शराफत और बुज़र्गों की इज़्ज़त कूट कूट कर औलाद में भर दी। 
वही बुलुंद अख़लाक़ी ,शराफत , ज़मीन से जुड़े रहने की  आदत  डॉक्टर वकील अहमद में भी पायी जाती है। डॉक्ट्रेट की डिग्री मिलते ही मुझे फ़ोन करके बताया । " सदर साहब(उस समय में इक़रा खानदेश का प्रेजिडेंट था ) मुझे डॉक्टर की डिग्री मिल गयी है " मैंने भी ढेर सारी दुवाओं से नवाज़ा। 
                                    पर ही काफी नही आसमानो के लिए 
                                    हौसला चाहिए ऊँची उड़ानों के लिए 
     वकील अहमद ने SWES उर्दू स्कूल से जो तालीम की शुरुवात की थी , तालीम का सिलसिला जारी रखा। Z B college धुले से B .Commerce की डिग्री हासिल की। वालिद के नक़्श क़दम पर चल कर SSVPS college से M. Commerce (post graduation) किया । वकील  अहमद को निचला बैठना नहीं आता 
                                    पलटना  झपटना झपट कर पलटना 
                                    लहू गर्म रखने का है एक बहाना 
फिर एक नयी मंज़िल की तलाश में ,डॉक्ट्रेट करने की दिल में ठान ली। मुझे बता रहे थे दो तीन Attempt के बाद डॉक्टरेट  मिली। डॉ साहब कई लोगों ने डॉक्टरेक्ट करते करते अपनी उम्र गवां दी बाल सफ़ेद होगये । आप की मेहनत लगन के आगे यूनिवर्सिटी को घुटने टेकने ही पड़े ,आप को डॉक्टर बनाना ही पड़ा। शायद किसी शयर ने आप के लिए ही कहा है। 
                                       हम ने तै की कुछ इस तरह से मंज़िलें 
                                       गिर पड़े, गिर के उठे ,उठ के चले 
फिर एक नयी उड़ान में डॉ वकील अहमद मसरूफ़ हैं  । CA के लिए qualify हो गए हैं इंशाल्लाह अल्लाह से  उम्मीद है वह आप को मंज़िले मक़सूद तक ज़रूर आपकी  रहनुमाई कर देगा। 
डॉ अब्दुल कलाम का कौल है "you have to dream before your dream comes true " अल्हम्दोलीलाह डॉ वकील अहमद आप ने खवाब देखा ,जुस्तजू की और ख्वाबों की ताबीर पायी.  काश क़ौम के हर बच्चे  में ये जज़्बा उजागर होजाये , क़ौम को तरक़्क़ी से कोई नहीं रोक सकेगा। 

डॉ वकील अहमद  ने UGC NET साल 2011 में क्लियर कर लिया था। कुछ समय अरिहंट कॉलेज में  अस्सिटेंस प्रोफेसर के ओहदे पर ज्वाइन किया। 2013 से पूना की मारूफ (पूना कॉलेज) में  कॉमर्स शोबे में असिस्टेंट प्रोफेस्सर के ओहदे पर फायज़ है। 
     अपने शागिर्दों में डॉ वकील बड़े मक़बूल हैं। Mind Mapping ,Mnemonics ,Edutainment ,keywords methods ये जदीद इस्तेलाहैं (Terms ) डॉ प्रोफेसर वकील अहमद ने अपने स्टूडेंस में introduce कराई हैं। और अब online फ्री इंग्लिश सिखाने का सिलसिला शुरू किया है। 
                                              तमाम उम्र तुझे ज़िंदगी का प्यार मिले 
                                             खुदा करे के ख़ुशी तुम को बार बार मिले 
 अल्लाह से दुआ गो  हूँ के डॉ वकील अहमद तर्रकी ,कामयाबी ,कामरानी हमेशा आप के कदम चूमती रहे। आमीन सुम्मा आमीन। 
Note : ऊपर की तमाम मालूमात में ने डॉ वकील अहमद से हासिल की है 
 

रविवार, 20 फ़रवरी 2022

कुछ शेर फ़क़त उनको सुनाने के लिए है



 
(L to R)Khasim,Dr. Sharief,Yusuf,Sadaf,Sohail,Ragib,Faruq ul Zama 

सदफ़ का उर्दू में मतलब होता है मोती। 

१२ फ़रवरी २०२२  बरोज़ सनिचर सदफ़ का अक़्द सोहैल शेख़ से होगया। शाम ०७३० बजे होटल Royal Tulip खारगर में ६० लोगों की मौजूदगी में मुफ़्ती जमशेद ने निकाह पढ़ाया । सादा सी तक़रीब थी । मजमुआ भी संजीदा लोगों पर मुश्तमिल था। 

वक़्त रुकता नहीं कहीं टिक कर 

१३ साल पहले जब फ़ारुक़ उल ज़मा की अहलिया एक हादसे में जुदा होई थी, सदफ़ स्कूल की शुरुवात ही कर रही थी। उसने इस संगीन हादसे को पसे पुश्त डाल दिया और अपनी तालीम के अलावा  अपनी बहनों की ज़िम्मेदारी भी अपने सर लेली। ज़हींन इतनी थी के स्कूल कॉलेज में टॉप करती रही। खेल ,डिबेट ,बेहतरीन announcer .कॉलेज स्कूल में प्रोग्राम कंडक्ट करने के लिए उसे ही बुलाया जाता। पनवेल पिल्लई कॉलेज में annual college day जो बड़े पैमाने पर conduct किया जाता है ,बड़े बड़े corporate द्वारा sponsor किया जाता है। सदफ़ ही manage करती। वो ही प्रोग्राम की host /anchoring  करती  और सब हिजाब में रहते हुए। आफरीन !

माशाल्लाह उसकी कप्बोर्ड उसके medals से भरी पड़ी है। अपने नस्बुल ऐन (Target ) MBA (HR )करने के बाद वो ३ साल से जॉब भी कर रही है। 
फ़ारुक़ उल जमा भी अपने  ख़ूने  जिगर से अपनी अवलाद की परवरिश बेहतरीन तौर पर करते रहे। कभी न माज़ी पर नज़र की न मुस्तक़बिल के ख़ौफ़ से परेशांन हुवे। मक़सद हमेशा रहा बच्चियों की तालीम। चारो बच्चियों को तालीम से आरास्ता करते रहे। अपनी तन्हाई ,अपने ग़म ,अपने अकेले पन को कभी भी किसी पर ज़ाहिर नहीं किया। अपनी बेख्वाब करवट बदलती रातों का किसी से कभी ज़िक्र नहीं किया। आज् जब अपनी लखत जिगर से जुदा होने पर उनेह ज़रूर ख्याल आया होंगा
तुम चले जावोंगे तो सोचेंगे 
हम ने क्या खोया हम ने क्या पाया 
जुदाई इंसान का मुक़्क़दर लेकिन ऐसी जुदाई जिस में ज़हनी सुकून हासिल हो क्या कहने। सदफ़ अपने ख्वाबों के 
शहज़ादे  सोहैल के साथ नयी आरज़ूओं ,नयी उमंगों के साथ नयी ज़िन्दगी की शुरवात करेंगी ये सोच कर फ़ारुक़ उल जमा को क़रार आ गया होंगा। किसी ने सच कहा है अच्छे दामाद का मिलना ready made बेटा मिलने जैसा ही होता है। 
ज़िन्दगी नाम है यादों का तल्ख़ और शीरीं 
भला किसी ने कभी रंग व बू को पकड़ा है 
शफ़क़ को क़ैद में रखा हवा को बंद किया 
२४-२५ साल का वक़्फ़ा जो  फ़ारुक़ उल ज़मा ने सदाफ के साथ गुज़ारा  , उनेह ऐसा महसूस होंगा ,गोया हवा का झोंका था जो आकर गुज़र गया। कभी कभी उसकी cupboard खोल कर उसके पुराने लिबास ,किताबें ,मैडल देख उसकी यादों की की खुशबू उनेह महका देंगी। उनेह महसूस होंगा 

तेरी क़ुरबत के लम्हे फूल जैसे 
मगर फूलों की उम्रें मुख़्तसर हैं 
सदफ तुम जहाँ रहो खुश रहो। तुम्हरी ज़िन्दगी हमेशा खुशीओं से भरी रही, ग़म कभी तुमको छू कर भी न गुज़रे। 
आमीन सुम्मा आमीन। 
तुम्हारी ज़िन्दगी में भीड़ हो इतनी खुशीओं की 
के ग़म गुज़रना भी चाहे तो रास्ता न मिले 






मंगलवार, 18 जनवरी 2022

Rajiv Sonthalia (khiraje Aqeedat)


 ज़िन्दगी से यही गिला (शिकवा ) है मुझे 

तू बहुत देर से मिला है मुझे 

राजीव आप ज़िन्दगी में बहुत देर से मिले भी और उसी तेज़ी से हम से बिछड़ भी गए। वंडर पार्क क्या बंद हुवा दोस्तों की महफिलें वीरान होगयी। वह साथ साथ सुबह सवेरे दोस्तों का ग्रुप वंडर पार्क के चक्कर मारता ,हल्ला गुला शोर व ग़ुल घोघा होता। किसि न किसी का जन्म  दिन मनाया जाता केक कटते तक़सीम किये जाते । और राजीव  तो  रोज़ाना (without  fail )कश्मीरी लहसन ले आता और जान पहचान अनजान दोस्तों में तक़सीम (distribute )कर देता ताके हमारी सेहत बानी रहे। Samuel street Mumbai पर राजीव की computer spare parts की दूकान थी। एक लड़का जो पुणे की reputed college से engineering graduate है ,लड़की जो MBA कर रही है अपनी विरासत में छोड़ गया है। 

अप्रैल-2021 महीने में कश्मीर सैर करके लौटा था। अपनी फॅमिली के फ़ोटोस face book पर बड़ी चाव से  शेयर किये थे। 

९  नवंबर  2021 को राजीव को pancreas का कैंसर डिटेक्ट हुवा था। डट कर बीमारी का मुक़ाबला किया १४ january-2022 को इस जान लेवा बीमारी ने जान लेकर ही साथ छोड़ा। 

उदास छोड़ गया वो हरेक मौसम को 

गुलाब खिलते थे कल जिस के मुस्कराने से 

भगवान आत्मा को शांति दे ख़ानदान को सब्र नसीब हो।  




मंगलवार, 2 नवंबर 2021

Tariq Sajad Munshi Zakira Munshi ki shadi ki salgirah

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30th October तारिक़ सज्जाद मुंशी हमारे खाला ज़ाद भाईकी ज़िन्दगी में अहमियत रखता है इसी दिन 46 साल पहले उनोहने अपनी होने वाली बीवी ज़ाकिरा से कहा था 
इजाज़त हो तो तुम्हारा नाम लिख लू 
मेरे दिल का वरक़ सादा  (blank ) है अब तक
30th October - 2021 के दिन शादी के 46  साल मुक़्क़मिल होने पर तारिक़ भाईजान ने अपनी शादी की सालगिरह पर नेरुल सेक्टर-२७ ओलिव स्टेट में टेरेस पर पार्टी का एहतेमाम किया। दूसरी ख़ुशी थी नया ३ बेड रूम फ्लैट जो इसी सोसाइटी में उनोहने ख़रीदा है। अपने क़रीबी रिश्तेदारों दोस्तों को अपनी इन खुशीओं में शामिल करने के लिए दावत दी थी। live singing प्रोग्राम ,बेहतरीन खाना और मौसम भी खशगवार था। दो साल के लम्बे lock down के बाद ये खूबसूरत दावत मौसमे बहार की आमद की तरह थी। मेहमानों ने दिल खोल कर दावत का लुत्फ़ लिया। 
भाईजान इंशाल्लाह हम इसी जोश ख़रोश से आपकी शादी की ५० वी सालगिरह भी मनाएंगे। आप ने माशाल्लाह जिस मेहनत से अपनी तीनो औलादों की परवरिश की अछि तालीम दिलवाई उनकी मारूफ घरानों में शादियां करवाई काबीले तारीफ़ है। बच्चों में वही सादगी ,ईमानदारी और जद्दो जहद करने की उमंग है जो आप में थी। अल्लाह  से दुआ है के वह भाभी ज़ाकिरा और आप दोनों को सेहत के साथ लम्बी  उमर अता करे। 
आमीन सुम्मा आमीन 
 

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2021

markaz AGM KE liye

                                                             انجام اسکے ہاتھ ہے، آغاز کرکے دیکھ 

                                                        بھیگے ھوۓ  پروں سے پرواز کرکے دیکھ 

 مرکز فلاح کی بھیگے پروں سے الله کی ذات پر یقین کے ساتھ  ١٩٩٨ میں  پرواز شروع ہوئی تھی پچھلے ٢٣ سالوں میں ٣٠٠٠ طالب العلموں کا مستقبل روشن کرکے ،١٥٨ گریجویٹس .پوسٹ گراجویٹس  ،آرکٹیکٹ معاشرے کو عطا کر ادارہ سلور جبلی کی طرف روا دواں ہے 

زکوہ کے اجتماعی نظام  کی  ،الله کے رسول کے زمانے میں شروعات ہوئی تھی  اور خلفایے راشدین نے اس نظام کو تقویت عطا کی -الحمدوللہ مرکز فلاح نیرول نے اس نظام کی تجدید کی اور گزشتہ  ٢٣ سالوں میں اسکول،کالجوں  میں تعلیم حاصل کرنے والے غریب یتیم طالب العلموں کی فی بھرنے کا براہے راست  انتظام کیا گیا  - نیرول کے مسلم غریب خاندانوں کا  عرق ریزی سے سروے کیا  گیا، طالب العلموں کی نشاندہی کی گی -انکے اسکول کالجوں میں مرکز کے اراکین نے ڈائریکٹ فی جمع کروائی کسی کو بھی ہاتھ میں رقم ادا نہیں کی گی ٢٣ سالوں کے بعد خوش آیند نتایج دیکھنے کو مل رہے ہیں مرکز فلاح نیرول کی مدد سے پڑھے لکھے نوجوانوں کی ایک فوج اپنے خاندان ،سماج ،ملک کے لئے تعمیری کاموں میں مدد کے لئے تیارہوگیہے ان میں انجینئرز بھی ہیں،کاروبار بھی کر رہے ہیں   ،آرکٹیکٹ بھی ہیں ،ٹیچرس بھی ہیں ،ایم بی اے بھی ہیں  

یہی جنوں ، یہی ایک خواب میرا ہے 

وہاں چراغ جلادو جہاں اندھیرا ہے 

سن ٢٠٠ میں احمد شیخ مرکزفلاح نیرول سے جڑا ٥٠٠ روپے کی تنخواہ پر ادارے کے کاموں میں  ہاتھ بٹاتا،مرکز فلاح کا  سہارا ملا تو احمد شیخ نے  بی کام کیا ایم بی اے کیا اور اب برلا کمپنی میں سارے انڈیا میں  کمپنی میں کام کرنے والے لوگوں کا ٹریننگ مینیجر ہے مرکز فلاح نے بھی اسکی قابلیت کو مد نظر رکھتے ہے اسے مرکز فلاح منیجنگ کمیٹی میں جیونٹ ٹریسریر کی پوسٹ سے نواز دیا 

گل حسسں خان اچھے عہدے پر فایز تھے سن ٢٠٠  میں اچانک انتقال کر گئے تین  اولادوں تصّور خان ،منّور خان اور اختر خان پرائمری اسکول میں تعلیم حاصل کر رہے تھے -مرکزفلاح  نے اس خاندان کا بھرپور تا عون کیا  اسکول سے کالج تک فی ادا کی آج تصّور خان پتھالوجی ڈپلوما حاصل کر صابو صد یق ہوسپٹل میں ٹیکنشین کا کام کر رہا ہے منّور خان بی ای مکینیکل انجینرنگ کرکے ریلوے میں انجنیئر ہیں اور اختر خان بی ای  الیکٹرانک کی ڈگری حاصل کر بی ایسس این ال میں انجنیئر کی پوسٹ پر کام کر رہا ہے -تصّور خان مرکز فلاح کے کاموں  لئے اپنا قیمتی وقت لگاتا ہے 

باصت خان اور ارباز خان کے والد بھی بچپن میں فوت ہوگے تھے والدہ اسکول میں پیون کا کام کر مشکل سے گزر بسر کرتی تھی مرکز فلاح نیرول نے دونو ن بھاییوں کی سکول اور کالج کی فیس ادا کی ارباز خان  بی کوم کی ڈگری ملا کر ایمیزون میں جاب کر رہا ہے باصت امیٹی یونیورسٹی سے ایروناٹک انجینرنگ میں بی ٹیک. آخری سال میں ہے کلاس میں ٹاپ کرتا ہیں 

ارباز خان مرکزفلاح نیرول کے لئے ڈونر بن گیا ہے کتنی کہانیاں ہیں جو مرکز فلاح نیرول کی کوکھ سے جنمی ہیں ، نیرول کی تاریخ میں سنھرے حروف میں  لکھی جاسکتی ہے

 کاش ہندوستان میں اجتما ئی   زکوہ کا نظام ہر شیر ہر گلی میں قایم ہوجاے ہندوستانی مسلمانوں  کی تاریخ بدل جاےگی 



मंगलवार, 21 सितंबर 2021

वाशी रेलवे स्टेशन कमर्शियल काम्प्लेक्स लिमिटेड १२थ AGM

VRSCCL के चेयरमैन राजेंद्र पवार ,डायरेक्टर्स कर्नल अनवर उमर ,राज ठक्कर ,मनोज शाह और एम. आर सिद्दीकी और ऑडियंस में बैठे हाज़रीन 
नमस्ते ,आदाब ,सलाम 
कामयाबी की तरफ बढ़ते १२ वे क़दम पर पहुँचने पर मुबारकबाद। 
"You have to dream before your dream comes true "
"Dream is not which you see in sleep ,dream is something which which does not let you sleep "
A.P.J. Abdulkalam 
राजेंद्र साहेब आप की टीम ने सपने देखे और उनेह सच कर दिखाया। वाशी  स्टेशन की ईमारत (बिल्डिंग ) जो फ़तेह पुर सिकरी की इमारतों की तरह खण्डर में बदल चुकी थी १२ सालों में आप की टीम ने ५ स्टार फैसिलिटी में तब्दील कर दिया। 
इमारतें खण्डर होजाती हैं अगर उनकी लगातार देख भाल न की जाये। कहा जाता है ज़बान से निकली बात कमान से निकला तीर  कभी वापिस नहीं आता। आप की कमिटी ने जो  वादे किये पुरे किये। इंसान को अपना अक्स (reflection )आईने में साफ़ नज़र आजाता है। आप की बनायी Annual Report आप का अक्स है जो कभी झूट नहीं बोलता। साफ़ नज़र आता है दो साल के Covid period में आप लोग लगातार वाशी स्टेशन काम्प्लेक्स को खूबसूरत बनाने में लगे रहे। किसी शायर ने आप ही के लिए कहा है 
ज़िन्दगी ये तो नहीं तुझ को सवारा ही न हो 
कुछ न कुछ हम ने तेरा क़र्ज़ उतारा ही न हो 
मुस्तक़बिल के लिए नेक ख़्वाहिशात। आप सब टीम मेंबर्स के लिए  दुवाएँ ।