रविवार, 18 जनवरी 2026

aaj ka sher

 

पेड़ काटने वालों को ये मालूम तो था 

जिस्म जल जायेंगे जब सर पे न साया होंगा 

پیڈ کاٹنے والوں کو یہ معلوم تو تھا 

جسم جل جاینگے جب سر پے نہ سایا ہونگا 

गुरुवार, 1 जनवरी 2026

get together

                                                 कोशिश भी कर उम्मीद भी रख रास्ता भी चुन 

                                                  फिर उसके बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर 

            २०२५ रुखसत हो रहा था चंद घड़ियाँ बची थी। अचानक भाभी जान (ज़ुबेदा ) समीरा ,नाएला मुझे और शगुफ्ता को मिलने मेरे घर पहुंचे। क्या खूबसूरत माहौल था। न शिकायत न कोई गिला लगा हर कोई हमारे ख़ानदान का हिस्सा होने पर खुश (शाद ) था। नाएला का एक जुमला चौंका देने वाला था। अल्लाह ने हमारे ख़ानदान को उस मुक़ाम पर पुहंचा दिया है जहाँ हम जो तमन्ना करते हैं उस से बढ़ कर मिल जाता है अल्हम्दोलीलाह । दिल अल्लाह के शुक्र से पुर है। हम सब ने इस बात को एग्री किया। माशाल्लाह हर किसी ने ज़िन्दगी में बेइंतेहा मेहनत की है तब ये नतीजा आया है। 

             अब्बा हाजी क़मरुद्दीन का  ज़िक्र हुवा किस तरह अपनी  क़लील (कम) जायज़ आमदनी से हम चार भाइयों की  परवरिश की और हम सब के दिल दिमाग़ में ये बात पेवस्त हो गयी के हलाल रिज़्क़ क्या मानी (मीनिंग ) रखता है। उज़्मा इंडिया आयी दोनों मिया बीवी मुझे मिलने आये। वह भी अपनी ज़िन्दगी में सरशार (खुश ) है। सना ,हिना ,इरम ,लुबना, नावेद ,ईशा ,रूही सदफ  अल्लाह ने सभी को एक खुशहाल ज़िन्दगी अता की है उस मालिक का जितना शुक्र अदा किया जाये कम हैं। कभी कभी अपने आप पर रश्क होता है ,अल्लाह  ज़माने की बुरी नज़र से मेहफ़ूज़ रखे।  हमारे बुज़ुर्ग भाभी जान ,डॉ वासिफ अहमद ,नीलोफर भाभी का साया हम  पर क़ायम रखे। नयी पौद (Generation ) को  बे इन्तहा तरक़्क़ी अता हो। आमीन 

कुछ खूबसूरत लम्हे जो साथ बिताये